यूपी में ‘रावण’ से मुलाकात के पीछे क्या है प्रियंका की ‘ताजनीति’?

पश्चिमी यूपी में चंद्रशेखर 'रावण' उभरते हुए दलित युवा नेता हैं और यूपी में बीएसपी का 'हाथ' झटकने से कांग्रेस को अब दलित वोटों के लिए एक बड़े चेहरे की जरूरत है

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यूपी की सियासत में बुधवार सबसे बड़ी खबर मेरठ के आर्मी अस्पताल से निकली. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर से मुलाकात की. चंद्रशेखर तबीयत खराब होने की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं. उन्हें जिला प्रशासन की अनुमति लिए बिना जुलूस निकालने,  आचार संहिता और धारा 144 के  उल्लंघन के तहत गिरफ्तार किया गया था. लेकिन तबीयत खराब होने पर मेरठ के आर्मी हॉस्पिटल शिफ्ट कर दिया गया.  अब यही हॉस्पिटल सियासत का सबसे बड़ा एपीसेंटर तब बन गया जब प्रियंका गांधी का काफिला यहां आया.

प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चंद्रशेखर ‘रावण’ से बंद कमरे में बातचीत की. प्रियंका से मुलाकात पर चंद्रशेखर ने इसे शिष्टाचार और मानवीय मुलाकात बताया. वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि केंद्र की अहंकारी सरकार  युवाओं की आवाज कुचलने का काम कर रही है.

अब इस मुलाकात के कई सियासी मायने सवालों  की शक्ल में सामने आ रहे हैं. बड़ा सवाल ये है कि क्या चंद्रशेखर ‘रावण’ भी हार्दिक पटेल की तरह कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं? क्या 15 मार्च के बाद चंद्रशेखर चुनाव लड़ने और कांग्रेस से गठबंधन का ऐलान कर सकते हैं.

दरअसल चंद्रशेखर ने कहा है कि 15 मार्च को वो दिल्ली में बहुजन हुंकार रैली आयोजित कर बड़ा ऐलान करेंगे. चंद्रशेखर ने मीडिया से बातचीत में ये भी कहा है कि वो पीएम मोदी के खिलाफ भीम आर्मी की तरफ से उम्मीदवार खड़ा करेंगे या फिर खुद भी वाराणसी से मैदान में उतर सकते हैं. चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वो मोदी जी को हराकर वापस गुजरात भेजेंगे.

ऐसे में साफ है कि चंद्रशेखर ‘रावण’ मोदी विरोध की बहती गंगा में हाथ धोते हुए अपनी राजनीति की शुरुआत करना चाहते हैं. यही कोशिश गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने भी की है. मोदी विरोध और बीजेपी विरोध की राजनीति कर हार्दिक पटेल आखिर में कांग्रेस में शामिल हो गए और उनके आने से कांग्रेस को उम्मीद है कि गुजरात में बीजेपी के पटेल वोटबैंक में बड़ी सेंध लगाई जा सकती है. इसी तरह यूपी में दलित वोटों के लिए कांग्रेस के पास चंद्रशेखर के रूप में एक युवा चेहरा है. प्रियंका गांधी वैसे भी यूपी में तमाम छोटे-छोटे राजनीतिक दलों या फिर चेहरों के साथ कांग्रेस के गठबंधन की रणनीति पर काम कर रही हैं. ऐसे में कांग्रेस को चंद्रशेखर में बीएसपी का विकल्प दिखाई दे रहा है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि मोदी विरोध में कांग्रेस की राजनीति कहीं एसपी-बीएसपी गठबंधन के लिए ‘वोट-कटवा’ का काम न कर जाए?

पश्चिमी यूपी में दलित इलाकों में चंद्रशेखर बड़ी तेजी से युवा नेता के रूप में उभरे हैं. उनकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते ही बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी उन्हें बीएसपी में शामिल करने से इनकार कर दिया. ऐसे में चंद्रशेखर रावण को कांग्रेस यूपी की ताजनीति के लिए सबसे मुफीद सियासत का इक्का मान रही है.

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