सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला – रामलला को मिला मालिकाना हक, एक विवाद की हैप्पी-एंडिंग

(इन्द्रनील त्रिपाठी)

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सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई रंजन गोगोई की पांच जजों की बेंच ने अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद के मामले में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए विवादित ज़मीन रामलला विराजमान को सौंप दी है और केंद्र सरकार को मंदिर के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है. वहीं भूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के दावे को खारिज करते हुए उसे वैकल्पिक ज़मीन देने का निर्देश दिया है. साथ ही निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज़ कर दिया है.

जानते हैं सुप्रीम फैसले की बड़ी बातें  –

मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए

मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक ज़मीन दी जाए

सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ ज़मीन दी जाए

ज़मीन या तो अधिग्रहित ज़मीन पर या अयोध्या में कहीं दी जाए

आस्था के आधार पर मालिकाना हक का फैसला नहीं

अधिग्रहण से पहले तक मुस्लिम समाज नमाज़ पढ़ता था

निर्मोही अखाड़े का दावा किया गया खारिज़

रामलला विराजमान को कानूनी मान्यता

खुदाई में मिले सबूत खारिज़ नहीं कर सकते

एसआई की रिपोर्ट में मंदिर मिलने के सबूत

एएसआई की रिपोर्ट में नहीं कि ढांचा तोड़ कर मस्जिद बनी

मस्जिद बनने के वक्त से नमाज़ का दावा साबित नहीं

अंदरूनी हिस्से में लगातार पूजा होती आई

 सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दावा साबित नहीं कर सका

आस्था के आधार पर मालिकाना हक़ का फैसला नहीं

अंदरूनी हिस्से में हमेशा से पूजा होती थी

ज़मीन का अधिग्रहण होने तक मुस्लिम नमाज़ पढ़ते थे

समानता संविधान की मूल आत्मा

हिंदू पक्ष ने बाहरी हिस्से में दावा साबित किया

मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार 3 महीने में  ट्रस्ट बनाए

इस तरह देश के सबसे संवेदनशील और सियासी विवाद की हैप्पी-एंडिंग हो गई. इसमें मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ ज़मीन देकर एक नज़ीर पेश की गई.

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