पनामा का औरंगज़ेब था नोरिएगा

(परख सक्सेना)

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अमेरिका के बारे में एक कहावत है कि ये चैन से बंधा बंदर है, चैन से खेलो जरूर मगर उसे ज्यादा तेज मत खींचो वरना बंदर नोच देगा। 20 दिसम्बर 1990 को यही हुआ, अमेरिका के 27 हजार सैनिक पनामा की राजधानी पनामा सिटी में उतरे एक शख्स की खोज करने जिसका नाम था मैन्युअल नोरिएगा। नोरिएगा एक झुग्गड़ बस्ती में पैदा हुआ और पला बढ़ा, तो फिर अमेरिका जैसे सुपरपॉवर का दुश्मन कैसे बन गया?

पनामा अमेरिका के दक्षिण में स्थित मेक्सिको के पास एक देश है जो उत्तरी और दक्षिणी महाद्वीपो को जोड़ता है। इस के दोनों ओर समुद्र था जिसे बीच मे मिलाने का कॉन्ट्रैक्ट अमेरिकी कंपनी को मिला। 1950 तक अमेरिका का विरोध शुरू हो चुका था क्योकि पनामावासियो को यह केनाल उनकी संप्रभुता के खिलाफ लगी।

इन्ही विद्रोहियों में एक था मैन्युअल नोरिएगा। ये सेना में भर्ती हुआ यहाँ पर ये मिलिट्री कमांडर टोरिहौस की आंखों का तारा बन गया। बाद में 1970 के दशक में टोरिहौस ने तख्तापलट कर दिया और खुद को तानाशाह घोषित कर दिया। अब नोरिएगा की ताकत भी बढ़ी। उसने पनामा में ड्रग्स का आदान प्रदान शुरू कर दिया इसके अलावा वो दुनिया की 15 देशो की खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी करके इन्हें मूर्ख बनाता रहा जिनमे अमेरिका भी एक था।

नोरिएगा पनामा का तानाशाह बनना चाहता था, मगर 1980 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर पनामा आये, उन्होंने संधि कर ली कि 1999 तक कैनाल का नियंत्रण पनामा को दे देंगे इसके अलावा टोरिहौस ने भी अमेरिका को आश्वासन दिया कि 1984 में वो चुनाव कराएंगे और लोकतंत्र की स्थापना करेंगे। ये नोरिएगा के लिए खतरे की घण्टी थी।

अचानक 1981 में ही टोरिहौस की रहस्यमयी मौत हो गयी उनका विमान क्रेश हो गया, अब तो नोरिएगा का रास्ता आसान हो गया। उसने अपना काला धंधा तेजी से बढ़ाया और पनामा का सबसे अमीर आदमी बन गया, सरकारे उसकी गुलाम थी। मगर एक कम्युनिस्ट नेता थे युगों स्पेडाफोरा। इन्होंने इस तानाशाह की पोल खोलना शुरू की। उन्हें कई धमकी मिली और फिर एक दिन उन्हें पनामा के सैनिको ने एक बस से उतारा इसके बाद वे लापता हो गए और उनकी लाश बेहद ही दयनीय अवस्था मे मिली।

जिस तरह औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी और उनके पेशवा के टुकड़े टुकड़े किये थे उससे भी कई गुना बुरे हाल में स्पेडाफोरा की लाश थी। अर्थात नोरिएगा इस्लामिक आतंकवाद से भी भयानक था। एक आर्मी कमांडर ने 1987 में बगावत कर दी और नोरिएगा के सारे राज खोल दिए कि कैसे उसने पहले टौरिहौज और फिर स्पेडाफोरा को रास्ते से हटाया।

अब जनता सड़को पर उतरी तो नोरिएगा ने अपने ही लोगो को गोलियों से भून डाला। इन बंदूकों की आवाज़ अमेरिका तक पहुँची। संधि के अनुसार पनामा में लोकतंत्र स्थापित होना था, अमेरिका ने नोरिएगा पर दबाव बनाया तो उसने अमेरिकी नागरिको को ही बंधक बनाना शुरू कर दिया और एक अमेरिकी की जान ले ली।

उस समय जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश अमेरिका के राष्ट्रपति थे उन्होंने सेना को आदेश दिया नोरिएगा को जिंदा पकड़ने का। सेना ने पनामा में नोरिएगा के एक एक समर्थक को ढूंढकर मारा और अंत मे नोरिएगा भी पकड़ा गया। उसे एक साधारण अपराधी की पौशाक पहनाई गयी ताकि उसे उसकी औकात दिखाई जा सके।

नोरिएगा गिरफ्तार हुआ उसे 40 साल की जेल हुई और 2017 में वो जेल में ही मर गया। नोरिएगा शून्य से शुरू होकर शून्य में ही मिल गया। नोरिएगा मर गया और पनामा दोबारा खड़ा हुआ, पनामा ने अपनी सेना रद्द कर दी और अमेरिका से समझौता किया। साथ ही 1999 में जिमी कार्टर के वादे के अनुसार अमेरिका ने केनाल का नियंत्रण पनामा को दे दिया। अब पनामा सिर्फ व्यापार करता है और आज एक विकासशील देश है।

नोरिएगा का यह अध्याय एक सीख है उन लोगो के लिए जो चाहते है कि देश मे एक विशेष किस्म की तानाशाही स्थापित हो। साथ ही उनके लिए भी जो कहते है कि हमारे देश को अमेरिका ने लूटा इसलिए हम आतंकवाद की राह पर है। ऐसे देशो को पनामा का यह अध्याय अवश्य पढ़ना चाहिए। तानाशाही, सैनिक शासन और तख्तापलट जैसे शब्द सुनने में जितने आकर्षक लगते है उतने ही जहरीले भी है। हालांकि मुस्कुराइए आप भारत मे है।

(परख सक्सेना)

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