करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तान की सज्जनता नहीं विवशता है!

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कॉरीडोर को लेकर फिलहाल पाकिस्तान मजबूर है लेकिन इस मजबूरी पर कितने दिन भरोसा किया जा सकता है? 

पाकिस्तान ने काफी अरसे के बाद अपना अड़ियल रवैया छोड़ा है. वैसे इस समझदारी की उम्मीद पाकिस्तान से थी नहीं कि वह करतारपुर कॉरिडोर के लिए हामी भरेगा. पर यह समझदारी पाकिस्तान की सज्जनता नहीं, उसकी विवशता है.

दुनिया के राजनीतिक मानचित्र में पकिस्तान की जो छवि है वो पकिस्तान से बेहतर कौन जान सकता है. दुनियावी आतंकवाद की राजधानी नंबर दो बन चुका पकिस्तान सबके निशाने पर है चाहे वो भारत हो या अमेरिका. सिवाए चीन के फिलहाल पकिस्तान को दुनिया में कोई अपना सच्चा हितैषी नज़र नहीं आता. और सच तो ये भी है कि चाँद-सितारे को शातिर ड्रैगन पर भी बहुत यकीन नहीं क्योंकि ड्रैगन अपना स्वार्थ सिद्ध करने के बाद कब उसे ही निशाना बना देगा, ये वो भी नहीं जानता.

नए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की समझदानी इतनी विकसित है कि वह भारत के साथ मैत्री संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं – यह कहना या समझना भारी भूल साबित हो सकता है. ड्रैगन का दोस्त भी सांप है, हमें याद रखना चाहिए. यह सांप उस किसम का ऐतिहासिक सांप है जो ये तो चाहेगा कि भारत उसे आस्तीन में पाल ले पर ये नहीं वादा करेगा कि वह भारत को मौक़ा देख कर डसेगा नहीं.

इमरान खान जितने समझदार हैं उतने ही हालात के मारे हुए भी हैं. जिस हाल में पकिस्तान की बागडोर उन्हें थामने को मिली है वो वही बात है कि लुटे हुए खजाने की चाभी किसी को दे दी जाए. आम भाषा में कहें तो नंगा नहायेगा क्या निचोड़ेगा क्या! आर्थिक मार से कमर टूटे हुए देश के लिए अंदर जितनी समस्याएं हैं बाहर भी उतनी ही हैं, कम नहीं हैं.

ऐसे में हालात को ज़रा हल्का करने की कोशिश मजबूरी ज्यादा है समझदारी कम. यहां करतारपुर कॉरिडोर एक सुनहरा मौक़ा मिला है पकिस्तान को एक तीर से तीन शिकार करने का. एक तो अपने देश के सिक्खों के वोट पक्के हो जायेंगे इमरान की पार्टी को दूसरा भारत से संबंधों की खटास कम हो जायेगी और तीसरा यह कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान सीना ठोंक कर कहेगा कि वह एक सेक्युलर स्टेट है, इस्लामिक स्टेट नहीं!

मगर जो इस हामी के तीर से चौथा शिकार पाकिस्तान करना चाह रहा है, उसे भारत ने तुरंत भांप लिया है. इस कॉरिडोर के माध्यम से पाकिस्तान भारत के लिए एक नई समस्या का पोषण करेगा जिसे खालिस्तान के नाम से जाना जाता है. भिंडरांवाला के वध के पश्चात लगता था कि खालिस्तान खलास हो गया. कनाडा में भी वहाँ की सरकार की मदद से खालिस्तानियों पर लगाम कसी जा चुकी थी पर पुराने खालिस्तान की नई तस्वीर इस्लामाबाद में तैयार होगी, इसका इल्म किसी को नहीं था. अब कॉरिडोर पाकिस्तान का रास्ता बनेगा और पाकिस्तान इस पर चल कर दुहरी मार की योजनाएं बनाएगा – एक कश्मीर में दूसरी पंजाब में !!

वैसे भारत का होमवर्क पूरा है कि जब सिख भेष में इस कॉरिडोर पर चल कर लश्कर और जैश के आतंकी भारत में प्रवेश करेंगे तो उन्हें सीधे ही धर लिया जाएगा. इसलिये ये साफतौर पर बेवकूफी वाला भोलापन है पाकिस्तान का अगर वह इस कॉरिडोर के तीर से इस तरह का पांचवा निशाना लगाना चाहेगा, क्योंकि ये तो सबसे पहली तैयारी होगी भारत की!

यह भी बचकानी सोच ही होगी अगर कोई कहे कि उन्हें खालिस्तान मुद्दे के बारे में कुछ नहीं पता. इस समस्या की जटिलता और गंभीरता का अनुमान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को नहीं हो, ये तो हो ही नहीं सकता. जब गुरुद्वारा दरबार साहिब में खालिस्तानी पोस्टर लहराये जा रहे थे, तो ये आने वाले दिनों की तस्वीर को बयान कर रहे थे.

एक तरफ अमेरिका पाकिस्तान पर नित नए दबाव बढ़ा रहा है दूसरी तरफ भारत पूरी साफगोई से उसे ‘आतंकवाद की पनाहगार पाकिस्तान’ का साइनबोर्ड हटाने को कह रहा है इस संकल्प के साथ कि बिना इसके कश्मीर तो क्या किसी भी मुद्दे पर बात नहीं हो सकती. यह राजनैतिक बेचैनी करतारपुर साहेब कॉरिडोर के लिए हामी भरने की एक वजह बनती है.

अब पाकिस्तानी राजनीतिक सभाओं में चाँद सितारे के साथ खालिस्तान का झंडा भी लहराता हुआ शोर करेगा और पाकिस्तानी नेताओं के भारत पर भड़कने की तकरीरों में खालिस्तानी आतंकियों की भी गर्जना होगी. क्या इमरान खान को ये समझ नहीं आता कि इस तरह उसने अपने आतंकी जनाज़े में एक कील और ठोंक ली है?

पाकिस्तान की यह चतुर समझदारी समझ न आने का कोई कारण नहीं था भारत के पास. ज़ाहिर सी बात है भारत ने यह करतारपुर कॉरिडोर का प्रस्ताव आज से दो दशक पहले दिया था. पर शायद पाकिस्तान को तब उसका वो महत्व समझ नहीं आया था जो आज अचानक आ गया है. पाकिस्तान का एक ख़ास मकसद जो इस हामी की चादर में छुपा हुआ है उस पर इमरान खान मन ही मन मुस्कुरा रहे होंगे ये तो तय है – कहने की ज़रूरत नहीं कि वो ये है कि अब पाकिस्तान को पूरा और पक्का मौक़ा मिलेगा इससे गुरुद्वारा दरबार साहिब का दर्शन करने आने वाले भारतीय सिख श्रद्धालुओं में वह ज़ोरदार कट्टरता भर सकेगा और उन्हें भारत की खिलाफ और भी खूंखार कर सकेगा. कोई इमरान खान को ये भी बताये कि भारत में भिंडरांवाला को किसने पैदा किया था किसने पाला था और फिर भिंडरांवाला-गैंग का निशाना कौन बना था !

कहीं ऐसा तो नहीं कि इमरान भी अपनी शहादत का इन्तजाम कर रहे हैं?

(पारिजात त्रिपाठी)

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