परख की कलम से: केजरीवाल क्यों नहीं सीखते कुछ नवीन पटनायक से?

देश में केजरीवाल से अलग एक ऐसे मुख्यमंत्री भी हैं जो दिल्ली और महाराष्ट्र को फ्री ऑक्सीजन बाँट रहे है पर अहंकार और दिखावा उनमें जरा भी नही है -वे हैं उड़ीसा के मुख्यमन्त्री नवीन पटनायक..

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केजरीवाल का मोहल्ला क्लिनिक फेल हो गया, फिर भी इनकी राजनीति है कि समाप्त नही हो रही।
दूसरी ओर इस देश मे एक ऐसे मुख्यमंत्री भी है जो दिल्ली और महाराष्ट्र को फ्री ऑक्सिजन बाँट रहे है लेकिन अहंकार और दिखावे का एक अंश मात्र उनके व्यक्तित्व पर नही है। ये है उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक।
दारा सिंह के मुद्दे पर मैं आज भी नवीन पटनायक का आलोचक हु मगर यह कहूंगा कि एक मुख्यमंत्री के रूप में वे उतने ही महान है जितने नरेंद्र मोदी गुजरात मे थे।
वह व्यक्ति जो उड़ीसा का मुख्यमंत्री है मगर उड़िया नही बोल सकता फिर भी 20 सालो से भुवनेश्वर के सिंहासन पर बैठा है।
नवीन पटनायक का मुखौटा सेक्युलर है और चेहरा हिंदूवादी, इन्हें आप कभी किसी पर कीचड़ उछालते या नफरत की राजनीति करते नही देखेंगे इनके इंटरव्यू भी कम है और भाषण ये 10 मिनट से ज्यादा नही देते और जितना बोलते है पढ़कर बोलते है क्योकि उड़िया आती ही नही।
नवीन पटनायक उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के पुत्र है, बीजू पटनायक द्वितीय विश्वयुद्ध के हीरो थे, कश्मीर बचाने में उनका अतुल्य योगदान था, वीरता में उनका कोई जवाब नही बाद में वे जनता दल से मुख्यमंत्री बने।
इस बीच नवीन पटनायक की जिंदगी देहरादून और दिल्ली के आलीशान बंगलो में गुजर रही थी इसीलिए वे हिन्दी हिंदीभाषियों से भी अच्छी बोलते है लेकिन उड़िया में हाथ तंग है, पिता की मृत्यु के बाद परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति में आने के लिए मजबूर किया।
सब यही मानकर बैठे थे कि नवीन जो एकदम शांत रहते है ऊंची आवाज में बात नही करते वे स्वयं अपने अंत तक पहुँच जाएंगे। लेकिन इसका उल्टा हुआ, उड़ीसा के लोगो ने उनका जमकर स्वागत किया। वे मान रहे थे कि दिल्ली से लौटा व्यक्ति उनका भला करेगा और वही हुआ भी।
उड़ीसा का आज गरीबी में कोई तोड़ नही क्योकि प्राकृतिक आपदाओं के कारण वहाँ व्यापार नही चल पाते बावजूद इसके उड़ीसा में भिखारियों की संख्या बहुत कम है।
उड़ीसा की सड़कें अन्य राज्यो की तुलना में काफी साफ है, जनता दल का जब बंटवारा हुआ तो नवीन पटनायक ने अलग पार्टी बीजू जनता दल बनाई और सारे विरोधियो को कुचल दिया। उन्होंने बीजेपी से हाथ मिलाया और फिर बीजेपी पर साम्प्रदायिकता का आरोप लगाकर गठबंधन तोड़ भी लिया। हालांकि नवीन पटनायक पीछे से हमेशा बीजेपी के हिंदूवादी निर्णयों का समर्थन करते रहे।
नरेंद्र मोदी जैसे नेता तो ना भूतो ना भविष्यति वाले होते है उनसे किसी की तुलना सही नही लेकिन उनके युग मे नवीन पटनायक जैसे महान नेताओ का होना एक संयोग की बात है।
राजनीति के मंच पर उनकी अधिक चर्चा नही होती क्योकि वे गंदी राजनीति नही खेलते, जब अकाली दल और शिवसेना ने एनडीए को छोड़ दिया था उस समय भी बीजेपी प्रेशर में नही थी क्योकि उन्हें पता था कि बुरे समय मे नवीन पटनायक संभाल लेंगे और वही हुआ CAA के समय बीजेपी को पटनायक ने राज्यसभा में समर्थन दे दिया।
बहरहाल नवीन पटनायक में भी प्रधानमंत्री बनने की खूबी तो है मगर यह उनके भाग्य में नही है, इतना अवश्य है कि जब भी अच्छी छवि वाले नेताओं की सूची बनेगी नवीन पटनायक का नाम बड़े आदर से लिया जाएगा।
(विशेषार्थ – पाठकों से निवेदन है कि ट्विटर के माध्यम से नवीन पटनायक पर दारा सिंह की रिहाई के लिये दबाव बनाते रहें।)
(परख सक्सेना)

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