Budget 2021: आज है भारत का बजट, होंगी कोरोना काल में जनता की उम्मीदें पूरी

आज पेश होने वाले आम बजट मोदी सरकार का प्रयास यही हो सकता है कि कोरोना वायरस के कारण बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई अहम ऐलान इस बजट में किए जायें..

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नये साल का पहला तोहफा देगी मोदी सरकार देश को इस बजट में. नये साल के देश के बजट का इन्तजार पिछले साल को ज्यादा था जो चीनी वायरस कोरोना की महामारी से बुरी तरह शिकार हुआ था. लेकिन जिस तरह देश की सरकार ने कोरोना वायरस को भारत को तबाह करने की इजाजत नहीं दी उसी तरह वह इस बजट में इस महामारी से पीड़ित आम आदमी को निराश होने की अनुमति नहीं देगी.

कोरोना होगा बजट के केन्द्र में

संसद का बजट सत्र आज एक फरवरी 2021 को देश के आम बजट का साक्षी होने वाला है. दिन के 11 बजे मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करने जा रही हैं और उनसे देश की जनता को अपेक्षा है कि सरकार की ओर से बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणायें की जायेंगी.

13 फरवरी को संपन्न हो सकता है पहला चरण

माना जा रहा है कि संसद के बजट सत्र का पहला चरण 15 फरवरी के स्थान पर 13 फरवरी को ही संपन्न हो जायेगा. इस बजट से आशा की जा रही है कि वह महामारी से पीड़ित आम नागरिक को राहत देने वाला होगा. इसके अतिरिक्त रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च के माध्यम से आर्थिक सुधार को बेहतर करने की दिशा में बढ़ने का प्रयास किया जा सकता है.

ये है मोदी सरकार का 9वां बजट

यदि एक अंतरिम बजट भी जोड़ लिया जाये तो यह मोदी सरकार का यह नौवां बजट होगा. कोविड-19 के संकट से घिरे और बाद में उससे मुक्ति की दिशा में बढ़ रहे देश को देश की प्रतीक्षा थी. बजट में बड़े स्तर पर नौकरियों के अवसरों का निर्माण तथा ग्राम विकास पर व्यय में वृद्धि करने, विकास योजनाओं के लिए उदार आवंटन करने, करदाताओं के हाथों में अधिक धनराशि देने और विदेशी कर को देश में आमंत्रित करने के लिए नियमों को सरल किये जाने की अपेक्षा की जा रही है.

विशेषज्ञों को भी है बहुत उम्मीद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जनवरी के प्रारंभ में वक्तव्य दिया था कि अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष का बजट इस ढंग का होगा, जैसा अब तक पहले कभी नहीं देखा गया होगा. वहीं देश के अर्थशास्त्री मानते हैं कि 2021 के बजट में कोरोना महामारी से छिन्न-भिन्न हो गई देश की अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने की शुरुआत की जायेगी. अर्थ-विशेषज्ञों का कहना है कि इस बजट को केवल बही-खाते या लेखा-जोखा अथवा पुरानी योजनाओं को नये रूपरंग में प्रस्तुत करने की पुरानी परंपरा से अलग और बेहतर होना चाहिए.

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