पूछता है देश : क्या हिन्दू इस देश में सुरक्षित हैं?

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भागवत जी को कुछ सुझाव – आज भारत में हिन्दू को छोड़ सभी सुरक्षित हैं!
“टिप्पणी करते हुए कृपया भागवत जी पर कोई अमर्यादित भाषा का प्रयोग न करें — ये मेरी विनती है “
काफी समय से संघ प्रमुख मोहन भागवत जी कुछ बातें बार-बार कह रहे हैं, जिन पर अब पुनर्विचार होना  चाहिए –भागवत जी बहुत ज्ञानी हैं और इसलिए उन्हें कुछ कहना हो सकता है उचित न हो.
भागवत जी जो सोचते हैं और कहते हैं, वो समाज और देश के हित में ही कहते हैं परन्तु फिर भी सुझाव तो दिए ही जा सकते हैं.
भागवत जी 2 बातों पर जोर दे रहे हैं –एक तो ये कि मुसलमानों के भी पूर्वज हिन्दू ही थे दूसरी ये कि भारत में मुस्लिम सुरक्षित हैं.
सच में देखा जाये तो आज मुस्लिम ही नहीं, सभी धर्मों के लोग सुरक्षित हैं लेकिन यदि कोई सुरक्षित नहीं है तो वो केवल हिन्दू है.
पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने 6 से आतंकियों को गिरफ्तार किया था जिनका उद्देश्य हिन्दुओं के आने वाले त्योहारों पर आतंक मचाना था और उन्हें समर्थन पाकिस्तान में बैठे दाऊद और ISI का है.
एक बात गंभीरता से सोचने की है कि क्या कभी ईद पर या X-Mas या किसी भी अल्पसंख्यकों के त्योहारों पर ऐसे आतंकी हमलों की साजिश होती है?
मेरे विचार में, इन दोनों बातों पर अब ज्यादा समय व्यर्थ करने की जरूरत नहीं है -मुसलमानों को पता है कि उनमे अधिकांश के पूर्वज हिन्दू थे मगर इससे उन्हें आज के हालातों में कोई मतलब नहीं है, और उनसे ऐसा कहने का कोई फायदा भी नहीं है.
उन्हें ये बार बार बताने से कोई लाभ नहीं होगा –आप हजार, दो हजार, लाख दो लाख को समझा सकते हो परन्तु करोड़ों मुसलमान भागवत जी की बात नहीं सुनते.
मुसलमान सुनते हैं ओवैसी जैसे मक्कारों की जो भागवत जी की हर बात पर उन्हें मुसलमानों का दुश्मन कहने में देर नहीं लगाता.
ओवैसी ही नहीं, अनेक मुस्लिम संगठन आज हिन्दुओं के खिलाफ विषवमन करने में आगे रहते हैं -वो जानते हैं मोदी की योजनाओं से मुसलमान लाभ ले रहे हैं पर फिर भी मोदी को मुसलमानों का हत्यारा कहते हैं –
मुझे नहीं लगता ऐसी सोच जब कांग्रेस ने मुसलमानों में भारत के लिए भर दी तो कभी “अखंड भारत” का सपना पूरा हो सकता है.
मुसलमान ही नहीं, आज ईसाई भी देश के टुकड़े करने के लिए आवाज़ लगा रहे हैं –पंजाब  में सत्ता परिवर्तन भी पंजाब के हिन्दुओं के विरुद्ध एक बड़े षड़यंत्र का हिस्सा है.
अभी और भी है लिखने को, फिर लिखूंगा -संघ की स्थापना के 95 वर्ष में संघ के द्वारा लगातार हिन्दू समाज के लिए सब कुछ करने पर भी हिन्दू समाज संगठित नहीं है, पहले उसे ही संगठित करने के लिए नई तरह से सोचना होगा, नये तरीके निकाल कर हिन्दुस्तान के हिन्दुओं को एकत्रित करना होगा और जगाना भी होगा ताकि हिन्दू और हिन्दुस्तान का भावी भविष्य धुंधला न दिखे.

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