पूछता है देश : क्या पैंडोरा पेपर्स सोच समझ कर लीक किये गये हैं?

लगता तो यही है कि यह बहुत सोची समझी एक बड़ी साजिश का हिस्सा है अगर आपको ऐसा नहीं लगता तो पढ़िये इस आलेख को आगे..

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शायद सबको ये पता नहीं कि पैंडोरा पेपर्स ने नाम लीक कर दिए हैं. तो क्या अब ऐसा भारत में भी हो सकता है – हो या न हो, ये तो तय है कि हमारे यहां के पत्रकार लीक नहीं करेंगे?
पनामा पेपर्स की तर्ज पर एक रिपोर्ट “पैंडोरा पेपर्स” ने तैयार की है जिसमे दुनियाभर की मशहूर हस्तियों की विदेशों में संपत्ति का खुलासा किया गया है.
“इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट” ने ये रिपोर्ट तैयार की है जो 117 देशों के 150 मीडिया संस्थानों के 600 पत्रकारों की मदद से तैयार की गई है, ऐसा बताया गया है.
इस रिपोर्ट में भारत समेत 200 से ज्यादा देशों के सैंकड़ों नेताओं, अरबपतियों, मशहूर हस्तियों, धार्मिक नेताओं और नशीले पदार्थों कारोबार में शामिल लोगों के गोपनीय निवेश को उजागर किया है.
35 राष्ट्राध्यक्षों की सूचना दी गई है इस रिपोर्ट में जिसमे इमरान खान के कुछ मंत्री भी शामिल हैं 700 लोगों के साथ.
भारत के 6 राजनेताओं समेत 300 से अधिक लोगों के नाम शामिल हैं मगर कुछ ही नाम सामने आ रहे हैं – जिनमे कहे गए.
अनिल अंबानी, विनोद अडानी, जैकी श्रॉफ, किरण मजूमदार शा के पति, नीरा राडिया, सचिन तेंदुलकर, हरीश साल्वे और सतीश शर्मा -विनोद अडानी गौतम अडानी से सम्बंधित नहीं है मगर उसका नाम प्रमुखता से उजागर किया गया है.
यानि 300 नामों में केवल ये नाम बताये जा रहे हैं, राजनेता का भी नाम वो बताया गया है जिसकी मौत हो चुकी है –क्या ये नाम भी लीक सोच समझ कर किये जा रहे हैं.
पाकिस्तान का विपक्ष तो इमरान का स्तीफा मांग रहा है क्यूंकि उसके मंत्रियों के नाम शामिल हैं और उनका आरोप है कि इमरान का नाम भी जरूर होगा.
भारत में अगर सरकार के मंत्री शामिल होते तो अब तक तो पूरा विपक्ष कोहराम मचा देता –और प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में जांच के लिए PIL दायर कर दी होती.
पैंडोरा की रिपोर्ट पत्रकारों की और मीडिया हाउसेस की है, इसलिए मैं नहीं समझता इनकी रिपोर्ट निष्पक्ष होगी क्यूंकि भारत के अनेक पत्रकार इनकी लिस्ट में शामिल होने चाहिए लेकिन नहीं होंगे.
जिन राजनेताओं के नाम शामिल होने चाहियें,उनके नाम भी नहीं मिलेंगे इनकी लिस्ट में –और जिन 300 लोगों के नाम होंगे भी इनकी लिस्ट में,उनके नाम सार्वजानिक होना नामुमकिन है.
इनके अलावा धार्मिक नेताओं और संगठनों के नाम भी कुछ संप्रदाय विशेष के लिए मिलेंगे लेकिन कुछ के नहीं होंगे जिनके होने चाहिए.

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