Nehru जी को चाचा नेहरू क्यों कहते थे, मामा नेहरू क्यों नहीं?

बाल दिवस नहीं चाल दिवस था अब तक 14 नवंबर जो नेहरू के नाम पर कांग्रेसी वोटनीति का हिस्सा था..जिन वीर बालकों पर भारत को गुमान है उनके नाम पर नहीं मनाया कांग्रेस सरकार ने 26 दिसंबर को बाल दिवस..

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आज 14 नवंबर है.  बचपन से अभी तक भी इस तारीख से भारत के सर्वप्रथम भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की याद ज़ेहन में ताज़ा हो जाती थी. स्कूल के दिनों में जो इतिहास  पढ़ा था वास्तविकता उसके बिल्कुल  विपरीत है ये अब जा कर जाना.  ऐसा भी नही है कि इतिहास के पन्नों में दर्ज सभी आदर्शों का चरित्र संदेहास्पद था. कुछ  ऐसे महापुरुष  और महिलाएँ भी हुई जिन्होंने अपने चरित्र  की तेजस्विता से भारतवर्ष का नाम रोशन कर दिया.
सुभाषचन्द्र बोस, लालबहादुर शास्त्री, अम्बेडकर, सरदार पटेल,रानी लक्ष्मीबाई ,जीजाबाई जैसे आदर्शों के योगदान  के समक्ष सर नतमस्तक  हुआ जाता है. जहां तक प्रश्न है जवाहर लाल नेहरू का तो हो सकता है कि वे बच्चों में  लोकप्रिय रहे हों किन्तु ये बताना किसी के लिये भी मुश्किल होगा कि वे बच्चों में लोकप्रिय क्यों थे. दूसरे शब्दों में कहें तो ये भी चुनाव जीतने के एक कांग्रेसी स्टंट से अधिक कुछ नहीं. बच्चों को पटाने की कोशिश से उनके मां बाप तो पट ही जायेंगे और चार वोट कांग्रेस को मिल जायेंगे -इस समझदारी का व्यवहारिक रूप था बाल दिवस.
फिलहाल नेहरू जी की चारित्रिक विशेषताओं का गुणगान न करते हुए बस यही कहना उचित होगा कि अब के भारत यानि नरेन्द्र मोदी के भारत का जन-मानस बहुत समझदार हो गया है.  उन्हें ये पता है कि नेहरू ने कोई ऐसे महान कार्य नही किए कि उनको याद रखा जाए बल्कि उनके ग़लत निर्णयों ने देश की जडों  को अवश्य खोखला कर दिया जो  वर्षो तक गाँधीवाद के कंधों की सवारी करके पीढ़ी दर पीढ़ी देश को बंदर बनाते रहे.
कांग्रेसी सरकार ने देश में और देश के बाहर भी  क्या गुल खिलाये ये बताने की आवश्यकता नही है क्यों अब धीरे धीरे सारी कलई खुलती जा रही है. यदि मोदी सरकार आज से सात साल पहले देश को सम्हालने की जिम्मेदारी लेने नहीं आती तो हो सकता है आज अपने ही देश में हम पराए हो गये होते जिसकी कोशिश सत्तर साल से चल रही थी. अपने प्राचीन सनातन धर्म की और अपने हिंदुत्व को बचाने की जागृति अब घर कर गई है हर सनातनी भारतीय के भीतर. तब की और अबकी  वर्तमान  सरकार  के  शासन काल में क्या अंतर है यह सर्वविदित हो गया है.

सवाल ये है कि मामा नेहरू क्यों नहीं?

नेहरू का जन्म 14 नवंबर को हुआ था. ऐसा  कहते हैं कि वे बच्चों के प्रिय नेता हुआ करते  थे और बच्चे उन्हें  “चाचा नेहरू” कहकर संबोधित करते थे. सवाल ये है कि बच्चे उन्हें मामा नेहरू क्यों नहीं कहते थे? खैर जो भी हो, 14 नवंबर को उनकी याद में “बालदिवस”  के रूप में मनाना शुरू कर दिया गया था जो अब समाप्त हो गया लगता है. परन्तु पहले  बाल दिवस 20 नवंबर  को, मनाया जाता था जो मैं समझती हूँ कि अब भी ये दिन 14 नवंबर  को नही 20 नवंबर  को मनाया  जाना  चाहिए.
नेहरू  के ग़लत फैसलों और उनकी भोग-विलासिता की आदतों  का भुगतान हम भारतवासी इतने वर्षों से करते आ रहे  नरेन्द्र मोदी के नए भारत ने हमें अपना खोया हुआ मान-सम्मान ही पुन: नही लौटाया वरन हमें यह भी बताया कि भारत स्वावलंबी देश  रहा है जिसने सदैव देश के बाहर भी लोगों की सहायता की है. दूसरे शब्दों में नेहरू ने ऐसा कोई महान कार्य नही किया कि उनका स्मरण किया जाए.

क्यों है महत्वपूर्ण  ये तारीख

बहुत सी ऐसी और महत्वपूर्ण बातें हैं जिसके लिए 14 नवंबर को एक यादगार तारीख के रूप में स्मरण किया जा सकता है.
*ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल को एक अलग रियासत बनाने की घोषणा साल 1681,14 नवंबर को की.
*14 नवंबर वर्ष 1955 को कर्मचारी राज्य बीमा निगम का उद्घाटन हुआ.
* अपोलो-12 को प्रक्षेपित किया गया, जो तीन अंतरिक्षयात्रियों को लेकर आकाश की अनंत गहराइयों को पार करते हुए चंद्रमा पर पहुंचा.
*महारानी एलिजाबेथ की पुत्री राजकुमारी ऐन ने सन्  1973,14 नवंबर को फ़ौज के लेफ्टिनेंट मार्क फ़िलिप्स से शादी की थी. शाही परिवार के किसी सदस्य का किसी सामान्य शहरी से विवाह भी दिन को यादगार बनाता है.
*आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर गिलक्रिस्ट का जन्मदिन 14 नवंबर को ही होता है जिन्होंने बहुत सारे वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाए हैं.
*भारत तथा पाकिस्तान के विदेश सचिवों ने नयी दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के सचिवों के मध्य एक विशेष  बैठक हुई (2006)जिसमें आतंकवाद निरोधक तंत्र पर सम्मिलित कार्य करने पर सहमति दोनों ओर से जताई गई.
*चांद की सतह पर उतरा Moon Impact Prob(2008)
*हमारी  गौमाता “गंगा” ने अपनी बछिया “जमुना” को भी  14 नवंबर 2001में जन्म दिया  था.  मेरे लिए यह दिन नेहरू के  जन्म दिवस से कहीं अधिक मायने  रखता है.

14 नवंबर को है तुलसी विवाह 

इन सबके इतर आज और एक महत्वपूर्ण दिन है “तुलसी विवाह” जो हमारे सनातन धर्म से जुड़ा है तो इससे अधिक विशेष और कुछ नही हो सकता.
तुलसी विवाह देवोत्थानी एकादशी के दिन किया जाता है. कहते हैं कि इसी दिन भगवान शालिग्राम का  तुलसी से विवाह का प्रावधान है.  इस वर्ष देवउठनी ग्याहरस(एकादशी) 14 और 15 नवंबर को है. हिंदू धर्म में यह सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है.
इसके पीछे  की पौराणिक कथा अनुसार भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के आठवें अवतार हैं जिनका विवाह शालिग्राम के रूप में तुलसी से हुआ था.

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