Ganesh Chaturthi 2020:गणेश चतुर्थी पर ‘बप्पा’ का आशीर्वाद किस तरह बरसेगा? इन बातों का रखें विशेष ध्यान

गणेश प्रतिमा की स्थापना से पहले किन किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए और मूर्ति लेने से पहले मूर्ति का स्वरूप कैसा हो और किस रंग की मूर्ति से क्या लाभ होगा? ये जानना बहुत आवश्यक है

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सुख-समृद्धि, रिद्धि-सिद्धि, वैभव, आनन्द, ज्ञान एवं शुभता के अधिष्ठाता देव भगवान गणेश का जन्मोत्सव भाद्रपक्ष शुक्ल चतुर्थी यानी गणेश चतुर्थी इस साल 2020 में 22 अगस्त शनिवार को मनाई जा रही है. हर साल की तरह इस साल भी बप्पा के जन्मोत्सव को देश भर में पूरे जोरशोर से मनाने की तैयारी चल रही है. दस दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में भगवान विनायक की प्रतिमाएं घर घर में स्थापित की जाती हैं और पूरे विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना की जाती है. लेकिन गणेश प्रतिमा की स्थापना से पहले किन किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए और मूर्ति लेने से पहले मूर्ति का स्वरूप कैसा हो और किस रंग की मूर्ति से क्या लाभ होगा? ये जानना बहुत आवश्यक है. 

प्रतिमा लेने से पहले किन बातों का रखें विशेष ध्यान

भगवान गणेश मनुष्य के दुखों के तारणहार हैं, किसी भी मंगल कार्य को बिना बाधा के पूर्ण करने के लिए और मनोवांछित इच्छा प्राप्त करने के लिए सिद्धि विनायक सबसे उपयुक्त देव माने गए है. गणेश चतुर्थी में ‘बप्पा’ की कृपा पाने के लिए हमें कई बातों को ध्यान में रखकर सावधानी बरतनी चाहिए. सबसे पहले गणपति की मूर्ति का चयन कैसा होना चाहिए ये जानना आवश्यक है. उचित मूर्ति को ही देख परख कर ही घर लाएं और स्थापित करें तभी भगवान गणेश का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त हो पाएगी. 

1. अगर अपार धन और वैभव की इच्छा है तो इसकी पूर्ति के लिए आप विराजे हुए यानि की बैठे हुए गजानन की मूर्ति लें, इन्हें स्थापित करने से किसी भी तरह का आर्थिक संकट नहीं रहता और घर में पर्याप्त धन रहता है और वैभव की कमी भी नहीं रहती है.

2. गणेश प्रतिमा खरीदने से पहले ध्यान रखना चाहिए कि उसमें बप्पा की सूंड बाई ओर मुड़ी हो. मान्यता है कि दायीं ओर सूंड वाले गणपति देर से प्रसन्न होते हैं, जबकि बाईं ओर सूंड वाले गणपति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं.

3. मूर्ति खरीदने से पहले इस बात का भी विशेष ध्यान होना चाहिए कि प्रतिमा चारभुजाधारी हो. पहला हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में हो, दूसरे हाथ में मोदक हो, गजानन के तीसरे हाथ में अंकुश और चौथे हाथ में पाश हो. मान्यता है कि गजानन की चारों भुजाएं मनुष्य को जीवन जीने का संदेश देती हैं. हाथ में अंकुश दर्शाता है कि मनुष्य को कामनाओं पर संयम जरूरी है. हाथ में पाश नियंत्रण, सयंम और दण्ड का सूचक है. भुजा में मोदक जीवन का आनंद लेने और संतोष रखने का मार्ग सिखाता है. आशीर्वाद मुद्रा वाली भुजा से गणपति अपने उन भक्तों को आशीर्वाद देते हैं जो अपने कर्म के फलरूपी मोदक को बप्पा के हाथों में रख देते हैं और बप्पा उन्हें आशीर्वाद देते हैं.

