Editorial: किसने कहा कि Baba Ramdev अकेले हैं?

सारा भारत बाबा रामदेव के साथ है, हम उन लोगों को भारत का मानते ही नहीं जो देश की विरासत के विरोधी हैं देश की सनातन संस्कृति के शत्रु हैं..

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दुनिया में किसी को कोई ग़लतफ़हमी नहीं होनी चाहिए कि स्वामी रामदेव अकेले हैं. हालत तो ये है कि अगर स्वामी रामदेव आज्ञा दे दें तो सारे देश के लोग सड़कों पर निकल आएंगे. दुख की बात है जिस व्यक्ति को देश का सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिये, कुछ लोगों ने उनको कटघरे में खड़ा कर दिया है. इस देश की राजसत्ता राष्ट्रवादियों के हाथों में है और उन्हें भी राष्ट्र के इस हीरक-पुत्र का सम्मान करना चाहिए जिन्हें हम स्वामी रामदेव के नाम से जानते हैं.

देश में दो ही सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं

तमाम अन्य सर्वोच्च व्यक्तित्व भी हो सकते हैं किन्तु शुद्ध रूप में देश में दो ही सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं जिनको दुनिया स्वीकारती है और वे हैं प्रधानमंत्री मोदी और योगगुरु स्वामी रामदेव. इन दोनों ही महापुरुषों ने देश में ही नहीं देश के बाहर भी भारत का डंका बजाया है. राजनीतिक के वैश्विक खलनायकों को जिस तरह से मात दे कर आज नरेंद्र मोदी विश्व के सर्वोच्च नेताओ में से एक हैं उसी तरह दुनिया की कमाऊ नीयत वाली धंधेबाज फार्मा कंपनियों को शिकस्त देकर भारत की चिकित्सा पद्धति और योग को आज स्वामी रामदेव ने दुनिया में सम्माननीय स्थान प्रदान करवाया है.

दो-दो उपकार हैं बाबा के भारत पर

बाबा नम्र व्यक्तित्व हैं इसलिए भले ही वे न स्वीकार करें – किन्तु उनके उपकार हैं आज भारत पर और भारतवासियों पर. न केवल भारत की सनातन चिकित्सा जो कि धन्वंतरि और अश्विनी कुमारों द्वारा पोषित और पालित रही है उसे कलियुग के घोर दौर में भौतिकवादी भारत के धरातल से उठा कर विश्व के कैनवास पर सजाया है बाबा रामदेव ने. दूसरा उपकार बाबा का सांस्कृतिक भारत पर इस तरह है कि उन्होंने योग को जो कि मूल रूप से देव चिकित्सा है और तन के साथ मन को भी स्वस्थ करती है उसे सप्रमाण दुनिया के सामने स्थापित कर दिया है.

सरकार को देना होगा दखल

इस विवाद में जिसमे भारत के योगऋषि बाबा रामदेव के साथ शत्रुता का व्यवहार किया जा रहा है, अब समय आ गया है कि सर्वोच्च राजनैतिक शिखर से सामने आ कर इस विवाद में स्वामी रामदेव का समर्थन किया जाए और उन्हें शुद्ध रूप से दोषमुक्त किया जाए क्योंकि यदि सचमुच बाबा ने कुछ कहा है एलोपैथी के लिए तो इसके लिए उन पर कोई दोष नहीं बनता है. दोष तो उन पर बनता है जो कि भारत की सनातनी विरासत के दोनों अंगों – योग और आयुर्वेद के विरोधी हैं. याद रहना चाहिए कि देश ऐसे लोगों की विरोधी है इसलिए स्वामी रामदेव का विरोध देश की आम जनता को प्रसन्न कदापि नहीं कर सकता !!

-पारिजात त्रिपाठी (प्रधान संपादक, न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल)

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