पूछता है देश: IMA जैसी संस्थाओं का क्या किया जाये?

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हिन्दू डॉक्टरों को IMA छोड़ना चाहिये, यह हमला स्वामी रामदेव पर नहीं, सनातन धर्म पर किया गया हमला है, IMA के ईसाई धर्म परिवर्तन पर,चुप्पी साधे हुए मीडिया चैनलों का बहिष्कार किया जाना चाहिये.
पिछले दिनों आपको याद होगा  सोनिया गाँधी के एक परम आज्ञाकारी मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक वीडियो में कहा था – “मोदी को शक्ति मिलने का मतलब है,  देश में सनातन धर्म और RSS का राज स्थापित करना”
एक तरफ डॉ जयालाल ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बावजूद फर्जी दावा किया कि कोरोना “जीसस” की वजह  से कम हो रहा है और अस्पतालों को  लोगों को ईसाई बनाने का हथियार बनाना चाहिए.
दूसरी तरफ “क्रिश्चयेनिटी टुडे” नाम के एक अख़बार को इंटरव्यू में हाल ही में डॉ जयालाल ने कहा कि “आयुर्वेद का विरोध इसलिए है क्यूंकि यदि इसका प्रचार होगा तो लोग हिंदुत्व के प्रति आकृष्ट होंगे”
इतना ही नहीं डॉ जयालाल ने नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि क्यूंकि उनकी सरकार का विश्वास Cultural and traditional belief in the Hindutava में है, इसलिये वो आयुर्वेद में विश्वास करते हैं.’’
डॉक्टर जयालाल आगे कहते हैं कि ‘’अब 2030 के बाद मेडिकल साइंस को  आयुर्वेद के साथ यूनानी, सिद्धा, योग,होमियोपैथी और नैचुरोपथी भी पढ़नी पड़ेगी”
इससे ज्यादा और क्या स्पष्ट होगा कि IMA का हमला केवल योगऋषि स्वामी रामदेव के खिलाफ नहीं है बल्कि पूरे हिंदुत्व पर है और मोदी पर भी है क्यूंकि मोदी ही हिंदुत्व की उम्मीद है,  इसलिए इस हमले को रोकने के लिए हमें मोदी के साथ-साथ स्वामी रामदेव के साथ भी खड़े रहना होगा !!
समझ में आग गया है कि आज की तारीख में IMA की नीयत क्या है, किस तरह के लोग इसमें प्रभावी भूमिकाओं में हैं और उनका एजेन्डा क्या है. लेकिन एक अच्छी बात ये भी हुई है कि स्वामी रामदेव पर हुए हमले से देश को पता चल गया है कि दरअसल ये बाबा के बहाने हिन्दू धर्म को निशाना बनाया जा रहा है.
लगता है कि आईएमए नाम की ये अंग्रेजों द्वारा बनाई गई संस्था एक नोट छापने की मशीन बन गई है और इसमें होने वाली कमाई कितनी कानूनी और कितनी गैर-कानूनी है –इसकी जाँच होनी चाहिये और ये भी जाँच होनी चाहिये कि कहीं ये कमाई हिन्दुओं को ईसाई बनाने में तो खर्च नहीं की जा रही है?
इसलिए सभी हिन्दू डॉक्टरों से अनुरोध है कि वो हिंदुत्व की रक्षा के लिए इस IMA से तुरंत अलग हो जाएं – आज एक डॉक्टर दंपत्ति ने ट्विटर पर IMA  छोड़ने की घोषणा करके इसकी शुरुआत भी कर दी है.
वर्ष 2019 में भारत के करीब सवा तीन लाख डॉक्टर ही IMA के मेंबर थे जबकि पंजीकृत डॉक्टरों की संख्या 12 लाख से ज्यादा बताई जाती है -मतलब हर डॉक्टर IMA से जुड़ा हो – ये जरूरी नहीं है.
IMA के धर्म परिवर्तन अभियान पर सभी चैनल चुप हैं, यहां तक सबसे बड़े तथाकथित राष्ट्रवादी चैनल ने भी एक कार्यक्रम में ये तो चर्चा की कि “भगवा से चिढ़ क्यों है” मगर IMA के प्रचार के खिलाफ मुंह बन्द रखा.
एक बार फिर इन चैनल्स का बहिष्कार कीजिये, पिछली बार केजरीवाल के विज्ञापनों के खिलाफ इनका बहिष्कार किया था, तब 3 दिन के बाद उसके विज्ञापन इन चैनलों ने हटा दिए थे -कुछ चैनलों ने शुरू में और बाद में बाकियों ने.
अब फिर बहिष्कार करना जरूरी है –कल से रोज एक दिन छोड़ कर हमें इन चैनलों को सबक सिखाने के लिये बहिष्कार शुरू कर देना चाहिये. जय भारत ! जय आयुर्वेद ! जय सनातन संस्कृति !!
(सुभाष चन्द्र)          

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