ISIS-K : अमेरिका ने किया दावा, ले लिया Kabul धमाकों का बदला

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अमेरिका ने काबुल धमाकों में शहीद अपने जवानों की मौत का बदला ले लिया है. सूत्रों के अनुसार अमेरिका ने अफगानिस्तान के आईएसआईएस- K के ठिकाने पर गुमनाम लोकेशन से ड्रोन भेजकर हमला किया. यह हमला नंगरहार जिले में हुआ जो कि अफगानिस्तान की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है. यह घटना कल बीती देर रात की है.
अमेरिकी रक्षा विभाग के हेडक्वार्टर पेंटागन से यह जानकारी दी गई कि इस हमले में काबुल धमाके का मुख्य आरोपी मारा गया. इस आपरेशन को बीती रात को उस वक्त अंजाम दिया गया जब काबुल सीरीयल ब्लॉस्ट का मास्टरमाइंड अपने किसी दूसरे आतंकी सहयोगी के साथ कार में मौजूद था और ये दोनों ही आतंकी अमेरिका द्वारा किये गए इस हमले में मारे गए.
मीडिया की जानकारी के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन ने यह आक्रमण पूर्वी नंगरहार के कला-ए-नघरक जिले में किया था जिसमें एक घर के पूरी तरीके से तबाह होने की खबर मिली है. घर की दीवार में अनगिनत छेद हो गए और घर के अंदर एक ऑटो रिक्शा था जो क्षतिग्रस्त हो गया. इस हमले में किसी भी आम नागरिक की जान जाने की सूचना नही मिली है.
इस हमले से जमीन में एक गहरा गड्ढ़ा बन गया.बताया जा रहा है कि अमेरिका ने काबुल धमाको के पश्चात यह हाई अलर्ट की घोषणा की थी. यह हमलागुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर तब जब चेकिंग के दौरान एअरपोर्ट में प्रवेश करने की प्रतीक्षा में लाईन में खड़े थे.
ISIS-K ने फिदायीन हमला किया जिसमें 13 अमेरिकी सैनिकों सहित 170 लोगों कीजानें गई. इसके बाद अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि काबुल हमले का बदला लिया जाएगा और आतंकियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारेंगे। अमेरिक के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दावा किया था कि “काबुल हमले का बदला लिया जाएगा और आतंकियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारेंगे.” राष्ट्रपति जो बाईडेन ने ये भी कहा कि हमलावरों को वे अच्छी तरह पहचानते हैं और उन्हें उचित समय पर सटीक उत्तर अवश्य देगा अमेरीका और 36 घंटे के भीतर ही अमेरिका ने बीती रात ISIS-K क खुफिया ठिकानों पर ड्रोन भेजकर हमला कर अपने जवानों की शहादत का बदला ले लिया.
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि काबुल एयरपोर्ट पर फिर हमला हो सकता है ISIS द्वारा जैसा की सब जानते हैं कि अफगानिस्तान पर अब तालिबानी साम्राज्य का ठप्पा लग चुका है. ऐसे में काबुल एयरपोर्ट पर फिर से आतंकी हमलों की सुगबुगाहट ने माहौल को भयावह और डरावना बना दिया है. अमेरिका ने अपने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे काबुल एयरपोर्ट के आस-पास न जाएं. अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी किए गए अलर्ट में काबुल एयरपोर्ट के अब्बे गेट, ईस्ट गेट और नॉर्थ गेट का अमेरीकी दूतावास ने विशेष तौर पर जिक्र किया है.
ISIS-K का नाम आज हर बच्चे, बूढ़े-जवान के होंठों पर है और यह नाम ज़ुबान पर लाते हुए भी भय और आतंक का एहसास होता है. आखिर है क्या ये ISIS-K. इस आतंकी समूह का नाम आईएसआईएस-के उत्तरपूर्वी ईरान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी अफगानिस्तान में आने वाले इलाकों के नाम पर पड़ा. यह एक बहुत खूंखार संगठन है जो 2014 में पूर्वी अफगानिस्तान में अपने पैर पसार रहा था. इस आतंकी संगठन ने कुछ वर्ष तो पूर्वी अफगानिस्तान में अपने आतंक का प्रभाव दिखाया विशेषकर अफगानिस्तान के नंगरहार और कुनार प्रांतों में इसका आतंकी प्रभाव अपने उत्थान पर था.
ISIS-Kसमूह ने काबुल में स्लीपर सेल स्थापित किए तत्पश्चात 2016 से काबुल और उसके बाहर बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलों की शुरूआत हुई. प्रारंभिक दिनों में यह केवल पाकिस्तान से लगे कुछ इलाकों तक ही था, परन्तु शनै:-शनै: उसने ऊँगली पकड़ते-पकड़ते पुहुँचा ही पकड़ लिया यानीअब स्थिति यह है कि जाज्वान और फरयाब समेत उत्तरी प्रांतों में भी इस संगठन दूसरा प्रमुख गुट तैयार हो गया है.
ISIS और तालिबान दोनों कट्‌टर सुन्नी इस्लामी आतंकी ग्रुप हैं परन्तु एक दूसरे के विरोधी और कई विषयों में असहमत भी हैं. काबुल में ISIS-K द्वारा धमाकों के पीछे छिपे मकसद को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. गौर करने वाली बात ये है कि अलर्ट की घोषणा के बाद भी इस आत्मघाती हमले को रोका नहीं जा सका

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