बीइंग रियलिस्टिक: ये भी है एक बड़ा सच Corona काल नंबर टू का !!

Corona से अधिक डरावना उसका शोर है, वैसे भी भारतीय मीडिया के लिये शोर खबर है, शांति नहीं !!

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डरावना चित्र बना कर दिखाया जा रहा हो तो डर लगना स्वाभाविक है और अगर वह डरावना चित्र शोर भी करने लगे तो और डर लगना स्वाभाविक है और यदि वह डरावना चित्र अपने शोर के साथ हर तरफ से आकर आपको घेरने लगे तो वही हालत होगी जो आज कोरोना काल नंबर टू में देश की हो रही है. पता नहीं लोग मोदी की सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं या मोदी के देश को?
ये तो सच है कि कोरोना काल नंबर वन भी आया था और ये कोरोना काल नंबर टू भी चल रहा है और इसमें भी कोई शक नहीं कि कोरोना पहली बार भी प्रायोजित था और इस बार भी प्रायोजित है और आगे भी प्रायोजित हो सकता है यदि सरकार ने वायरस को रोकने के लिए समय रहते घर के अंदर दरवाजे खिड़कियों पर पहरे नहीं लगा दिये और घर के बाहर सावधानियों की कांटेदार बागड़ न लगा दी.

ये एक प्रायोजित हमला है

कोरोना भारत पर एक प्रायोजित हमला है जो ज़ाहिर है कोरोना कंट्री चीन का षड्यंत्र है. चीख-चीख कर डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन का विरोध किया था और शी जिनपिंग पर आरोप लगाया था कि ये महामारी का वैश्विक षड्यंत्र दुनिया को उनकी ही देन है. परिणाम ये हुआ कि चीन ने अपनी सारी ताकत लगा दी और ट्रम्प की चुनावी हार हो गई. भारत के मोदी जी ट्रम्प नहीं हैं. वे शोर मचाने के बजाये काम कर जाने पर विश्वास करते हैं. उन्होंने भारत में चीन का काम कर दिया और उसके ढाई सौ से अधिक ऐप बैन करके उसे करारी आर्थिक चोट दी. पीएम मोदी ने उसके बाद कोरोना काल नंबर वन के समय दुनिया भर में भारत की दवाइयाँ भेजी और दुनिया में फार्मा का नया वैश्विक डेस्टीनेशन बन कर उभरा भारत राष्ट्र. उसके बाद मोदी जी ने कोरोना काल नंबर वन को इतनी समझदारी से मैनेज किया कि लॉकडाउन के बाद भी देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ नहीं पाई. उसके बाद भी बस नहीं की मोदी जी ने और भारत में एक नहीं दो-दो वैक्सीन बनवा डाली. इस वैक्सीन ने न केवल भारत की देश में कोरोना के विरुद्ध मदद की है बल्कि दुनिया भर में भारत अब अपनी वैक्सीनों का निर्यात कर रहा है. इन सबसे जले-भुने चीन के कलेजे पर सांप तब और भी बुरी तरह से लौट गया जब चीन से दुनिया भर की कंपनियाँ निकल निकल कर भारत आने की तैयारी करने लगीं. इसका ही विरोध करने के लिये चीन ने इतनी भारी साजिश को भारत में अंजाम दिया.

जैविक युद्ध की चीनी तैयारी

चीन दशकों से जैविक हथियार बना रहा है और ये तथ्य किसी से भी छुपा हुआ नहीं है. इसका सबसे बड़ा प्रमाण न केवल वूहान शहर की जैविक-अनुसंधानशाला है अपितु स्वयं कोरोना वायरस भी है जिसे पूरी योजना के साथ विश्व में प्रसारित किया गया और शोर ये मचाया गया कि कोरोना लीक हो गया. दुनिया डर गई कि कोरोना नामक पागल कुत्ता छूट गया है अब दौड़ दौड़ कर सबको काटेगा!  वैश्विक आवागमन के कारण हर देश से हर देश में वायरस को पहुंचाने में देर नहीं लगी और मौका देख कर डब्ल्यूएचओ ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया. इससे सर्वाधिक हानि पहुंची विश्व की सर्वोच्च महाशक्ति अमेरिका को जहाँ 14 करोड़ नौकरियाँ चली गईं. 34 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में चालीस प्रतिशत नौकरियाँ को चला जाना मायने रखता है. औऱ बड़ी बात ये कि कोरोना काल नंबर वन में वायरस से बुरी तरह पीड़ित अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों को आतंकित करके चीन ने उनको खरीद लिया और अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचा. उसके बाद इस साजिश का विरोध करने वाले और दुनिया भर में चीन का नकाब उलटने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी जाना पड़ा.

