कलियुग के ‘कल्पवृक्ष’ पीपल से जो चाहेंगे वो मिलेगा, बस ये करें उपाय

पीपल पर जल सूर्योदय के बाद ही चढ़ाना चाहिए लेकिन रविवार के दिन जल नहीं चढ़ाना चाहिए.

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हिंदु धर्म में वृक्षों का बहुत महत्व है, जीवनकाल के कई संस्कार, कई धार्मिक कार्य बिना वृक्षों या उनके पत्ते पत्तियों के सम्पन्न नहीं माने जाते. इन वृक्षों को पूजा जाना या इनके पत्ते पत्तियों को पूजन सामग्री में शामिल करना बहुत फलदायी और शुभकारी माना जाता है. ऐसे पवित्र पौधों और पेड़ पत्तियों में तुलसी,आम, पीपल, वट वृक्ष और बेलपत्र सबसे चमत्कारी और भगवान को भी प्रिय माने जाते हैं. हम यहां पीपल के वृक्ष की महिमा और चमत्कार पर प्रकाश डाल रहे हैं.

मान्यता है कि पीपल के वृक्ष पर त्रिदेव के साथ साथ तैतीस कोटि देवताओं का भी वास होता है. समस्त नवग्रह भी पीपल पर आसीन रहते हैं. पीपल के वृक्ष को भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय वृक्ष माना गया है. स्वयं भगवान कृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता में कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं. जिसके मूल में ब्रह्मा जी, मध्य में नारायण और पत्तों में शिव शंकर जी साक्षात वास करते हैं. हिंदु धर्म में मान्यता है कि पीपल की पूजा से या उनके पत्तों का पूजा में उपयोग करने से मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है. पीपल की पूजा करने से जहां त्रिदेव प्रसन्न होते हैं तो वहीं समस्त ग्रह भी पीपल के साधक के जीवन को शुभ और सरल देते हैं.

पीपल पर जल चढ़ाने से जीवन में होगा चमत्कार, ब्रहस्पति देंगे आपार धन

पवित्र वृक्ष पीपल की कई तरह से पूजा की जाती है लेकिन पीपल पर जल चढ़ाने मात्र से जीवन में चमत्कारी और अद्भुत परिवर्तन आ जाता है. इसकी परिक्रमा, पूजा और जल अर्पित करने से सभी ग्रहों की शांति होती है और उन ग्रहों के द्वारा जीवन में मिल रहे दुष्प्रभावों की पीड़ा भी कम होती जाती है. पीपल को बृहस्पति का वृक्ष भी माना जाता है, कहा जाता है कि पीपल पर जल चढ़ाने से बृहस्तपति प्रसन्न होते हैं. ब्रहस्पति को सभी ग्रहों में सबसे लाभ देने वाला ग्रह माना जाता है. मान्यता है कि पीपल पर जल चढ़ाने से जीवन सामान्य से समृद्ध हो जाता है और व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार का आभाव नहीं रहता. कुंडली में ब्रहस्पति अगर अष्टम घर में प्रवेश करता है तो जातक को शाम के समय पीपल के वृक्ष की जड़ में दूध और जल का मिश्रण चढ़ाने से चमत्कारी लाभ की प्राप्ति होती है. अगर ब्रहस्पति को प्रसन्न करना है तो पीपल की आराधना ही एकमात्र उपाय है.

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