Afghanistan : बदहाल है हालत तालीबानी राज में

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आतंकी संगठन तालिबान ने पिछले कई दिनों से अफगानिस्तान में भय व आतंक के हालात पैदा कर रखे हैं. अफगानिस्तान के एक के बाद एक शहरों पर बलपूर्वक कब्ज़ा करने के पश्चात अब सारे देश पर तालीबान ने अपना अधिकार जमा लिया है.
अफगान लोगों में अफरा-तफरी मची है और वे देश छोड़ कर भाग जाना चाहते हैं.  अब तक तो अफगानी राष्ट्रपति देशवासियों  को पूर्ण सुरक्षा की झूठी सांत्वना दे रहे थे लेकिन इससे पहले कि तालीबानी आतंकी काबुल के भीतर दाखिल होते, राष्ट्रपति अशरफ़ गनी काबुल पर देश को तालीबान हमले के हाथों छोड़ कर खुद देश छोड़कर भाग खड़े हुए हैं.
राष्ट्रपति के देश पलायन के साथ-साथ अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन पर तालिबान ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है. तालिबान ने ये दावा किया है कि अराजकता को नियंत्रण में रखने के लिए उसने काबुल में प्रवेश किया. कुछ सांसद भी देश छोड़कर चले गये हैं. तालिबानी आतंकियों के डर से आम नागरिक काफी भयभीत हैं और अफगानिस्तान छोड़ने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं.
काबुल में एकाधिपत्य के साथ अफगानिस्तान पूरी तरह से तालिबान सरकार की मुट्ठी में आ गया है.  जिससे नागरिक भयभीत होकर अपने और परिवार की जीवन सुरक्षा हेतु प्रयासरत हैं. लोगों में जान बचाने के लिये भगदड़ मच गई है परन्तु भगदड़ में किसी के घायल होने की खबर नहीं मिली है.
खबरों के मुताबिक काबुल एयरपोर्ट पर धुंआधार फायरिंग हो रही  हवाई अड्डे पर चारों ओर भगदड़ की स्थिति है. बताया जा रहा है कि ये भगदड़ फायरिंग के बाद मची जिसमें किसी के हताहत होने की सूचना नही मिली है.
वहीं अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट को अपने नियंत्रण में ले लिया है.  अमेरिका सिर्फ अपने आर्मी जवानों को वहाँ से निकाल रहा है.  काबुल एयरपोर्ट पर मची अफरा तफरी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इसमें  यह साफ तौर पर दिख रहा है कि अमेरिकी सैनिक विमान में सवार हैं और काबुल की जनता प्लेन में चढ़ने के लिये संघर्षरत है.  विडियो में लोग इधर उधर प्राण बचाने और सुरक्षित स्थान पर शरण लेने के लिये भाग रहे हैं इसमें महिलाएं और बच्चे भी  हैं. कहा जा रहा है कि ये भय व आतंक इस कारण भी है क्योंकि तालिबानी आतंकियों ने ये फरमान जारी किया है कि पन्द्रह वर्ष से कम उम्र की बच्चियों को उनके सुपुर्द कर दिया जाए.
अफगानिस्तान के हालातों को लेकर पूरा विश्व चिंतित है . संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक अफगानिस्तान के इन्हीं गंभीर हालातों लेकर होने वाली है. सांय साढ़े सात बज ये बैठक की जायेगी  भारतीय समयानुसार.  भारत इस बैठक की अध्यक्षता करेगा.
ये भी विचारणीय विषय है कि अफगानिस्तान की ओर से कौन इस बैठक में पक्ष रखेगा. भारतीय  विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले से ही न्यूयॉर्क में हैं.अफगानिस्तान की चौबीस घंटों में जिस प्रकार परिस्थितियाँ बदली है उसे देखते हुए यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.  सोचने वाली बात ये है कि बैठक में अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व कौन करेगा और अफगानिस्तान का पक्ष कैसे रखा जायेगा.
इधर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान के खराब हालातों को लेकर अमेरिकी नीतियों पर सवाल खड़े कर दिये हैं.  ट्रंप ने कहा है कि “ये अमेरिका की सबसे बड़ी हार है”. उन्होंने काबुल में राष्ट्रपति भवन पर तालिबान के कब्जे और अशरफ गनी के देश छोड़कर जाने की खबर के पश्चात यह प्रतिक्रिया दी.  सूत्रों के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग ने इन सभी आरोपों की सत्यता को ग़लत बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है.

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