Nirmala Sitaraman के नाम एक खुला पत्र : IBA की दमनकारी की नीतियों पर लगायें लगाम!

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आदरणीय निर्मला सीतारमण जी, वित्तमंत्री, भारत सरकार / PMO, New Delhi
रिटायर्ड बैंक कर्मचारियों के प्रति IBA की दमनकारी की नीतियों पर लगाम लगाएं!
बैंकिंग क्षेत्र के कोई भी मसले हों, IBA पर किसी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता –ये संस्था खुद को सदस्य बैंकों का स्वैच्छिक संगठन कहता मगर बैंकों के हर काम में ये अपना हुकुम चलाता है.
IBA का कभी कोई ऑडिट CAG ने नहीं किया और अगर किया जाये तो इसके बहुत घपले सामने आ सकते हैं –अभी बैंक के रिटायर्ड कर्मचारियों की 25 साल से पेंशन पुनर्निर्धारण में अड़ंगा लगाए बैठा है -जबकि आपने इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए हुए हैं –
आपने फॅमिली पेंशन बढ़ाने के भी निर्देश दिए बढ़ा दी गई मगर IBA रिज़र्व बैंक से अनुमति मांग रहा कि वो खर्चा बैंक के प्रॉफिट में से लिया जाये जबकि लेना पेंशन फंड से चाहिए.
बैंक के रिटायर्ड कर्मचारियों पर उनकी मेडिकल इन्शुरन्स के लिए जबरदस्त मार दी है IBA ने.
अभी तक एक अधिकारी को 4 लाख की पालिसी के साथ 5 लाख की टॉप अप पालिसी दी जा रही थी.
5 लाख की टॉप अप पालिसी के लिए अलग से प्रीमियम नहीं लिया जाता था और वो 4 लाख की पालिसी में ही कवर था –ये टॉप अप शायद वर्ष 2018 – 2019 से शुरू हुआ था.
लेकिन इस बार वर्ष 2021 -22 के लिए 4 लाख की पालिसी का प्रीमियम अधिकारी वर्ग के लिए 38818/- रुपये से बढ़ा कर 43249/- कर दिया और साथ ही 5 लाख की टॉप अप पालिसी के लिए अलग से 11601/- रूपए प्रीमियम मांग लिया.
ये पालिसी Without Domiciliary Treatment के लिए है और इतना मांग कर IBA ने इस बार प्रयोग किया है –अगर लोग इस पालिसी में बने रहते हैं तो अगले वर्ष और ज्यादा प्रीमियम बढ़ा दिया जायेगा.
यानि एक रिटायर्ड अधिकारी को अब 54850/- रुपये देने होंगे जो कि पिछले साल के प्रीमियम से 62.20 % ज्यादा होगा.
समय समय पर IBA बीमा कंपनी बदलता रहा है और इस बार की कंपनी है नेशनल इन्श्योरेन्स कंपनी.
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए ऐसी इन्श्योरेन्स IBA ने वर्ष 2015 – 16 से शुरू की थी –तब से पिछले साल तक का मेरा प्रीमियम इस प्रकार था.
2015-16 — 7493
2016-17–20010
2017-18 -20249
2018-19 -33841
2019-20 -39327
2020-21 -38818
आप अंदाजा लगा सकती हैं कि एक रिटायर्ड व्यक्ति के लिए इस तरह वित्तीय बोझ सहना कितना कठिन है –ऐसा सुना है कि IBA ने प्रीमियम बढ़ाने के पीछे ज्यादा लोगों के क्लेम आना बताया है.
इसका मतलब साफ़ है कि पिछले वर्षों में क्लेम कम आ रहे थे -तो क्या रिटायर्ड लोगों में भी IBA आय का माध्यम तलाश करता है .
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री जी आयुष्मान भारत योजना में गरीबों को मुफ्त 5 लाख तक के इलाज़ की सुविधा दे रहे हैं, वहीँ IBA जैसा संगठन पेंशन पर निर्भर रिटायर्ड कर्मचारियों को लूट रहा है.
ये मेरे अकेले की आवाज नहीं है – हज़ारों लाखों रिटायर्ड कर्मचारी बैंकों में अपना जीवन खपा कर आज इलाज के लिए भी मोहताज हो जायेंगे तो ये अच्छी बात नहीं है.
बैंक के रिटायर्ड कर्मचारियों पर हथौड़ा चलाने की बजाय अगर बैंक नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लुटेरों पर लगाम लगाए होते तो बेहतर होता.
आपसे अनुरोध है, मेरे इस आवेदन पर तुरंत कार्रवाई करें और IBA को निर्देश दें कि किसी हालत में हम रिटायर्ड लोगों से अतिरिक्त प्रीमियम न लिया जाये.

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