खशोगी का कत्ल हुआ तुर्की में, किया सऊदी ने और कुपित हुआ अमरीका

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कौन हैं जमाल खशोगी? कहां लापता हो गये खशोगी? खशोगी को लेकर ये कौन सा शह-मात का खेल चल रहा है अमेरिका और मिडिल ईस्ट के बीच? क्या सऊदी के क्राउन प्रिन्स का हनीमून खत्म होने वाला है? क्या ट्रंप का कहर टूटेगा सऊदी पर?

पिछले कुछ समय से ये चंद सवाल अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता की परिधि में हैं. वाशिगंटन पोस्ट के पत्रकार हैं जमाल खशोगी जो मूल रूप से तो अमेरिका में रहते हैं किन्तु उनका पैतृक घर सऊदी अरब में है. और अपनी शादी के सिलसिले में तुर्की पहुंचना उनकी जान जाने का सबब बना.

कौन लेना चाहता था जमाल खशोगी की जान? ऐसा क्या किया था खशोगी ने? – इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिये हमें थोड़ा पीछे जाना होगा.

हम दो हफ्ते पीछे चलते हैं तो पता चलता है यही वह वक्त है जब खशोगी लापता हुए थे. जी हां वो दिन जब उनके लापता होने की पहली खबर आई थी – 2 अक्टूबर, 2018. थोड़ा और पीछे जा कर देखें तो उनकी ज़िन्दगी पर भारी पड़ने वाले सवाल साफ साफ सामने आने लगते हैं. क्या थोड़ा और पीछे जाना होगा? चलिये चलते हैं एकदम पीछे और शुरू से शुरू करते हैं जमाल खशोगी की कहानी.

ऐसा नहीं है कि लापता होने से चर्चित हुए जमाल खशोगी. खशोगी का तेज-तर्रार प्रोफेशनलिज़म और अपने प्रोफेशन के प्रति पूरी इमानदारी ने उनको कई बार पहले भी चर्चित होने का अवसर दिया था. 59 वर्ष पहले जन्म हुआ था सऊदी के धार्मिक शहर मदीना में खशोगी का. प्रारंभिक स्कूली पढ़ाई के बाद उच्चअध्ययन हेतु खशोगी अमेरिका आ गये.

अमेरिका की इंडिआना यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1983 में मुखर पत्रकार के तौर पर खशोगी ने अपनी पारी शुरू की. कुछ समय बाद जब अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सेनाओं और मुजाहिदीनों के बीच संघर्ष शुरू हुआ तो खशोगी की रिपोर्टिंग ने दुनिया भर में उनको प्रसिद्ध कर दिया. फिर तो खशोगी अपनी पूरी रवानी पर आ आगये. उस समय के दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकवादी जो अलकायदा का फाउंडर था उस ओसामा बिन लादेन ने खुद खशोगी को अपने साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया. जिस समय सारी दुनिया ओसामा को तलाश रही थी, खशोगी ने ओसामा के इंटरव्यू कर रहे थे. ओसामा के कई इंटर्व्यू खशोगी के नाम हैं. इसके बाद तो खशोगी दुनिया के सबसे बड़े पत्रकारों में शुमार हो गए.

फिर आया वर्ष 2003 जब खाड़ी देशों के सर्वाधिक प्रसिद्ध अखबार अलवतन ने उन्हें सम्पादक की भूमिका में नियुक्त किया. किन्तु खशोगी बांधने वाले लोगों में नहीं थे. अपने खुले चिंतन और सिद्धांतवाद के साथ बहुत जल्दी उन्होंने अलवतन को अलविदा कह दिया. बिना किसी समझौते के वे अरबी धर्मगुरुओं के अनुचित कार्यकलापों की निंदा कर रहे थे जो कि अखबार के प्रबंधन को नहीं सुहाया. लेकिन समझौता करके काम करना खशोगी को नहीं भाया और उन्होंने सिर्फ दो महीने बाद ही त्यागफ्तर दे दिया.

खशोगी ने भी अपने तौर-तरीके नहीं बदले. और उनके राडार पर अचानक सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान आ गए. क्राउन प्रिंस की नीतियों का खुल कर विरोध किया खशोगी ने जिसने उनको सऊदी अरब छोड़ने को मजबूर कर दिया. अरब से निर्वासन के बाद बीते करीब एक साल से अमेरिका में रह रहे थे.इस दौरान वे नियमित रूप से चर्चित अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में कॉलम लिखते रहे थे जिसमें वे सऊदी सरकार की नीतियों की कड़ी निन्दा किया करते थे. ये खशोगी ही थे जिन्होंने पिछले वर्ष बिन सलमान द्वारा राजकुमारों, मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों को जेल में डालने के पीछे की कहानी का खुलासा करके अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में उनका पर्दाफ़ाश कर दिया था.

