बगदादी के वध का भारत से संबन्ध

(परख सक्सेना)

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आतंकवादी मारना मतलब घास काटना है, बाद में फिर उग जाएगी..

दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी अबु बकर अल बगदादी मारा गया। हालांकि कुछ लोगो का प्रश्न है कि यह वध भारत को किस तरह से प्रभावित करता है? इसके लिए मध्यपूर्व विशेषकर सीरिया की पृष्ठभूमि समझना होगा। उससे पहले इस तस्वीर को समझिए ये है सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद और उनकी धर्मपत्नी आसमा अल असद।

2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया, इसी बीच इराक का पड़ोसी देश सीरिया जिस पर असद परिवार पिछले 45 सालों से राज कर रहा था उस पर एक संकट मंडराया।

दरसल सीरिया लेबनॉन को कंट्रोल करता था जिसके कारण लेबनॉन के राष्ट्रपति रशीद हरीरी ने सीरिया के खिलाफ बगावत कर दी और एक दिन लेबनॉन के ही बम विस्फोट में मारे गए। असद ने अपना हाथ होने से साफ इंकार किया मगर जांच में मदद भी नही की।

अंततः सारे गवाहों की हत्या होती गयी और असद इस आरोप से बच गए तथा केस बंद हो गया। मगर असद समझ गए कि इराक के बाद अगला नंबर सीरिया का भी हो सकता है। इसलिए असद ने सीरिया की जेल में बंद कैदियो को इराक भेजा जिन्होंने ISIL नाम के आतंकी संगठन की स्थापना की। इसी संगठन से बगदादी भी जुड़ा।

ISIS आने के कारण अमेरिका को इराक में काफी समय लग गया, अब वो मध्यपूर्व में ज्यादा समय नही बिताना चाहता था और बाहर निकालना चाहता था।

17 दिसम्बर 2010 के दिन आसमा अल असद को मध्यपूर्व की प्रभावशाली महिला के तौर पर फोर्ब्स मैगजीन ने वर्णित किया, उसी दिन अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में एक सब्जी वाले ने भ्रष्टाचार से तंग आकर खुद को आग लगा ली यह घटना अरब स्प्रिंग के रूप में सामने आई। अरब देशों में आंदोलन हुए जो लोग लंबे समय से शासन कर रहे थे उन्हें उखाड़ फेंका गया, गृहयुद्ध हुए।

लीबिया में मुहम्मर अल गद्दाफी का खात्मा हुआ इसके बाद ये लहर मिस्र पहुँची और 30 वर्षो से राज कर रहे होस्नी मुबारक को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। असद बिल्कुल शांत थे, मगर एक दिन सीरिया के हामा शहर में कुछ बच्चों ने स्कूल की दीवार पर लिखा “अब आपकी बारी है डॉक्टर”। दरसल असद आँखों के डॉक्टर थे इसलिए यह टिप्पणी की गई।

हामा के सुरक्षा प्रमुख असद के चचेरे भाई ने स्कूल के बच्चों पर काफी जुल्म ढाए और इस तरह सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत हुई। लोग सड़कों पर उतर आए, इस्लामिक स्टेट (ISIS) भी अब सीरिया आ पहुँचा। इसके अतिरिक्त सीरिया की कूर्द जाति ने अलग देश की मांग की और अंततः सीरिया गृहयुद्ध में उजड़ गया।

2010 में दुनिया के सबसे सुरक्षित देशो में शामिल सीरिया में अब मौत सड़को पर घूमने लगी। अमेरिका ने असद से इस्तीफा मांगा मगर असद ने विद्रोहियों को मारना शुरू किया, दूसरी ओर इस्लामिक स्टेट के जेहादी राष्ट्रपति भवन से मात्र 5 किमी दूर थे। तब असद को एक रक्षक मिला, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। रूस की सेना सीरिया में उतरी और ISIS का विनाश किया, ISIS को राजधानी दमास्कस से धकेल दिया गया।

जब अमेरिका ने देखा रूस सीरिया में आ गया तो अमेरिका भी कूद पड़ा, अमेरिका और कूर्द सीरिया की सेना तथा इस्लामिक स्टेट से लड़ रहे थे वही रूस विद्रोहियों से असद को बचा रहा था। इस बीच दुनिया भर में इस्लामिक क्रांति हुई आखिर अमेरिका और रूस जैसे काफ़िर मुल्कों ने मुसलमानों पर बम कैसे गिराए?

इस्लामिक दहशत फ्रांस और इंग्लैंड पहुँची, जमकर आतंकी हमले हुए। जहाँ जहाँ मुस्लिम आबादी बढ़ती गयी वहाँ वहाँ दंगे शुरू हो गए, स्वीडन में एक ईसाई महिला को जिंदा जला दिया गया क्योकि उसके कपड़े छोटे थे। भारत भी इस आंधी से नही बच सका।

कश्मीर में इस्लामिक स्टेट के झंडे दिखाए गए। मस्जिद की दीवार पर लिखा गया “हिंदुस्तानी काफिरो अल्लाह महान है”। इसके बाद सेना तुरन्त एक्शन में आ गयी और जेहादियो पर काल बनकर टूटी अंततः कश्मीर से धारा 370 हट गई और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश बनकर सीधे दिल्ली के नियंत्रण में आ गया।

इस कारण भारत मे इस्लामिक स्टेट अपना करिश्मा नही दिखा पाया हालांकि कई मुस्लिम युवाओं ने सीरिया जाने का प्रयास किया तथा भारत की आंतरिक बाते सोशल मीडिया के माध्यम से उसे शेयर की मगर खुफिया एजेंसियों के आगे सब फेल रहे।

हमे अपना हित देखने की आवश्यकता है, असद कैसे व्यक्ति या राष्ट्रपति है यह सोचना सीरिया की जनता का काम है हमारा नही। असद हमारे लिये एक अहम किरदार है, असद के सारे दुश्मन हमारे दुश्मन है जैसे टर्की और इस्लामिक स्टेट। इसलिए हमें असद के साथ खड़े होना चाहिए, वे और उनकी पत्नी काफी आधुनिक विचारो वाले है।

बशर अल असद लंदन से डॉक्टर है जबकि उनकी पत्नी आसमा अल असद एक इन्वेस्टमेंट बैंकर है। इस्लामिक कट्टरता उन दोनों में नही है, यदि ये दमास्कस की गद्दी पर बैठे रहे तो निश्चित ही हमारा फायदा है।

हिंदूवादी माने या ना माने मगर अब हम सभी इस्लामिक आतंकवाद से थक चुके है बेहतर होगा कि मध्यपूर्व में कुछ अच्छे विचारों वाले लोग शासक बने ताकि मुसलमान आतंकवाद का दामन ना थामे और विश्व मे शांति बने रहे।

इस्लामिक स्टेट को फिर से भारत मे पैर पसारने के लिए नया मॉडल बनाना पड़ेगा इसमें उसका काफी समय नष्ट होगा। इसलिए जो हुआ शुभ हुआ, एक बार सीरिया की सेना इस्लामिक स्टेट को खत्म कर दे तो हमारे स्वार्थ पूरे हो जाएंगे।

बहरहाल दिवाली के उपहार के लिए अमेरिका को धन्यवाद।

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