दिल्ली का चेहरा बदलने वाला आज रुला कर चला गया….

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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित नहीं रही. 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. शुक्रवार सुबह उन्हें सीने में जकड़न की वजह से एस्कॉर्टस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने 3 बजकर 55 मिनट पर अंतिम सांस ली. शीला दीक्षित की पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए निजामुद्दीन स्थित पर रखा गया है. रविवार को दोपहर ढाई बजे अंतिम संस्कार होगा.

दिल्ली के दिल को दहलाने की इस खबर ने सिर्फ सियासत तक ही संवेदनाओं का सफर तय नहीं किया बल्कि दिल्ली वालों के लिए सदमा है. 15 साल तक दिल्ली में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहकर शीला दीक्षित ने विकास के जो आयाम तय किए उसने दिल्ली की तस्वीर को ही  बदल कर रख दिया.

सौम्य, मृदुभाषी, संयत, विनम्र शीला दीक्षित की राजनीतिक सादगी उनके विरोधियों को भी सम्मान करने पर मजबूर कर देती थी. उनके निधन से सियासी जगत में शोक की लहर है. पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें शीला दीक्षित के निधन से गहरा दुख हुआ है. उन्होंने दिल्ली के विकास में अतुलनीय योगदान दिया है. ईश्वर उनके परिवार और समर्थकों को शांति दे.  

राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा- शीला जी के निधन की खबर सुनकर पूरी तरह से हिल गया. वह कांग्रेस की प्यारी बेटी थी, जिनके साथ मेरी व्यक्तिगत घनिष्ठ निकटता थी.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया – शीला दीक्षित के निधन की खबर अत्यंत दिल को दहलाने वाली खबर है.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने शीला दीक्षित को उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था. इस चुनाव में मोदी-लहर की वजह से उन्हें दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी के सामने हार का सामना करना पड़ा था.

शीला दीक्षित लगातार पंद्रह सालों तक मुख्यमंत्री रहने वाली देश की पहली महिला नेता थीं. उन्हें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी का करीबी माना जाता था. साल 1998 में वो पहली बार दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थी.  इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को लगातार सफलता मिलती रही थी.

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