राफेल पर षडयंत्र फेल

(सुभाष चन्द्र)

0
295

राफेल पर विपक्ष का षड़यंत्र फेल हुआ -प्रशांत भूषण से राहुल गाँधी तक सब बेनकाब हुए..

राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने विपक्ष के पूरे षड़यंत्र को तहस नहस कर दिया जिसका ताना बाना उन्होंने राफेल की खरीद को रोकने के लिए बुना था और पाकिस्तान और चीन को खुश करने के लिए भी.

यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण के साथ साथ “आप” के संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के 14 दिसम्बर,2018 के निर्णय के पुनर्विचार के लिए याचिकाएं लगाईं थी,उसी दौरान “द हिन्दू” के  संपादक एन राम ने एक लीक हुए दस्तावेज के टुकड़े अख़बार में छाप कर सनसनी फैला दी थी.

ये दस्तावेज छापा गया अप्रैल, 2019 में जबकि पुनर्विचार याचिका दायर की गई थीं जनवरी में और उसके आधार कुछ और थे मगर ये फर्जी दस्तावेजों के सामने आने से सारा आधार इन्हे ही बना दिया गया -सरकार ने इन्हे स्वीकार ना करने की अपील की मगर कोर्ट ने नहीं माना –इसी पर राहुल गाँधी ने कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया कि चौकीदार चोर है –राहुल की बात अगले लेख में करूँगा,अभी बस इतना ही.

प्रशांत भूषण, सिन्हा, शौरी और संजय सिंह तिकड़ी का बस एक ही मकसद था कि किसी तरह सरकार राफेल की कीमत के बारे में सभी जानकारी दे दे जिससे वो विदेश में बैठे अपने मालिकों को खुश कर सकें –जबकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बंद लिफाफे में वो सब बताया जो अदालत ने माँगा –मगर इस गिरोह ने आरोप लगाया कि सरकार ने गलत बयान दिया है हलफनामा दे कर.

कल इन सभी याचिकाकर्ताओं की धज्जियाँ उड़ गई अदालत के फैसले से जिसमे साफ़ कहा गया कि कोई ऐसा मसला नहीं है जिस पर CBI या  SIT से जांच की जरूरत हो –इस केस में फैसला 10 मई को सुरक्षित हो गया था जो कल सुनाया गया –लेकिन केस की सुनवाई के दौरान संजय सिंह से गोगोई साहब खासे नाराज़ हुए और उसकी बातों को अदालत की अवमानना भी कहा था –आज लगता है संजय सिंह को भी गोगोई साहब ने छोड़ दिया वरना इसे अलग से रगड़ा लगता.

प्रशांत भूषण ने तो 14 दिसंबर के फैसले के बाद यहाँ तक कह कर सुप्रीम कोर्ट पर भी उंगली उठाई थी कि सरकार ने बंद लिफाफे में क्या लिख कर दिया, हमें क्या पता –हमें बिना कुछ बताये अदालत सरकार की बातें कैसे स्वीकार कर सकती है? – ये कह कर उसने कोर्ट के आचरण पर भी कीचड फ़ेंक दी थी.

प्रशांत भूषण, शौरी और यशवंत सिन्हा ने मोदी को फ़साने के लिए सारे हथकंडे अपनाये और उसके लिए सबसे पहले मोहरा बनाया CBI के निदेशक अलोक वर्मा  को, जिनके बारे में ये गिरोह और राहुल गाँधी कहते रहे कि वो राफेल की जांच शुरू करने जा रहे थे कि उन्हें मोदी ने हटा दिया.

मगर सब कुछ विफल हो गया और ये चतुर तिलंगे अलोक वर्मा को भी नहीं बचा पाए –अलोक वर्मा इनके गुलाम थे जिन्होंने इनको पल-पल की खबर दी कि वो क्या करने जा रहे हैं.  

प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी में अगर जरा भी शर्म बची है तो उन्हें अब मोदी से माफ़ी मांगनी चाहिए –लेकिन ये बड़ी मोटी चमड़ी के हैं, इनके दिल में मोदी के प्रति ईर्ष्या कूट कूट के भरी है –अब ये किसी नए षड़यंत्र की तैयारी करेंगे. संजय सिंह से तो कोई आशा नहीं करनी चाहिए क्यूंकि वो तो “आप के कर्मचारी” है जो अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझते.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here