मिस्टर बीन के लॉलीपॉप

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लॉलीपॉप ले लो रे -राहुल गाँधी बाँट रहे हैं .. न्यूनतम आय की गारंटी और महिला आरक्षण दे रहा है ..

छोटे भीम / मिस्टर बीन राहुल गाँधी लोक सभा चुनाव करीब देख कर जनता को लॉलीपॉप बाँटने में लग गये हैं. कल सत्त्ता में आने पर न्यूनतम आय की गारंटी दे दी और आज महिला आरक्षण देने का वादा कर दिया. साथ में ये भी कह दिया कि वो चीन के लोगों को मेक इन इंडिया फ़ोन इस्तेमाल करते देखना चाहते हैं .

न्यूनतम आय कितनी दोगे जरा इतना भी बता देते ये लॉलीपॉप देने से पहले ? मनमोहन सिंह के समय में 32 रुपये कमाने वाला शहरी और 29 रुपये कमाने वाला ग्रामीण गरीब नहीं माना जाता था –क्या वो ही न्यूनतम आय देंगे राहुल जी –या जो किसानो के लोन माफ़ किये हैं मध्यप्रदेश और राजस्थान में 13 -15 और 20 -25 रुपये, वो न्यूनतम आय होगी.

2016 -17 के आर्थिक सर्वे में सुरेश तेंदुलकर समिति के अनुसार 7620 रुपये प्रतिवर्ष गरीबी रेखा निर्धारण करने के लिए तय किया गया था –यानि 635 रूपए प्रति माह –क्या इतना हर गरीब को दिया जायेगा –एक अन्य सर्वे के अनुसार इसे लागु करने के लिए GDP का 4.9 फ़ीसदी अतिरिक्त खर्च पड़ेगा –ये पैसा कैसे आएगा इसका कुछ राहुल गाँधी को अनुमान है –या वैसे ही करेंगे जैसा खाद्य सुरक्षा नीति लागू करने के लिए किया –कोई पैसा बजट में रखा ही नहीं.

वैसे मध्य प्रदेश और हाल हमें जीते राज्यों में शायद बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया था –क्या वो पूरा कर दिया –मदसौर और हर शहर में कहते थे उस शहर का नाम ले कर, जैसे, कि मेड इन मदसौर फ़ोन बनाएंगे –लग गई क्या फैक्टरियां मंदसौर और अन्य शहरों में.

महिला आरक्षण का क्या लॉलीपॉप दे रहे हो राहुल जी –राज्यसभा ने महिलाओं को विधायिका में 33% आरक्षण देने वाला आपका बिल 9 मार्च, 2010 को पास कर दिया था मगर आपकी सरकार 2014 में लोकसभा भंग होने तक उससे पास नहीं करवा पाई और अब आप दावा कर रहे हैं कि इस बिल को पास करवाने में देर नहीं लगायेंगे. कैसे कर लोगे भाई ? क्या सभी दल आपके हुकुम के गुलाम बन जायेंगे और जो 2014 तक नहीं माने वो अब मान जायेंगे?

वैसे महिला आरक्षण का तोता 1996 से हमारे देश की राजनीती में पाला जा रहा है –एकमत कोई होना नहीं चाहता –गाल बजाने में और दूसरों को दोष देने में कोई पीछे भी नहीं रहता –सच तो ये है जिसने भी ये आरक्षण देने के लिए 33 % की संख्या की खोज की (पता नहीं इसकी उत्पत्ति किसने की) उसने दिमाग नहीं लगाया.

आज सच ये है कि कोई 33% आरक्षण देने को राजी नहीं है मगर बोलने की कोई हिम्मत भी नहीं करता –ये आरक्षण राजनितिक दलों की गले की हड्डी बन चूका है जिसे ना निगल सकते हैं और ना उगल सकते हैं.

चुनाव की बेला है, कौन पूछता है आपको, जो मर्जी वादे कर दो, आपको मालूम है सत्ता में तो आना नहीं और अगर गलती से आ भी गए तो उससे क्या हो जायेगा –वादे तो होते ही तोड़ने के लिए हैं.

(सुभाष चन्द्र)
30/01/2019

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