तीन तरफ़ा हमला हो सकता है अमरीकी सेना पर

ईराक की धरती पर कितने असुरक्षित हैं अमरीकी सैनिक

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U.S. Army Soldiers revisit Dugmat village, Iraq, March 23, 2007, for the first time since the Nov. 7, 2006, firefight, in which Staff Sgt. Richwell Doria was killed in action. The Soldiers are assigned to the 3rd Platoon, Alpha Company, 2nd Battalion, 27th Infantry Regiment, 25th Infantry Division, Schofield Barracks, Hawaii. (U.S. Air Force photo by Master Sgt. Andy Dunaway) (Released)

ईराक में कैम्प लगाए हुए अमरीकी सैनिक हालांकि आधुनिक हथियारों से लैस हैं लेकिन वे यहां कितने सुरक्षित हैं यह एक बड़ा सवाल है..खासकर तब जब उनको नहीं पता की वे तीन तरफा हमले के निशाने पर हैं.

बगदाद. अमेरिका की संसद में आराम से बैठे हुए नेताओं को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होगा कि उनके पांच हज़ार सैनिक जो ईराक की धरती पर पीसकीपिंग फोर्स की जिम्मेदारी बन कर आईएसआईएस से लड़ रहे हैं- वे तिहरी मार के शिकार हो सकते हैं और तीन तरफ से घिर सकते हैं.

ईराक में अमेरिका से नफरत धीरे-धीरे धधक रही है
अमेरिका कह तो रहा है कि हमने सैनिकों को घातक हथियार दिए हैं. ईराक में अमेरिका के पहले ही पांच हज़ार सैनिक है और वह और भी अधिक सैनिकों को वहां भेजने पर विचार कर रहा है. ये अमेरिका की नाक की लड़ाई नहीं है जो उसने बना रखी है पर उसको इसके खामियाजे का अनुमान नहीं है क्योंकि यहां तैयार हो रहा है अमेरिका से नफरत का बारूद.

एक तरफ दुश्मन है सीरिया का आईएसआईएस
अमेरिका के सैनिक ईराक सरकार के खर्चे पर वहां आईएसआईएस से लड़ रहे हैं. लेकिन अब वे भी जान गए होंगे की आईएसआईएस पहले जैसी पुराने किसम का बेहथियार और जिद्दी आतंकी संगठन नहीं रहा. अब तकनीक भी वहां पहुँच गई है और हथियार भी. हथियार तो पहले भी थे अब इन इस्लामी आतंकियों के पास आधुनिक और घातक किस्म के हथियार पहुँच चुके हैं जो अमेरिका विरोधी ताकतों के आईएसआईएस के साथ होने का सर्टिफिकेट हैं.

दूसरा दुश्मन है खोमेनी वाला ईरान
अमेरिका को ईरान को कम करके आंकना नहीं चाहिए. ये ईरान अयातुल्ला खोमेनी का ईरान है. यह अब पुराना ईरान नहीं है. अब यहां सोच में चालाकी और तकनीक में नवीनता पहुँच गई है. पहले वाले ईराक की तरह ईरान जिद्दी बन कर अमेरिका से आ बैल मुझे मार नहीं करेगा लेकिन ईरान अमेरिकी घुड़कियाँ भी नहीं सहेगा और उसको जवाब बराबर से देगा. वजह ज़ाहिर है, वहअकेला नहीं है उसके साथ चीन और रूस हैं.

तीसरे मोर्चे पर खुद ईराक है
राजधानी बगदाद में इराकियों ने अमरीकी दूतावास को जला डाला , ये कोई छोटी बात नहीं है क्योंकि पहले इस तरह से इस देश में लोग अमरीका पर इतने क्रोधित कभी नहीं देखे गए हैं. लेकिन अब उन्हें अमेरिका का मान न मान मैं तेरा मेहमान वाला रवैया समझ आ रहा है. लोगों में आईएसआईएस और ईरान के लिए सहानुभूति पैदा हो गई है और इस्लामिक सोच वाली एकता है इस अपनेपन की सीधी वजह.

अमेरिका को खोमेनी ने दो टूक चेतावनी दे दी है
ईरान के सर्वोच्च नेता खोमेनी की चेतावनी सामने आ चुकी है जो उन्होंने अमेरिका को दी है. इस चेतावनी में खोमेनी ने ईरान का निर्भीक रुख स्पष्ट करते हुए साफ़ तौर पर कह दिया है कि ईरान धमकियों का सामना करने को तैयार है. अब ज़मीनी या आसमानी दोनों तरह की जंग अमेरिका के लिए बहुत मुफीद नहीं होगी क्योंकि उसके सैनिक उस ईराक की ज़मीन पर है जहां एक मोर्चे पर है एक तरफ से ईरान और दूसरे मोर्चे पर दूसरी तरफ से सीरिया.

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