पूछता है देश: प्रियंका कांग्रेस के ‘डर’ वाले तकियाकलाम की हकीकत क्या है?

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सोनिया गाँधी की लाडो को पता भी है “डर” क्या होता है -जो राम मंदिर न बनने का मजाक उड़ाते थे, वो आज कालनेमि बन कर जय श्री राम बोल रहे हैं -ये “डर” होता है.
छोटा सा विषय था पेट्रोल डीजल पर उत्पाद शुल्क घटा कर दाम कम करने का –जिस पर सोनिया की लाडो ने ताना मारा कि “डर” कर काम किया मोदी ने –
ठीक बात है मोदी और भाजपा ही तो डरपोक हैं और शेर दिल तो कांग्रेस और विपक्ष के नेता हैं.
कांग्रेस तो देश को लूट कर खा गई और अन्य विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस की तरह हिन्दुओं का दमन किया, इसलिए वो तो बहुत बहादुर हैं.
जो दल एड़ी चोटी का जोर लगाते रहे राम मंदिर बनने से रोकने के लिए, आज उनके नेता “डर” के मारे मंदिर मंदिर भटक रहे हैं हिन्दू वोट के लिए.
ये सोनिया की लाडो कभी गंगा स्नान करती है तो कभी बाबा विश्वनाथ के दर पर “दादी जैसी नाक’ रगड़ती है लेकिन बाहर आ कर रैली में नमाज पढ़ती है –और किसी मंदिर में “राधे माँ” बन कर बैठ जाती है (ऐसा लोग महसूस करते हैं)
किसी को बस इसलिए मुस्लिम कह रहे हो कि उसकी माँ एक मुस्लिम थी जबकि वो उसकी औलाद नहीं है मगर एक इनके घर में है जिसकी माँ ईसाई है और बाप मुसलमान है, मगर वो “दत्तात्रेय ब्राह्मण” है.
क्या डर कि मंदिर में जाता है भाई तो तिलकधारी हो जाता है, मस्जिद में जायेगा तो सफ़ेद जालीदार टोपी पहनेगा और
चर्च में क्रॉस लटका लेगा.
कितने दिलेर थे ये लोग जो श्रीराम का अस्तित्व ही नहीं माना और आज कांग्रेसी और सभी विपक्षी नेता केजरीवाल, अखिलेश यादव, मायावती “कालनेमि” बन कर जय श्री राम बोल रहे हैं.
दिल्ली के सबसे बड़े नेता की नानी कहती थी कि मस्जिद तुड़वा कर मंदिर में मेरा राम खुश नहीं रह सकता – आज क्या नानी मर गई जो ये असली कालनेमि रामलला के दर्शन को चला गया.
कल भाजपा का राम मंदिर के लिए मजाक उड़ाने वाले आज डर के मारे कह रहे हैं कि राम तो सबके हैं मगर किसी माई के लाल ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बन रहे मंदिर को तोड़ मस्जिद बनाने की धमकी पर कुछ नहीं बोला.
केंद्र और भाजपा शासित राज्यों ने तो पेट्रोल और डीजल के दाम कम कर दिए मगर “दिलेर और बहादुर” विपक्षी दलों के राज्यों ने एक पैसा नहीं घटाया.
अभी आगे आने वाले चुनावों में जब “डर” लगेगा, तब ये भी कम करेंगे पेट्रोल के दाम.
अब समय आ गया है केंद्र को राज्यों को मिलने वाले 42% टैक्स पर पुनर्विचार करना चाहिए जो उन्हें वैट अलावा मिलता है -फिर भी अगर राज्य केंद्र के आगे हाथ फैलाये रहेंगे तो उन्हें इतना टैक्स कर शेयर क्यों मिले.

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