भारत से भुना हुआ है ईर्ष्यालु चीन

अब चीन के सामने अमेरिका की तरह ही दूसरा बड़ा प्रतिद्वंद्वी भारत तन कर खड़ा है जिससे कोरोना काल नंबर वन में ही चीन को मुह की खानी पड़ गई थी. चीन को लगा कि भारत और भारत के मोदी जी दोनो को आतंकित कर दूंगा और शी जिंग पिंग ने अपनी भाड़े की सेना भारत के लद्दाख सीमा क्षेत्र में भेज. साथ ही उसने पाकिस्तान और नेपाल को भी अपने साथ मिला कर भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश की. किन्तु छप्पन इन्च का सीना चीन को भी दिखाई दे गया और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा संप्रभुता के प्रश्न पर आत्मसमर्पण न करने वाले भारत के दृढ़ इरादों के आगे उसे घुटने टेकने पड़े और उसे अपनी सेना बेरंग वापस लौटानी पड़ी. भारत के सामने बदतमीज चीन की मनोवैज्ञानिक पराजय तो हुई ही, दुनिया के देशों के सामने भी उसकी नाक कट गई और भारत की वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थिति सुदृढ़ हो गई.

भारत से लिया है जैविक-प्रतिशोध

ऐसे में तिलमिलाये चीन ने अपना साजिशाना वार एक बार फिर किया और इस बार 2021 के चौथे महीने में कोरोना नामक अपने जैविक हथियार को भारत और इंग्लैन्ड के विरुद्ध इस्तेमाल किया. इंग्लैन्ड से चीन की नाराजगी हांगकांग की वजह से जगजाहिर है. देखते ही देखते भारत और इंग्लैण्ड में कोरोना ने अपनी दूसरी लहर से कहर पैदा कर दिया. हैरानी की बात ये है कि इन दोनों राष्ट्रों के अगल-बगल के देशों में कुछ नहीं हुआ. इधर न पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान में कुछ नुकसान हुआ, न उधर आयरलैंड स्कॉट लैंड या बगल के यूरोपीय देशों में कोरोना के केस सामने आये. ज़ाहिर है निशाना लगा कर तीर छोड़ा गया था किन्तु इस बार इस तरह के चीनी तीर-युद्ध को भारत सरकार ने नोटिस में ले लिया है और अब इस पर उच्चस्तरीय रणनीति और ‘कूट’नीति की तैयारी भी भारत में खुफिया स्तर पर प्रारम्भ हो गई है.

सबको पता है मगर सब चुप हैं

इंग्लैन्ड ही नहीं, चीन-विरोधी दुनिया के सभी देश, चाहे वह अमेरिका हो, जापान हो, ऑस्ट्रेलिया हो या जर्मनी और फ्रान्स -सभी को यह चीनी षडयन्त्र समझ आ रहा है किन्तु भारत की आदत है खामोश रहने की. इसलिये भारत की परिपक्व डिप्लोमैसी ने ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. वैसे ये रणनीति दुनिया के बाकी देशों की भी है कि सबकुछ समझते हुए भी उन्होंने सीधे कोरोना काल नंबर टू को जैविक युद्ध की संज्ञा नहीं दी. कारण ये भी है कि भारत से ईर्ष्या इन सभी देशों को भी है क्योंकि भारत तेजी से विश्व के राजनीतिक मानचित्र पर उभरा है और आज अमेरिका, चीन और रूस की तरह दुनिया की चौथी महाशक्ति के रूप में मजबूती से सामने आया है और चूँकि ये हमला मूल रूप से भारत पर हुआ है, दुनिया पर नहीं. इसलिये दुनिया के देशों को इस बात पर चीन के ऊपर आरोपों का हमला समझदारी नहीं लगा!

