परख की कलम से: ये हो सकता है अगले 150 वर्षों का भविष्य !!

नये भारत के निर्माण हेतु देश की सरकार को कठोर होना होगा और विपक्षी सहमति के बिना भी देश हित में आवश्यक कदम उठाने होंगे.. ऐसे ही बदलेगा इतिहास

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अमेरिका ने अपनी बर्बादी खुद अपने हाथों से तय की है, 15 वर्ष बाद आपको अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में कोई विशेष अंतर नजर नही आएगा।
महाभारत के बाद भारतीयों ने विज्ञान से अपना नाता तोड़ दिया और कर्मकांडो में उलझ गए नतीजा सुपरपॉवर का दर्जा खो दिया। ब्रिटिश साम्राज्य ने अपनी आर्थिक नीतियों को नजरदांज कर दिया वे भी सुपरपॉवर की रेस से बाहर हो गए।
अब अमेरिका की बारी आयी, अमेरिका 1945 में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरा था। 1991 में वह सुपरपॉवर भी बन गया, लेकिन इतने बड़े दौर में अमेरिका सिर्फ यह नही समझ पाया कि अब एक देश कभी दूसरे देश का अधिग्रहण नही कर सकता।
अमेरिका ने आज तक जितने भी युद्ध लड़े है सबमे मार ही खायी है। अमेरिका हमले करता है नागरिको को मारता है और अंत मे उस क्षेत्र में वॉर ज़ोन बना रहता है अमेरिका कभी अपना प्रभुत्व स्थापित नही कर पाता।
कोरिया युद्ध से शुरू हुआ यह नाटक ईरान तक चलता रहा मगर आज भी अमेरिका असफल ही है। जैसे ब्रिटेन समय के साथ नही चला वैसे ही अमेरिका भी नही चल रहा, अमेरिका आज भी किसी देश को झुकाने के लिये प्रतिबंधों का प्रयोग कर रहा है।
अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाए नतीजा यह हुआ कि रूस आज चीन का छोटा भाई बन गया। जो सीमा विवाद ये दोनों सालो से नही सुलझा सके वो उन्होंने अमेरिका के कारण सुलझा लिया। इसी तरह अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए तो ईरान भी चीन की गोद मे बैठ गया। ऐसे में नुकसान भारत जैसे परनिर्भर देशो का होता है।
हालांकि आज भी अमेरिका चीन से कोसो आगे है लेकिन अमेरिका इसी तरह यदि गलती दोहराता रहा और तृतीय विश्वयुद्ध नही हुआ तो अमेरिका का पतन निश्चित है। अमेरिका अमीर देश तो रहेगा मगर अपना रुतबा खो चुका होगा जैसे ब्रिटेन का सूर्य डूब गया।
चीन का सुपरपॉवर बनना भी घातक है, कम से कम भारत, जापान और वियतनाम के लिये तो है। हालांकि भारत तैयार है किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिये, पिछले वर्ष चीन के साथ जो भी विवाद हुआ उसमे अंततः भारत की ही विजय हुई। मुझे नही लगता भारत के अलावा अमेरिका को छोड़कर कोई और शक्ति थी जो चीन को उस समय रोक पाती।
अब एक बात भारतीयों को गाँठ बांध लेनी चाहिए वो यह कि रूस हमारा दोस्त नही है। चीन के साथ जब भी विवाद होता है रूस उसी का पक्ष लेता है, जबकि रूस को भारत ने विवाद से पहले करोड़ो की भीख दी थी। रूस की वीटो पॉवर भी अधिक काम की नही है, भारत को चाहिए कि वह ब्रिटेन और फ्रांस से बनाये रखे।
यदि भारत और चीन में युद्ध होना निश्चित है तो मैं प्रार्थना करूँगा कि तब तक राहुल गांधी और सोनिया गांधी की राजनीतिक आयु पूरी हो चुकी हो, क्योकि कांग्रेस सिर्फ एक विरोधी पार्टी है विपक्षी नही। कांग्रेस बहुत बार पाकिस्तान और चीन से मदद की गुहार लगा चुकी है इससे कांग्रेस की मानसिकता समझ आती है।
भारत भी सुपरपॉवर बन सकता है क्योकि हमारा देश नही बल्कि समाज पिछड़ा हुआ है। भारत का शरीर धर्मनिरपेक्ष और आत्मा हिंदुत्व से ओतप्रोत है, हिन्दुओं को चाहिए कि वे जातियों के बंधन से ऊपर उठ जाएँ, हिन्दी से लेकर तमिल तक घरेलू भाषाओ में ही शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करे और शिक्षा व्यवस्था मजबूत करें।
भारत सुपरपॉवर बनता है या ऐसा ही रहता है यह हिन्दुओ के हाथ मे है हालांकि व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि हिन्दू चाहे सेक्युलर हो या कट्टर वे कभी राष्ट्र प्रगति पर विचार नही करेंगे। सेक्युलरों को दिखावेपन से समय नही और कट्टरों को विधवा आलाप करने से।
नये भारत के निर्माण हेतु देश की वर्तमान सरकार को कठोर होना होगा और संसद न चलने देने की मन्शा वाले विपक्ष की सहमति के बिना भी देश हित में आवश्यक कदम उठाने होंगे। इस तरह ही बदलेगा इतिहास।
यह मेरा व्यक्तिगत विचार है कि भारत मे 1860 के अमेरिका की तरह गृहयुद्ध निश्चित है, भारत का भविष्य खून से सना हुआ है। देश का अनहित करने वालों को सबक सिखाने के लिये एक तरफ सेना होगी तो दूसरी और लिबरल और मोमबत्ती गैंग होगी। भगवान न करे ऐसा हो क्योंकि आज देश को सर्वोत्तम सरकार मिली है जिसके लिये राष्ट्रहित सर्वोपरि है। यदि ये सरकार बदली तो देश का माहौल बिगड़ना निश्चित है।
उस बुरे दौर में भारत मे कई मौलिक अधिकारों का अंत हो सकता है। कई स्तंभ गिराए जा सकते हैं और कई बनाये जा सकते हैं। संभव है तब भारत अपनी भूमि का एक बड़ा टुकड़ा चीन को हार चुका हो लेकिन वापस प्राप्त अवश्य करेगा ईरान से म्यांमार एक बार फिर यह भूमि खून में लहूलुहान होकर एक अवश्य होगी। यही अगले 150 वर्ष का भविष्य होगा।
(परख सक्सेना)

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