दो अक्टूबर जन्मदिवस है आदर्श प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का

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जिस शख्स ने 1965 में पाक से युद्ध के दौरान खाना भी छोड़ दिया था ओर वेतन भी नही लिया ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्म दिवस पर शत शत नमन

भारत और पाकिस्तान के बीच १९६५ का युद्ध याद करें. तारीख थी सितम्बर 23, 1965 और स्थान था भारत का राजस्थान. दो घंटे युद्ध और चलता तो भारत की सेना ने लाहौर तक कब्जा कर लिया होता लेकिन तभी पाकिस्तान को लगा कि जिस रफ्तार से भारत की सेना आगे बढ़ रहीहमारा तो पूरा अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा.

तभी पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि वो किसी तरह से युद्ध रुकवा दे अमेरिका जानता था कि शास्त्री जी इतनी जल्दी नहीं मानने वाले क्यूँ कि वो पहले भी दो -तीन बार भारत को धमका चुका था धमका कैसे चुका थाअमेरिका से गेहूं आता था भारत के लिए PL 48 स्कीम के अंडर  PL मतलब Public Law 48 जैसे भारत मे सविधान मे धाराएँ होती है,ऐसे अमेरिका मे PL होता है  तो बिलकुल लाल रंग का सड़ा हुआ गेंहू अमेरिका से भारत मे आता था और ये समझोता पंडित नेहरू ने किया था जिस गेंहू को अमेरिका मे जानवर भी नहीं खाते थे उसे भारत के लोगो के लिए आयात करवाया जाता था .

आपके घर मे कोई बुजुर्ग हो आप उनसे पूछ सकते हैं कितना घटिया गेहूं होता था वो तो अमेरिका ने भारत को धमकी दी कि हम भारत को गेहूं देना बंद कर देंगे तो शास्त्री जी ने कहा हाँ कर दो  फिर कुछ दिन बाद अमेरिका का ब्यान आया कि अगर भारत को हमने गेंहू देना बंद कर दिया,तो भारत के लोग भूखे मर जाएँगे. शास्त्री जी ने कहा हम बिना गेंहू के भूखे मारे या बहुत अधिक खा के मरे तुम्हें क्या तकलीफ है. हमे भूखे मरना पसंद होगा बशर्ते तुम्हारे देश का सड़ा हुआ गेंहू खाके एक तो हम पैसे भी पूरे दे,ऊपर से सड़ा हुआ गेहूं खाये नहीं चाहिए तुम्हारा गेंहू.

फिर शास्त्री जी ने दिल्ली मे एक रामलीला मैदान मे लाखो लोगो से निवेदन किया कि एक तरफ पाकिस्तान से युद्ध चल रहा है  ऐसे हालातो मे देश को पैसे कि बहुत जरूरत पड़ती है  सब लोग अपने फालतू खर्चे बंद करे  ताकि वो domestic saving से देश के काम आए या आप सीधे सेना के लिए दान दे और हर व्यति सप्ताह में एक दिन सोमवार का ब्रत जरूर रखे तो शास्त्री जी के कहने पर देश के लाखो लोगो ने सोमवार को व्रत रखना शुरू कर दिया

परिणाम ये हुआ ये हमारे देश मे ही गेहूं का उत्पादन बढ्ने लगा और शास्त्री जी भी खुद सोमवार का व्रत रखा रखते थे!शास्त्री जी ने जो लोगो से कहा पहले उसका पालन खुद किया उनके घर मे बाई आती थी जो साफ सफाई और कपड़े धोती थी  तो शास्त्री जी उसको हटा दिया और बोला देश हित के लिए मैं इतना खर्चा नहीं कर सकता मैं खुद ही घर की सारी सफाई करूंगा  क्यूंकि पत्नी ललिता देवी बीमार रहा करती थी और शास्त्री अपने कपड़े भी खुद धोते थे उनके पास सिर्फ दो जोड़ी धोती कुरता ही थे

शास्त्री जी के घर मे एक ट्यूटर भी आया करता था जो उनके बच्चो को अँग्रेजी पढ़ाया करता था तो शास्त्री जी ने उसे भी हटा दिया तो उसने शास्त्री जी सेे कहा कि आपका बेटा अँग्रेजी मे फेल हो जाएगा तब शास्त्री जी ने कहा होने दो  देश के हजारो बच्चे अँग्रेजी मे ही फेल होते है तो इसी भी होने दो अगर अंग्रेज़ हिन्दी मे फेल हो सकते है तो भारतीय अँग्रेजी मे फेल हो सकते हैं ये तो स्वाभाविक है क्यूंकि अपनी भाषा ही नहीं है ये.

एक दिन शास्त्री जी पत्नी ने कहा कि आपकी धोती फट गई है आप नई धोती ले आईये शास्त्री जी ने कहा बेहतर होगा  कि सुई धागा लेकर तुम इसको सिल दो मैं नई धोती लाने की कल्पना भी नहीं कर सकता मैंने सब कुछ छोड़ दिया है पगार लेना भी बंद कर दिया है  और जितना हो सके कम से कम खर्चे मे घर का खर्च चलाओ.

अंत मे शास्त्री जी युद्ध के बाद समझौता करने ताशकंद गए और फिर जिंदा कभी वापिस नहीं लौट पाये.  पूरे देश को बताया गया कि उनकी मृत्यु हो गई जब कि उनकी ह्त्या की गई थी. भारत मे शास्त्री जी जैसा सिर्फ एक मात्र प्रधानमंत्री हुआ जिसने अपना पूरा जीवन आम आदमी की तरह व्यतीत किया और पूरी ईमानदारी से देश के लिए अपना फर्जअदा किया, जिसने जय जवान और जय किसान का नारा दिया क्यूंकि उनका मानना था देश के लिए अनाज पैदा करने वाला किसान और सीमा की रक्षा करने वाला जवान  दोनों देश ले लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.

स्वदेशी की राह पर उन्होने देश को आगे बढ़ाया विदेशी कंपनियो को देश मे घुसने नहीं दिया अमेरिका का सड़ा गेंहू बंद करवाया ऐसा प्रधानमंत्री भारत को शायद ही कभी मिले अंत मे जब उनकी पासबुक चेक की गई तो सिर्फ 365 रुपए 35 पैसे थे उनके बैंक एकाउंट मे. शायद आप आज कल्पना भी नहीं कर सकते कि ऐसा नेता भारत मे हुआ था और ये थे मेरे आदर्श लालबहादुर शास्त्री !!

(विजय राठौर)

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