पूछता है देश: क्यों न माना जाये सौ करोड़ी वैक्सीन को देश की बड़ी उपलब्धि?

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सभी बाधाएं दूर कर, देश ने उपलब्धि प्राप्त की -100 करोड़ वैक्सीन लगा कर देश में कोरोना की तीसरी लहर रोकने का महा-प्रयास किया है मोदी सरकार ने.
भारत ने 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन लगा कर एक कीर्तिमान स्थापित किया हैं और इसे हासिल करने और कोरोना से लड़ाई में देश भर के डॉक्टर्स, नर्सेज, पैरा मेडिकल स्टाफ पुलिस बल और अन्य सम्बंधित लोगों ने जो योगदान दिया है, वो सराहनीय है.
जिन डॉक्टर्स और अन्य लोगों ने देश की सेवा करते हुए प्राण गवां दिए, उन सभी को श्रद्धांजलि एवं नमन ! कोरोना से  लड़ते हुए जो लोग जीवन हार गए, उन्हें भी नमन!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छशक्ति ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है जो ये उपलब्धि प्राप्त हुई –विपक्ष ने तो हर वो कोशिश की जिससे सरकार को बदनाम किया जा सके और उसका काम अवरुद्ध किया जा सके.
नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की हर तरह से निंदा की गई विपक्ष के सभी दलों द्वारा जबकि कोरोना से युद्ध सबका सामूहिक होना चाहिए था.
और तो और IMA के ईसाई अध्यक्ष ने इस संकट काल को धर्मपरिवर्तन का मौका बना लिया और उसका कुकृत्य सामने आने पर भी IMA ने उसे अभी तक अध्यक्ष पद पर सजा रखा है.
कुछ राज्यों ने संकट के समय में दूसरे राज्यों के मजदूरों को सहारा देने की बजाय अपने राज्यों से धक्के मार दिए जिससे दूसरे राज्यों में कोरोना का प्रकोप बढे मगर ईश्वर तो न्याय कर देता है
ऐसे राज्यों में ही कोरोना बढ़ा जहां से लोगों को प्रताड़ित करके भगाया गया –नाम भी लेने में ऐतराज नहीं होना चाहिए, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दिल्ली प्रमुख थे.
वैक्सीन बनने के बाद विपक्ष ने और मीडिया ने पूरा जोर लगा दिया कि वो फेल हो जाये और लोग मरते रहें. 2 बार लॉक डाउन हुआ, आर्थिक गतिविधि बंद हो गई जिससे GDP का कम होना स्वाभाविक था मगर विपक्ष इसे मोदी की नाकामी कहता रहा.
इतने अवरोधों के बावजूद देश में मात्र 14,623 नए कोरोना केस थे जिनमे से 7,643 अकेले केरल से थे –सक्रिय केस 8 माह बाद सबसे कम 1.78 लाख थे.
100 करोड़ वैक्सीन में, 70.95 करोड़ पहली डोज़ लगी; 29.36 करोड़ दोनों डोज़ लगी.
ईश्वर नरेंद्र मोदी पर कृपा करें और उन्हें इस महामारी को जड़ से समाप्त करने की शक्ति दे.

 

 

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