लाखों रोजगार ला रही है मोदी सरकार

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बेरोजगार, हो जायें तैयार..आ रहा है मौसम – ए – रोज़गार..1 लाख करोड़ रुपए की लागत से 14 मेगा जॉब जोन बनाएगी मोदी सरकार

बहुत अच्छी खबर है ये और खासकर ये खबर नौजवानों के लिए है. वे नौजवान जो कि बेरोजगार हैं और निरंतर रोज़गार की खोज में रहते हैं, उनको कमर कस कर तैयार हो जाना चाहिए. क्योंकि देश की सरकार ला रही है रोज़गारों का मौसम.

जी हाँ, भाजपा-नीत केंद्र सरकार को रोज़गार उपलब्ध न करा पाने के लिए भारी आलोचना का शिकार होना पड़ा है.  सरकार की रोज़गार उपलब्ध कराने की यह योजना कदाचित इसी किस्म की आलोचना का जवाब है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार अगले लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ी योजना का श्रीगणेश करने वाली है. इस अहम् योजना के अनुसार लगभग 1 लाख करोड़ रुपए की लागत से देशभर में 14 बड़े राष्ट्रीय रोजगार क्षेत्र (मैगा नैशनल इम्प्लॉयमैंट जोन) स्थापित किए जाएंगे. इस योजना का लक्ष्य आगामी तीन सालों में देश भर के 1 करोड़ युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराना है.

युवाओं को दृष्टि में रखकर बनाई जा रही यह सरकारी योजना नीति आयोग के विशेष सहयोग से मूर्त रूप ले रही है. जहाजरानी मंत्रालय इस योजना को अंतिम रूप दे रहा है.

2014 में मोदी की भाजपा ने के लोकसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में कहा थी कि भारतीय जनता पार्टी हर वर्ष रोजगार के 2 करोड़ अवसर पैदा करने का वायदा करती है. लेकिन सरकार में आने के बाद मोदी सरकार इस दिशा में कुछ विशेष कर नहीं पाई.

इस असफलता के दाग से मुक्त होने के लिए सरकार ने कमर कास ली है और वह 2019 के लोकसभा चुनाव मैदान में जनता का सामना करने से पहले रोज़गार के मोर्चे पर अपने कदम मजबूत कर लेना चाहती है.

इस महत्वपूर्ण जानकारी में बताया गया कि नए निर्मित होने वाले रोजगार क्षेत्रों को कई वित्तीय एवं गैर-वित्तीय लाभ उपलब्ध कराये जाएंगे. इनमें निश्चित अवधि के लिए टैक्स से छूट (टैक्स हॉलिडे) भी दी जायेगी, पूंजी जुटाने पर राहत (कैपिटल सबसिडी) प्रदान की जायेगी और एक जगह से ही सभी अनिवार्य नियामकीय आदेशों की प्राप्ति (सिंगल विंडो क्लीयरैंस) की व्यवस्था भी की जायेगी. इतना ही नहीं ऐसे तमाम और भी प्रबंध इस अहम् रोज़गार योजना का हिस्सा बनेंगे.

ये सभी सुविधाएं उन कंपनियों को दी जाएंगी जो इन रोजगार क्षेत्रों को मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाएंगी. उन कंपनियों को ये सुविधाएं नवसृजित रोज़गारों की संख्या के आधार पर प्रदान की जाएँगी.

जहाजरानी मंत्रालय के प्रस्ताव के अंतर्गत इन 14 राष्ट्रीय रोजगार क्षेत्रों की स्थापना स्पैशल पर्पज व्हीकल रूट तहत तटीय राज्यों में किए जाये. इन क्षेत्रों में पारम्परिक रूप से श्रमिक आधारित वस्त्र, चमड़ा एवं रत्नाभूषण जैसे क्षेत्रों के अलावा फूड, सीमैंट, फर्नीचर, इलैक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के 35 इंडस्ट्रीयल क्लस्टर्स के होने की भी संभावना है.

आने वाले दिनों में रेहड़ी पटरियों वालों को भी काफी राहत मिल सकती है. देश के मज़दूर वर्ग के लिए भी सरकार द्वारा रोज़गार योजना में विशेष व्यवस्था की जा रही है. निम्न वर्ग के कामगारों के लिए एक न्यूनतम वेतन अर्थात कोड ऑन वेजेस तैयार किया जा रहा है ताकि एक तय सीमा से नीचे वेतन देकर मेहनतकश लोगों का शोषण न किया जा सके.

भारत सरकार चीन के सबसे बड़े बैंक के साथ मिल कर ‘स्टार्ट अप इंडिया’ निवेश योजना पर भी कार्य कर रही है ताकि आने वाले वर्षों में प्रति वर्ष 2 करोड़ नौकरियाँ वह देश के बेरोजगारों के लिए पक्की कर सके.

(पारिजात त्रिपाठी)

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