पाकिस्तान के साथ चीन भी युद्ध से भयभीत है

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चीन को विश्व में अलग थलग पड़ने का भी डर है अगर पाकिस्तान का साथ दिया तो..

हालाँकि पुलवामा हमले के बाद चीन पाकिस्तान को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा मगर फिर भी उसने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के अज़हर मसूद को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव को समर्थन देने का कोई आश्वासन नहीं दिया हैं.

चीन को भी पाकिस्तान की तरह विश्व में अलग थलग होने का डर है — वैसे अभी तक चीन मसूद के खिलाफ प्रस्ताव को वीटो करता रहा है लेकिन अब पुलवामा के बाद चीन शायद मसूद के खिलाफ प्रस्ताव को समर्थन को बाध्य हो जायेगा, जैसे सुरक्षा परिषद् के पाकिस्तान के खिलाफ पुलवामा पर हमले के प्रस्ताव को समर्थन करने को बाध्य होना पड़ा .

स्वीडन के अख़बार के अनुसार भारतीय वायुसेना के बालाकोट में हमले के बाद पाकिस्तान ने अनेक देशों से मदद मांगी मगर सभी ने हाथ खींच लिए –यहाँ तक चीन ने भी पाकिस्तान को अपने सैटेलाइट लिंक देने से मना कर दिया -आज शांतिदूत बन रहे इमरान को अमेरिका समेत अनेक
देशों ने समझा दिया था कि या तो अभिनन्दन को बिना शर्त छोड़ दो वरना भारत की ब्रह्मोस मिसाइल से बरबाद होने के लिए तैयार हो जाओ.

चीन ने पाकिस्तान में करोड़ों डॉलर का निवेश किया हुआ है जबकि वो दिवालिया होने की कगार पर खड़ा है –चीन को बस यही डर है कि अगर भारत आक्रामक हो गया तो ना जाने चीन के कितने प्रोजेक्ट्स मिट्टी में मिल सकते हैं –इसलिए चीन मजबूरी में पाकिस्तान का समर्थन ना करने
के लिए मजबूर है.

एक तरफ चीन पाकिस्तान के आतंकवाद को नज़रअंदाज करता रहा है और दूसरी तरफ वो खुद अपने देश के जिंगयांग प्रान्त में उइगर मुसलमानों को आतंकवाद के नाम ही कुचल रहा है –आतंकवाद के लिए ये ऐसी ही दोहरी नीती है जिस पर कभी अमेरिका और पश्चिमी देश चलते थे.

चीन को अलग थलग कैसे करे विश्व ?

चीन को वैश्विक स्तर पर अलग थलग करने के लिए 2 काम जरूरी हैं –पहला उसके साथ विश्व के बड़े देश व्यापार पर अंकुश लगायें जिसे चीन को बर्दाश्त करना कठिन होगा –WTO के नियमों में ऐसे बदलावों को आगे बढ़ाया जाये जिससे चीन के एकाधिकार पर अंकुश लगे.

दूसरी चीन की सबसे कमजोर कड़ी है ताइवान –चीन की वन -चाइना पालिसी की विश्व के देशों को मुखालफत करनी चाहिए और ताइवान को हर तरह की मान्यता देनी चाहिए जिससे चीन तिलमिला उठेगा –2.36 करोड़ की आबादी वाला देश ताइवान चीन की आँख की किरकिरी है जिसे वो अपना गुलाम समझता है जबकि ताइवान चीन को टक्कर देने की स्तिथि में है और उसके लिए सरदर्द बना हुआ है.

(सुभाष चन्द्र)

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