4. मूर्ति खरीदने से पहले इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि गणपति की मूर्ति के साथ उनकी सवारी मूषक भी हो. माना जाता है कि ऐसी प्रतिमा शुभ होती है. ऐसी प्रतिमा की पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख सम्पत्ति आती है.

प्रतिमा स्थापित करने से पहले इन बातों की रखे विशेष ध्यान

भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से पूर्व मूर्ति की दिशा और दशा की ध्यान रखना आवश्यक है. घर-व्यापार और जीवन में सुख समृद्धि और शांति के लिए मूर्ति की स्थापना उचित दिशा और उचित ढंग से करना आवश्यक है. आइए जानते हैं कि किस प्रकार और कैसे स्थापति करें गजानन की प्रतिमा.  

1. मूर्ति का मुख दरवाजे की ओर नहीं होना चाहिए क्योंकि भगवान श्रीगणेश के मुख के सम्मुख समृद्धि, सिद्धि, सुख और सौभाग्य होते हैं. ऐसा नहीं करने से रिद्धि-सिद्धि, सुख-समृद्धि और शुभ और लाभ घर पर वास नहीं करते हैं.

2. घर में सिद्धि विनायक की मूर्ति स्थापित करते समय विशेष ध्यान रखें कि गणपति की पीठ घर के किसी कमरे की ओर न हो, या सीढ़ियों के नीचे उनकी स्थापना न की गई हो, ऐसा होने से घर में दुर्भाग्य आता है.

3. गणपति की स्थापना से पूर्व ध्यान रखें कि घर पर भगवान श्रीगणेश की बैठी हुई प्रतिमा की ही स्थापना हो, इससे घर पर सुख-समद्धि, रिद्धि-सिद्धि, धन-धान्य का वास रहता है. कार्यस्थल पर अन्य मुद्राओं वाले रूप की मूर्ति रखी जा सकती है.

4. मूर्ति स्थापित करते समय ध्यान रखें कि भगवान श्रीगणेश के दोनों पैर जमीन को स्पर्श कर रहे हों.

गणपति की किस रंग की प्रतिमा क्या फल देती है?

वैसे तो सिद्धिविनायक की सबसे ज्यादा पीले और रक्त वर्ण की मूर्ति की उपासना को सबसे शुभ माना जाता है लेकिन गणपति के अलग अलग रंग की प्रतिमाओं की पूजा अर्चना करने का भी अपना महत्व और लाभ है. 

1. पीले रंग की प्रतिमा की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

2. चार भुजाधारी रक्तवर्ण वाली गजानन की उपासना से मनुष्य के सभी संकट दूर होते हैं. रक्त-वर्ण के गणपति को ‘संकष्टहरण गणपति’ कहते हैं.

3. श्वेत रंग के गणपति की उपासना से ऋणों से मुक्ति मिलती है और जीवन से दारिद्रता दूर होती है. सफेद रंग के गणपति को ‘ऋणमोचन गणपति’ कहते हैं

4. नीलवर्ण के गणेश जी को “उच्छिष्ट गणपति” कहते हैं, इनकी उपासना विशेष दशाओं में ही की जाती है.

5. विशेष मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए गणपति की हल्दी से बनी हुई या हल्दी का लेपन की हुई मूर्ति की उपासना की जाती है. इस प्रतिमा को “हरिद्रा गणपति” कहा जाता है.

6. गणपति के एकदंत स्वरूप श्यामवर्ण के होते हैं. गणपति के इस रूप की उपासना से पराक्रम और साहस की वृद्धि होती है.

   इनके अतिरिक्त  गणपति के अलग अलग स्वरूपों  की स्थापना की जाती  है, जैसे त्रिनेत्रधारी, रक्तवर्ण और दस भुजाधारी ‘महागणपति’, जिनके अन्दर समस्त गणपति समाहित होते हैं. लेकिन मान्यता के अनुसार घर पर पीले रंग या लाल रंग की प्रतिमा की ही स्थापना करना चाहिए. इससे सुख-समृद्धि, धन-वैभव का घर पर वास होता है.

कैसे करें मूर्ति की स्थापना, कैसे करें गणपति की उपासना?

1. भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना जिस स्थान पर की जाए उस स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लेनी चाहिए. साथ ही उसे गंगाजल से पवित्र करने के बाद ही प्रतिमा की स्थापना करनी चाहिए.

2. गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना का सर्वोत्तम समय दोपहर का माना गया है. लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर गजानन की मूर्ति की स्थापना करें. मूर्ति स्थापित करने के साथ गणपति के सम्मुख एक कलश भी स्थापित करें.

3. गणपति की विधि विधान से पूजा अर्चना करें, साथ ही जल, अक्षत, दूर्वा घास, पान, धूप आदि अर्पित करें. लड्डुओं का भोग लगाए. ये लड्डु उतनी मात्रा में हों जितनी उपासक की आयु हो.

4. इसके साथ ही गणपति की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं, साथ ही ध्यान रखें कि जितने दिन भी गणपति की उपासना चले, ये घी का दीपक अखंड रूप से जलता रहे.

5. इसके बाद गणेश जी के मंत्र ‘ऊं गं गणपतये नम:’ का जप श्रद्धानुसार करें. पूजा के पश्चात भगवान गणेश की आरती करें और उनके प्रसाद का वितरण करें, साथ ही अन्न और वस्त्र का दान करें.

6. गणेश चतुर्थी के दिन व्रत में सिर्फ फलाहार या जल ग्रहण करें.

7. गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा को नीची दृष्टि करके अर्घ्य दें. इससे यश, मान-सम्मान और कीर्ति में वृद्धि होगी. अगर चंद्रमा की ओर देखते हुए अर्घ्य दिए जाएगा तो अपयश मिलेगा. अगर न चाहते हुए भी चन्द्र दर्शन हो ही गया है तो उसके दोष का उपचार कर लें.

विघ्नहर्ता मंगलमूर्ति की स्थापना से पूर्व इन वस्तुओं का करें निषेध 

1. भगवान गणेश सात्विक देवता और विघ्नहर्ता हैं इसीलिए आवश्यक है कि उनकी प्रतिमा स्थापित करने से पहले घर से हर उस वस्तु को बाहर कर देना चाहिए जो कि अपवित्र मानी जाती है या दुर्गंध फैलाती है, उदाहरण के तौर पर मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन जैसी वस्तुएं. मान्यता है कि इन वस्तुओं के घर पर होने से व्यक्ति के मान-सम्मान, धन-वैभव में कमी आ जाती है और वो श्रीहीन हो जाता है. अत: दस दिन के इस महापर्व में इन वस्तुओं का पूर्णतया प्रतिबंधित हो.

2. गणेश चतुर्थी के दिन या पूजा के समय पीले या सफेद वस्त्र धारण ही करें, काले वस्त्र को गणपति पूजन के लिए वर्जित माना गया है.

3. घर में स्थापति गणेश जी की प्रतिमा मध्यम आकार की होनी चाहिए, बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए.

4. गणेश चतुर्थी में रखा गया उपवास का समापन चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही करें, अर्घ्य देते समय दृष्टि चंद्रमा पर न हो.

5. गणेश चतुर्थी पर पूजा के दौरान गणेश जी पर तुलसी अर्पित करना वर्जित माना जाता है. माना जाता है कि तुलसी को गणेश जी ने शाप दिया था, इसलिए गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग अशुभ होता  है.

6. गणेश जी की प्रतिमा के पीठ के दर्शन कभी न करें, माना जाता है कि स्थापित गजानन की प्रतिमा के दर्शन करना शुभ नहीं होता है. ऐसा करने से घर परिवार में अमंगल होता है.

गणेश जी को देवों में सर्वप्रथम माना गया है, उनका व्यक्तित्व भी बहुआयामी है. पूरी श्रद्धा और भक्ति से सिद्धि विनायक विघ्नहर्ता की पूजा उपासना की जाए तो जीवन में किसी प्रकार का आभाव नहीं होता. व्यक्ति की जीवन में ज्ञान से लेकर सुख-संम्पत्ति, धन-वैभव, साहस-पराक्रम की भरपूर वृद्धि होती है

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