पाकिस्तान के पास बचे हैं बस चार महीने

पकिस्तान संकट में है और यह संकट आर्थिक संकट है अब जिसकी वजह बना है. एफएटीएफ..

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एफएटीएफ याने कि फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फ़ोर्स जो कि एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, 38 देशों से मिल कर बना यह आर्थिक संगठन एफएटीएफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनी लांडरिंग और आतंक की मुद्रा-पूर्ती के विरुद्ध कार्रवाई करता है. पेरिस में मुख्यालय वाले इस आर्थिक संगठन में भारत सहित अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और चीन भी  शामिल है.

एफएटीएफ ने पाकिस्तान के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है और उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया है. ग्रे लिस्ट में डाले जाने की वजह पकिस्तान को दिए गए चालीस बिंदुओं पर अपेक्षित होम वर्क को करने में असफल रहना था, जो कि आतंक के वित्त पोषण के खिलाफ था, एफएटीएफ ने पकिस्तान को चार महीनों का समय दिया है और उम्मीद की है कि फरवरी 2020 तक पाकिस्तान आतंक के वित्त पोषण पर पूर्ण रोक लगाएगा. यदि आने वाली फरवरी तक पाकिस्तान ऐसा करने में असफल रहता है तो उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया जायेगा जो कि पकिस्तान का दीवाला निकाल देने के लिए काफी होगा. यही फिलहाल पाकिस्तान की परम चिंता का विषय बन गया है.

 वैसे पाकिस्तान पहले ही बुरी आर्थिक स्थिति का शिकार है और ऊपर से ग्रे लिस्ट में डाला जा चूका है. ग्रे लिस्ट में होने के कारण पाकिस्तान को प्रतिवर्ष दस बिलियन डॉलर्स का नुकसान हो रहा है. ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान के साथ ऐसा पहली बार हो रहा है, 2011 में भी पकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया था और फिर पूरे चार साल बाद 2015 में पाकिस्तान ने आतंक के विरुद्ध ऐक्शन प्लान को लागू किया था. पकिस्तान के साथ एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में सीरिया, सर्बिया, यमन, श्रीलंका, ट्यूनीशिया और त्रिनिदाद भी शामिल हैं.  

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