भारत में भीतरी चीनी साजिश

कोरोना कंट्री चीन ने भारत में अपनी साजिश को मजबूती देने के लिये भारत स्थित अपनी छुपी हुई लॉबी का इस्तेमाल किया. खुले शब्दों में कहें तो भारत के भीतर भारत के विरोधी तत्वों ने चीन का साध दिया और देश के साथ गद्दारी करते हुए चीनी साजिश में जोरदार भूमिका अदा की.  राजनीतिक रूप से चीन के हाथों बिके बड़े-बड़े नेता, मीडिया कंपनियाँ, साथ ही कई बड़े डॉक्टर्स और फार्मा कंपनियाँ इस साजिश में परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अपना ईमान बेच कर देश बेचने के लिये शामिल हुए. उसके बाद इन लोगों ने कोरोना की जीत औऱ सरकार की हार दिखाने में दिन-दूनी रात चौगुनी कोशिश शुरू कर दी. पिछले एक माह में अर्थात दस अप्रेल के बाद से देश में ऐसा माहौल बना दिया गया कि मानो देश का हर आदमी मौत के मुह में जाने वाला है. लगने लगा कि अब तो ईश्वर भी प्राण नहीं बचा पायेगा.

ऐसे फैल गया कोरोना देश में

सड़कों पर मास्क और आंशिक लॉकडाउन से होते-होते लॉकडाउन विशालकाय होने लगे. टीवी चैनल चिल्लाने लगे कि लोग मर रहे हैं – अस्पतालों में जगह नहीं है – ऑक्सीजन की भारी कमी है – कोरोना टू जानलेवा है – सरकार असहाय है..कोरोना तो आपकी जान ले के ही मानेगा – आज और ज्यादा केस आये – आज तो केस डबल हो गये!! -वगैरह वगैरह. जनता है मासूम. दिमाग से ज्यादा दिल इस्तेमाल करती है. मजदूर लोग फिर डर कर भाग लिये अपने अपने गाँव. पैसे से समर्थ लोग छींक आने पर भी डर कर भागने लगे अस्पताल. ज्यादा टेस्ट हुए तो ज्यादा मरीज भी दिखाई दिये. केस बढ़ते चले गये और शोर भी बढ़ने लगा. कोरोना नंबर वन के लॉकडाउन के बाद देश बड़ी मुश्किल से फिर से खड़ा हुआ था, अब फिर से बैठने लगा. लोगों को लगा अब तो वैक्सीन भी लगवा ली फिर भी हम कोरोना से मारे जा सकते हैं – क्योंकि मीडिया यही दिखा रहा था. कोरोना काल नंबर टू ने भारत की वैक्सीन के लिए भी चुनौती तैयार कर दी किन्तु ये सब प्रचार के स्तर पर ही दिखाई दिया  -वास्तविकता के धरातल पर वास्तव में ऐसा नहीं है. किन्तु दुर्भाग्य ये है कि जो दिखता है वही बिकता है अर्थात जो टीवी ने दिखा दिया लोगों ने वही मान लिया.

टीवी के लिये शोर है खबर, शांति नहीं

टीवी ने नए नए केस तो दिखाए पर ये नहीं बताया कि रोज़ नए केस आ रहे हैं तो रोज़ लोग ठीक भी हो रहे हैं. टीवी ने इन दोनो तरह के आंकड़ों की तुलना नहीं की. उसने ये भी नहीं बताया कि जो लोग अस्पताल नहीं जा रहे हैं वे आसानी से ठीक हो रहे हैं. टीवी न्यूज़ ने रोज ये भी नहीं बताया कि कुल ठीक हो गए लोगों की संख्या कितनी है बल्कि वो ये बताने में लगे रहे कि कुल केसों की संख्या कितनी बढ़ गई है. बदमाशी तो देखिये कि सनसनीबाज़ इन चैनलों ने सनसनी फैलाने की बद्तमीज़ कोशिश में अपने आंकड़ों में सक्रिय कोरोना मामले देश के कुल कोरोना मामलों के साथ मिला कर दिखाए ताकि लोग अधिक से अधिक डर के शिकार हों. रोज ठीक हो रहे लोगों या कुल ठीक हो गये मामलों को कम करके सिर्फ सक्रिय मामले दिखायेंगे तो लगेगा कि ये कोई महामारी नहीं है और लोगों का डर निकल सकता है. ये योजना काफी हद तक कामयाब भी रही और चारों तरफ शोर फ़ैल गया – बाहर हालात बहुत बुरे हैं !!

