इतिहास का सबसे रहस्यमय शख्स: ग्रेगरी रास्पुतिन

(राहुुल देव सिंह)

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वैसे तो रास्पुतिन को दुनिया एक रहस्यमय साधू के नाम से भी जानती है..

ग्रेगरी रास्पुतिन1869 में एक किसान परिवार में पैदा हुआ था. जो बाद मे बाबा (साधू) बन गया. साधू बनने से पहले वो शादी शुदा था और उसके ३ बच्चे थे. कोई ख़ास चीज नहीं थी उसके पास न ही कोई ख़ास इज्जत.

वो १० साल तक शादी शुदा रहा उसके बाद एक दिन किसी अनजान कारण (कुछ लोग कहते है उसने एक घोडा चुराया था, उसकी सजा से बचने के लिए) से एक मठ में चला गया. ये साल था १८९७. वहां उसने पढना और लिखना सिखा और धर्म की बाते भी. कुछ महीने रहने के बाद उसने मठ पर आरोप लगाये की वहां कुछ साधू समलैंगिगता में लिप्त है और वहां का जीवल जरुरत से ज्यादा कठोर है. और वो अपने घर लौट गया. पर जो इंसान घर आया वो बहुत ही बदल चूका था. वो एक शाकाहारी आदमी था जो की शराब को हाथ भी नहीं लगता था. ये बात भारतीयों की लिए भले ही छोटी हो पर साइबेरिया में ये बहुत ही बड़ी बात है.

रास्पुतिन ने परिवार नहीं छोड़ा था. और किसी तरह से उसकी बातें सच होने लगी. उसका बातो का अंदाज कुछ ऐसा था कि लोग सहम जाते थे उसके सामने. बीमार और डरे हुए लोगों को ऐसे लोगों पर बहुत असामान्य भरोसा हो जाता है. वो धार्मिक तौर पर टूटे हुए और चिंता (anxiety) के शिकार लोगो का इलाज करने लगा. इलाज के वक़्त वो महिला भक्तो के साथ सेक्स भी करने लगा. धीरे धीरे उसकी ख्यति राज परिवार तक पहुची.

राजकुमार एलेक्सी को हीमोफिलिया था. सिंहासन का उत्तराधिकारी था. उस वक्त इस बीमारी का इलाज नहीं हो पाता था. राजकुमार को एक जरा सा कट लग जाने पर जान जाने का खतरा बना रहता था. रास्पुतिन ने १९०६ में रानी अलेक्जेंड्रा को भरोसा दिलाया कि राजकुमार को कुछ नहीं होगा. शायद किसी ने पहली बार रानी को इस कदर भरोसा दिलाया था.

शाही दरबार रास्पुतिन का मुरीद होने लगा. क्योंकि रास्पुतिन ने वाकई में राजकुमार का इलाज कर दिया. आज तक नहीं पता चला कि कैसे किया था उसने. जो भी हुआ अलेक्जेंड्रा रास्पुतिन पर निर्भर होती चली गई. और रास्पुतिन औरतों पर. सात बच्चों का बाप शाही दरबार की औरतों में रहने लगा. सेक्स और सनक में डूबे उसके किस्से फैलने लगे.

1914 में जब प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ा तब अलेक्जेंड्रा पर लोगों की निगाह गई. क्योंकि वो खुद जर्मन थी. और रास्पुतिन के साथ उसका पागलों वाला रिश्ता था जो किसी को समझ नहीं आता था. रूस में दोनों के सेक्सुअल रिश्ते की बातें चलती थीं.

पर ये सब गड़बड़ाने लगा जब रूस लड़ाई हारने लगा. कहा जा रहा था कि रास्पुतिन के कहे अनुसार ही लड़ाई हो रही थी. रूस को लोग सनकने लगे कि देश जंग हार रहा है और शाही घराना एक जोगी के कहने पर चल रहा है. ये भी खबर उड़ने लगी कि रास्पुतिन और रानी जर्मनी के एजेंट हैं.

राजकुमार फेलिक्स युसुपोव ने एक पार्टी में रास्पुतिन को बुलाया. और वहीं पर रास्पुतिन को केक में सायनाइड मिलाकर दे दिया गया. पर कत्ल करने वाले हैरान रह गये. क्योंकि जहर का उस पर कोई असर नहीं हुआ था. युसुपोव ने गुस्से में पिस्तौल निकाल ली. और रास्पुतिन के पेट में गोलियां दाग दीं. वो खून से लथपथ होकर गिर पड़ा. पर पता नहीं कैसे फिर खड़ा हो गया और राजकुमार को पकड़ लिया. युसुपोव ने दो गोलियां और मारीं. उसके बाद उसे बहुत मारा गया. कपड़े मे लपेट के नदी में फेंक दिया गया.

पोस्टमॉर्टम में पता चला कि जहर और गोलियों से नहीं बल्कि पानी में डूबने के चलते मरा था रास्पुतिन. उस पर पहले भी हमले हो चुके थे, पर हर बार वो बच गया था. जहर वगैरह का तो उस पर कोई असर ही नहीं होता था. उसके मरने के एक साल बाद ही रूस में अक्टूबर क्रांति हुई और लेनिन ने कम्युनिज्म ला दिया देश में. जार और पूरे परिवार को उसी महल में काट दिया गया.

रास्पुतिन के बारे में पता चला कई डायरियों से. कई तरह की चीजें निकल के सामने आईं, जो सच भी हो सकती हैं और अफवाह भी-

रास्पुतिन के बारे में दो चीजें लिखी रहती थीं- बहुत ज्यादा चढ़ा ली है, शराब अब इसके लिए कुछ नहीं है. रास्पुतिन सोता नहीं था.

उसका बाथरूम बहुत बड़ा था. जब वह उसमें नहाता था तब उसके साथ कई लड़कियाँ होती थीं. वह उनसे अपने जेनिटल्स पर साबुन लगवाता था. उन लड़कियों को वो लिटिल लेडीज कहता था. फिर वो शैतान को निकालने चर्च चला जाता था.

शाम को 12 बोतल चढ़ा लेने के बाद सिस्टर मारिया के साथ वापस आ जाता. मारिया उसे पता नहीं क्या-क्या समझाती. उसके बाद वो एक राजकुमारी आइरिना के साथ चला जाता. आइरिना को वो बड़ा बेसब्री से इंतजार करता. और इसी चक्कर में मारा गया था. क्योंकि उसे बुलाना आसान हो गया था.

अपने फीमेल फॉलोवर्स से कहता कि मैं आपका कुछ करता नहीं हूं. बस आपको पवित्र करता हूं. पर साफ-सफाई का ज्यादा ध्यान नहीं रखता था. इतना कि छह-छह महीने अंडरवियर नहीं बदलता था. लोग कहते कि वो जानवरों की तरह महकता था.

आइरिना के चक्कर में ही मारा गया रास्पुतिन. सबको पता था कि उसके साथ सेक्स को वो रोक नहीं पाएगा. नहीं तो वो इतनी सिक्योरिटी में रहता था कि उसे मारना संभव नहीं था. सेक्स के लिए ही वो रुका रहा. और जान चली गई.

रास्पुतिन इसलिए भी रहस्यवादी माना जाता है क्योकि वो कैसे लोगो का इलाज करता था, कोई नहीं जानता. लडकिया क्यों उसके बस में रहती थी कोई नहीं जनता, सिवाए इसके की उसे सम्मोहन विद्या आती थी. उसने कैसे रुसी राजघराने को अपने बस में कर लिया था, ये भी एक राज ही है.

(राहुुल देव सिंह)

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