ट्रम्प की समझदारी ने किया चीन को सशंक

ट्रम्प जितने नासमझ नजर आते हैं, उतने हैं नहीं, चीन समझने लगा है ट्रम्प को...

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डोनाल्ड ट्रम्प की चीन की नीति ना जाने क्या गुल खिलाएगी ? कहीं चीन में बिखराव करना तो लक्ष्य नहीं है..

1971 से 1974 के दौर में हेनरी किसिंजर और राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की जोड़ी के समय में अमेरिका और चीन के बीच नए संबंधों का आगाज हुआ था और ये जोड़ी रूस और चीन के बीच दरार डालने में सफल हो गई थी –चीन ने अपने को 25 साल बाद अन्य पूँजीवादी देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों के लिए खोला था – 21 से 28 फरवरी 1972 तक चीन की यात्रा करने वाले निक्सन किसी भी देश के पहले शाशनाध्यक्ष थे.

उत्तरी कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन से ट्रम्प का उसके ही देश की सीमा में मिल कर प्यार की पींगे बढ़ाना, हो सकता है उत्तर कोरिया को चीन से दूर करने की ही छुपी हुई कूटनीतिक चाल हो –
जैसे रूस और चीन के बीच दरार पैदा कर दी गई थी और जैसे रूस और चीन के प्रभाव वाले करीब करीब सभी वामपंथी देशों को अमेरिका ने नाटो का सदस्य बना कर अपने साथ मिला लिया था- ट्रम्प का लक्ष्य चीन को दुनियां से अलग थलग करने का लगता है.

व्यापार संबंधों को लेकर एक तरफ ट्रम्प चीन को उलझा रहा है चीन उत्पादों पर टेरिफ बढ़ा कर और दूसरी तरफ धीरे धीरे ताइवान को अपने नजदीक ला कर वन चाइना पालिसी को ललकार रहा है -थोड़े दिन पहले अपने समुद्री जहाज ताइवान सीमा में भेज दिए.

कल खबर थी कि ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन इस माह कैरेबियाई देशों के दौरे में 4 रात अमेरिका में रुकेंगी जिससे चीन भड़क गया है और उसने अमेरिका से कहा है कि वेन को रुकने की अनुमति ना दे — ताइवान चीन की सबसे कमजोर कड़ी है और मैं कई बार लिख चूका हूँ कि चीन को सीधा करने के लिए उसकी पूँछ पर पैर रखने के लिए ताइवान को मान्यता दे देनी चाहिए –भारत के ताइवान के साथ सम्बन्ध भी चीन को एक चेतावनी हो सकते हैं.

अब चीन ने खुद अपने लिए एक नया बखेड़ा खड़ा कर लिया है -चीन ने एक कानून बना कर हांगकांग में रहने वाले नागरिकों को किसी भी अपराध के लिए चीन ले जा कर मुकदमा चलाने और चीन के कानून के अनुसार दंड देने के प्रावधान किया है –जिसके खिलाफ हांगकांग में लाखों लोग रोज विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं –कल चीन ने अमेरिका, ब्रिटैन और ईयू पर भड़क कर चेतावनी दे कर हांगकांग में दखल न देने के लिए आगाह किया है .

हांगकांग और ताइवान को हवा देने के साथ चीन में मानवाधिकारों की बात करके चीन को सोवियत संघ की तरह बिखेरने की कोशिश हो रही लगती है जिसकी वजह से चीन चिंतित है –लेकिन ये काम करने के लिए ट्रम्प को रूस को भी साथ लेना होगा .

इसके साथ ही ट्रम्प ने चीन के द्वारा पाले पोसे पाकिस्तान पर नकेल कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी हुई और दूसरी तरफ भारत को नाटो देशों के समकक्ष दर्जा दे कर भी एक तरह चीन को चेतावनी दी है . वो बात अलग है ट्रम्प कभी कभी भारत से भी छेड़खानी कर देते है जैसे अमेरिकी उत्पादों पर ड्यूटी कम करने को ले कर या S-400 को रूस से खरीदने पर प्रतिबन्ध लगाने की धमकी देकर –G/20 में ट्रम्प और मोदी के बीच वार्ता में सुना है व्यापारिक मसलों पर सहमति बन गई .

ट्रम्प ने मोदी को अप्रत्याशित जीत की बधाई दी और इच्छा जाहिर की कि वो भी ऐसी ही जीत चाहते हैं –मिलेगी या नहीं, समय बताएगा . वैसे ट्रम्प का जीतना इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने के लिए बहुत जरूरी है –ट्रम्प ही अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ कर उसे “इस्लामिक आतंकवाद” कहता है .

(सुभाष चन्द्र)

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