यह सिद्धांतवादी पत्रकार शुरू से ही सऊदी अरब द्वारा यमन में छेड़े गए युद्ध और कतर पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ था. खशोगी के क्रांतिकारी लेखन को अरब सरकार द्वारा सख्त नापसंद किया जा रहा था. खशोगी ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में डालने और लेबनान के प्रधानमंत्री के अपहरण को लेकर भी बिन सलमान पर सीधे ही उंगली उठा दी थी. सारी दुनिया में उनके वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित लेखों को समर्थन मिलता था. इसे लेकर भी मोहम्मद बिन सलमान और उनका मंत्रालय खशोगी से खफा था.

खशोगी को पता था कि वे मारे जा सकते हैं. लापता होने से तीन दिन पहले खुद खशोगी ने इस तरह की चिन्ताओं के प्रति सहमति व्यक्त करते हुए कहा था कि – ‘मैंने सऊदी अरब में अपने एक दोस्त को जेल में डाले जाने की बात सुनी है. इसके बाद से मेरा मानना है कि मुझे वहां नहीं जाना चाहिए…मेरे उस दोस्त ने तो कुछ किया भी नहीं था जबकि, मैं तो खुलेआम मुखालफत कर रहा हूं.’

तुर्की में रहने वाली खशोगी की मंगेतर थी हैतिस संगीज़ जिससे वे शादी करने वाले थे. इसी सिलसिले में उनको कुछ पेपर्स की जरूरत थी जिनको लेने वे तुर्की के सऊदी दूतावास आए थे. और ये तारीख थी 2 अक्टूबर की. हैतिस ने बताया कि जमाल ने चूकि इसके लिए पहले से आवेदन किया था और जब दूतावास से बुलावा आया तो वे कागजात लेने दूतावास गए थे. इसके बाद हैतिस दूतावास के बाहर कई घंटों तक खड़े रह कर इंतजार करती रहीं लेकिन जमाल बाहर नहीं आए. वो उनको फोन भी नहीं कर सकती थी क्योंकि जमाल अपने दोनों मोबाइल भी उसी के पास छोड़ गये थे

जैसा बताया हैटिस ने उसके अनुसार वे जमाल का कई घंटे तक दूतावास के बाहर इंतजार करती रहीं लेकिन वे बाहर नहीं आए. जमाल के दोनों मोबाइल भी हैतिस के पास ही थे इस वजह से वे उनसे संपर्क भी नहीं कर पा रहीं थीं. कई घंटे इंतजार करने के बाद हैतिस ने तुर्की पुलिस को फोन किया. तुर्की पुलिस ने शाम साढ़े पांच बजे दूतावास के बाहर लगे कैमरे की फुटेज खंगाली तो पता चला कि जमाल खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले हैं.

कई घंटे इंतजार करने के जब हैतिस ने पुलिस को फोन किया तो पुलिस ने दूतावास के बाहर लगे सीसीटीवा फुटेज देखी और स्पष्ट हो गया कि जमाल खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले हैं.

बात दबी नहीं. बात बढ़ी तो अगले दिन सरकार को मानना पड़ा कि खशोगी लापता हैं. लेकिन सऊदी अरब के बयान में ये बात भी जोड़ दी गई थी कि खशोगी दूतावास से बाहर निकल जाने के बाद ही लापता हुए हैं.

सरकार का बयान का जमाल की मंगेतर हैतिस संगीज के गले नहीं उतरा और उससे सहमति जताते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन ने भी इस कथन का विरोध किया. एर्दोआन के प्रवक्ता ने कहा – ‘पत्रकार जमाल खशोगी अभी भी सऊदी दूतावास के अंदर ही हैं. हम दूतावास के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा.’

तुर्की की सरकार ने में सऊदी के राजदूत से इस बारे में स्पष्टीकरण मांग लिया. और दूसरी तरफ वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि – ‘जमाल के गायब होने के बाद हमने इस मामले को लेकर अमेरिका, तुर्की और सऊदी अरब तीनों देशों के अधिकारियों से बात की है लेकिन अभी तक जमाल का कुछ पता नहीं लगा है.’ अगले ही दिन यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के अखबारों में खशोगी के गायब हो जाने के समाचार ने सऊदी सरकार पर भारी दबाव बन गया. विवश हो कर उसने तुर्की के अधिकारियों को अपने दूतावास में तलाशी लेने की सहमति प्रदान कर दी इसी दौरान क्राउन प्रिंस बिन सलमान का बयान आया कि हमारे पास कुछ भी छिपाने को नहीं है.

लेकिन खशोगी की जांच में छह अक्टूबर की तारीख मील का पत्थर बनी. दूतावास में छानबीन कर रहे तुर्की पुलिस दल ने अपनी रिपोर्ट से सनसनी फैला दी. रिपोर्ट के अनुसार – ‘हमारे पुलिस अधिकारियों का शुरूआती जांच के आधार पर यह मानना है कि पत्रकार जमाल खशोगी को दो अक्टूबर को ही सऊदी वाणिज्यक दूतावास में मार दिया गया था.’

एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर अमेरिकी मीडिया को बताया, ‘हम पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं कि जमाल खशोगी की हत्या पूर्वनियोजित थी. दूतावास में मारने के बाद जमाल के शव को कहीं और ठिकाने लगा दिया गया.’ हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस बात को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया जा रहा है.

एक सरकारी अधिकारी ने छुपे तौर पर खुलासा किया कि – ‘हमको परा विश्वास है कि जमाल खशोगी की हत्या पूर्वनियोजित थी. दूतावास में मारने के बाद जमाल के शव को कहीं और ठिकाने लगा दिया गया.’ यद्यपि सऊदी अरब ने ऐसे पूर्वानुमानों का साफ खंडन किया है.

फिर आई अमेरिकी सरकार की पहली प्रतिक्रिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हमने सऊदी के प्रमुख सलमान से इस पर बात की है और उन्होंने आरोपों से इंकार किया है.. हम इस प्रकरण की पूरी तरह से जांच करेंगे. यदि जमाल खशोगी की हत्या में सऊदी अरब का हाथ पाया जाता है तो सऊदी को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे.’’

इसके तुरंत बाद ही क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन से फोन पर बात की. और तब तुर्की के विदेश मंत्रालय ने ये घोषणा की कि सऊदी के वाणिज्यक दूतावास का गहराई से निरीक्षण किया जाएगा और तुर्की और सऊदी अरब दोनों ही देशों के अधिकारी इस जांच में शामिल होंगे.

अगले दिन इसके बारे में तुर्की के राष्ट्रपति का देश की संसद में दिया गया अहम बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि – ‘इस प्रकरण में कई तथ्यों पर हमारा ध्यान गया है सऊदी वाणिज्यक दूतावास की दीवारों और फर्श पर कोई जहरीला पदार्थ भी था जिसके ऊपर पेंट किया गया है. हमारे जांचकर्ता इस जहरीले पदार्थ का पता लगा रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि शीघ्र ही हम मामले की तह तक पहुंचने में सफल होंगे.’

तुर्की के राष्ट्रपति के इस कथन ने जांच दल को सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास के प्रमुख मोहम्मद अल-ओताबी के घर की तलाशी के लिये प्रेरित किया. और फिर कुछ ही घंटों में पता चला कि ओताबी तुर्की छोड़कर भाग निकले हैं.

इसके बाद चला सिलसिला आरोप-प्रत्यारोप का. अमेरिका ने सऊदी अरब पर खशोगी को लापता करने का आरोप लगा दिया. फिर अमेरिका की बढ़ती धमकियों पर तुर्की की मुखबिरी ने आग में घी का काम किया. अमेरिका ने सीधे ही सऊदी अरब को आड़े हाथों ले कर अपना अल्टीमेटम दे दिया.

आखिरकार दो हफ़्तों के लगातार इनकार बाद आख़िरकार सऊदी अरब ने यह मान ही लिया कि पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या हुई है. सऊदी ने कहा कि यह हत्या तुर्की में इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास के भीतर ही हुई है.

इससे पहले तुर्की लगातार यह बात कहता आ रहा था कि ख़ाशोज्जी की हत्या दूतावास में हो गई है, लेकिन सऊदी इस बात से इनकार कर रहा था. सऊदी का कहना था कि ख़ाशोज्जी अपना निजी काम पूरा करने के बाद दूतावास से बाहर चले गए थे.

खशोगी की गुमशुदगी का वक़्त गुजरने के साथ दुनिया के तमाम बड़े देश सऊदी पर जांच के लिए दबाव बनाने लगे थे, हालांकि सऊदी पर सबसे अधिक दबाव तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोवान ने बनाया था.

सऊदी अरब की स्वीकारोक्ति के बाद कि पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल स्थित उसके वाणिज्य दूतावास में ही मारे गए थे, तुर्की पुलिस ने मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है. सऊदी अरब वाणिज्य दूतावास में कार्यरत सऊदी के 15 लोगों से पूछताछ की जा रही है. तुर्की के अधिकारियों का मानना है कि ख़ाशोज्जी के शव को बेलग्रेड जंगल या इसके पास की ज़मीन में दफ़नाया गया होगा. जांच के दौरान सऊदी अरब के सरकारी टीवी चैनल से पता चला है कि दूतावास के भीतर खशोगी की बहस हुई थी और उसके बाद हुए झगड़े में उनकी मौत हो गई.

खशोगी के शव को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. यदि खशोगी दूतावास के भीतर मारे गए तो उनका शव भी दूतावास के भीतर या आसपास ही कहीं होना चाहिए. जानकारी मिली है कि इस्तांबुल स्थित बेलग्रेड के जंगल में खशोगी का शव ढूंढा जा रहा है. जांच में पता चला है कि जिस दिन हत्या हुई उसी दिन दो गाड़ियों को उस तरफ जंगल में जाते देखा गया था.

(पारिजात त्रिपाठी)

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