मगर सच तो ये है

सच ये है कि दूसरी लहर खतरनाक तो है किन्तु सबके लिए नहीं. सच तो ये है कि एक सौ चालीस करोड़ जनसंख्या वाले देश में जितने ज्यादा टेस्ट होंगे -कोरोना के उतने ही ज्यादा मामले सामने आएंगे. ये कोई नहीं बताएगा कि इससे ज्यादा लोग अपने घरों में संक्रमित हो कर ठीक भी हो गए हैं. कोरोना की जाँच हेतु आरटी पीसीआर टेस्ट उपकरण बनाने वालों ने खुद ही ये बात कही है कि ये उपकरण व्यापक कोरोना संक्रमण की जांच के लिए नहीं बनाया गया है बल्कि अनुसंधान के उद्देश्य से बनाया गया है. कहने का तातपर्य ये है कि अनुसंधान के लिए निर्मित इस उपकरण में परफेक्शन न भी होगी तो काम चल जायेगा किन्तु व्यापक तौर पर जनता के बीच इसका इस्तेमाल करने से सौ प्रतिशत सत्य परिणामों की अपेक्षा कैसे की जा सकती है? ऐसे में कोरोना पॉज़िटिव रिपोर्ट की सत्यता को जांचने के लिए किसी दुसरे उपकरण की आवश्यकता है जो कि दुर्भाग्य से है ही नहीं. सुना तो ये भी गया है कि एक ही व्यक्ति ने एक ही दिन में दो तीन बार अलग अलग स्थानों पर कोरोना टेस्ट कराया तो उसके अलग अलग परिणाम आये. कभी पॉज़िटिव तो कभी निगेटिव. इसका मतलब ये है कि शायद हम राष्ट्रीय स्तर पर बेवकूफ बनाये जा रहे हैं और इस साजिश में कौन कौन लोग शामिल हैं – कहना काफी मुश्किल है.

ये कौन बतायेगा

पूछा जाना चाहिये कि कितने प्रतिशत लोग कोरोना के शिकार हो रहे हैं, कितने प्रतिशत लोगों की मौत हो रही है और कितने प्रतिशत लोग ठीक हो रहे हैं. प्रतिशत से जुड़े आंकड़े यदि सही-सही मिल सकें तो पता चल जायेगा कि एक सौ चालीस करोड़ वाले देश भारत में कोरोना काल नंबर टू का प्रभाव कितना प्रतिशत है. किन्तु शोर खबर है चैनल वालों के लिये, शांति नहीं. इसलिये इन आंकड़ों पर कोई बात नहीं करेगा क्योंकि इन आंकड़ों से ये सच सामने आयेगा कि कोरोना संक्रमण आया तो है और ये जानलेवा भी है किन्तु ये उतनी जान ले नहीं रहा है उतनी जितनी दिखाई जा रही हैं. अर्थात लोग ठीक भी हो रहे हैं जो हर साल होने वाले वायरल बुखार से घिरने के बाद चार पांच दिन में ठीक भी हो जाते हैं. किन्तु यदि आप अस्पतालों के आंकड़े उठायें तो आपको ये भी पता चलेगा कि हर साल नॉर्मल तरीके से आने वाले वायरल बुखारों में भी कई लोग मर जाते हैं और उनके मरने की वजह वायरल बुखार नहीं बल्कि रोगी के शरीर में इम्यूनिटी का गिरा हुआ स्तर और / अथवा उनके शरीर में किसी दूसरी बडी बीमारी का पहले से होना होता है.

कोरोनिल हो गई कामयाब

याद कीजिये सबसे पहले बाबा रामदेव की कोरोना मेडिसिन सामने आयी थी जिसका उद्घाटन टीवी चैनल पर किया गया था किन्तु उसके तुरंत बाद बाबा पर इतना दबाव डाला गया कि कोरोनिल नामक कोरोना के उपचार हेतु बनाई गई उनकी दवा के लिए उनको घोषणा करनी पड़ी कि ये कोरोना का उपचार नहीं करती है बल्कि कोरोना के विरुद्ध इम्युनिटी डेवलप करती है. आज आप आंकड़े उठा कर देख लीजिये. कोरोनिल खा कर इस तथाकथित कोरोना नंबर टू के संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या कितनी है. आप हैरान रह जाएंग ये जान कर कि इसके परिणाम बहुत अच्छे सामने आ रहे हैं और कोरोनिल पतंजली आउटलेट्स में प्रायः ही आउट ऑफ़ स्टॉक होती देखी जा रही है. बाबा रामदेव आज भी खुल कर टीवी चैनल पर प्रायः रोज़ ही ये बात कह रहे हैं कि कोरोनिल खाइये और कोरोना से जान बचाइए. हाँ, वे साथ में प्राणायाम करने को भी कह रहे हैं. उनके अनुसार देश भर में जाने कितने लोगों ने सिर्फ प्राणायाम करके कोरोना को मात दे दी. किसी को ये तथ्य गलत लगते हों बाबा जी से इसकी तस्दीक कर लें. पर टीवी पर न्यूज़ देख कर आत्महत्या न करें !!

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