बड़ी लड़ाई की शुरुआत हो सकती है ये America और Russia के बीच

शीतयुद्ध दोनों देशों के बीच दशकों से है, पर ऐसा पहली बार हो रहा है कि रूस के राजनयिक अमेरिका से बाहर निकाले जा रहे हैं जो अच्छा संकेत नहीं है

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वैश्विक स्तर पर ये अच्छे संकेत नहीं हैं. अमेरिका के जो बाइडेन को मिस्टर कूल माना जाता है और ऐसे में उन्होंने पर्दे के पीछे किस दबाव में आ कर इस तरह की घोषणा कर दी है -ये बात समझ के परे है. रूस कोई छोटा-मोटा देश नहीं है, वह भी चीन और अमेरिका की तरह एक वैश्विक महाशक्ति है. और इस तरह की हरकत न तो अमेरिका को शोभा देती है न ही ये हरकत अमेरिका के लिए किसी तरह फायदेमंद है. रूस को अमेरिका की ये अदा बिलकुल भी रास आने वाली नहीं है.

एक साल पहले भी ऐसा ही हुआ था

ये ठीक वैसा ही है जैसा लगभग एक साल पहले 23 जुलाई को हुआ था जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐसा ही बड़ा फैसला ले कर चीन से अमेरिका में अपना राजदूतावास बंद करने का आदेश दिया था और उसके बाद चीनी राजनयिकों को अमेरिका छोड़ कर वापस जाना पड़ा था. उस समय ट्रंप प्रशासन ने चीनी नागरिकों पर अमेरिका की वैज्ञानिक-शोध की चोरी करने का आरोप लगाया और टेक्सास स्थित चीनी दूतावास के राजनयिकों को देश से निकल जाने के लिए कहा. वैसे उस समय बीजिंग ने भी चेतावनी दी थी कि वह जवाबी कार्रवाई करेगा।

तीन सितंबर तक छोड़ना होगा अमेरिका

साफ तौर पर रूस के राजनयिकों को अमेरिका ने दे दिया है देश छोड़ने का आदेश. अब रूसी राजनयिकों को 3 सितंबर तक जाना होगा वापस अपने घर. रूस के विदेश मंत्रालय से जारी बयान में कहा गया है कि वैसे भी वीजा अवधि पूरा होने के बाद राजनयिकों को तो वापस जाना ही पड़ता है.

24 रूसी राजनयिक जाएंगे वापस

अमेरिका और रूस के बीच की कड़वाहट अब शोर करने लगी है. इस शोर की पहली गूँज वाशिंगटन से आई है जिसमे रूस के राजनयिकों को अमेरिका छोड़ने का आदेश जारी किया गया है. अमेरिका के विदेश मंत्रालय के तत्संबंधी वक्तव्य के निशाने पर रूस के 24 राजनयिक हैं जिनको 3 सितंबर तक रूस वापस जाना होगा. ये जानकारी अमेरिका में रूस के राजदूत द्वारा मीडिया से साझा की गई. चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने चीख चीख कर ये खबर दुनिया को बताना शुरू कर दिया है कि अमेरिका से अब रूस के लगभग सभी राजनयिकों को अब वापस जाना होगा.

दिसंबर में हुआ था समझौता

इस विषय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रूसी राजदूत एंटोली एंटोनोव ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्रालय के इस आदेश का पालन करते हुए 3 सितंबर तक उनके 24 राजनयिक अमेरिका छोड़ कर रूस वापस चले जाएंगे. उन्होंने बताया कि आठ माह पूर्व ही अमेरिका और रूस के बीच दिसंबर 2020 में ये समझौता हुआ था जिसके अनुसार अमेरिका में रूसी राजनयिक तीन साल रहेंगे. रूसी राजदूत ने कहा कि उनकी जानकारी में ये नियम दूसरे देशों के राजनयिकों पर लागू नहीं है.

‘‘वीजा खत्म होने पर तो जाना ही होगा’’

एंटोनोव का ये बयान एक इंटरव्‍यू के साथ सामने आया है. रूसी राजदूत के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता नेड प्राइस ने कहा कि एंटोनोव का क्या अर्थ है, वे नहीं जानते परन्तु ये कहना गलत होगा कि रूस के राजनयिकों को निकला जा रहा है. प्राइस ने कहा कि आमतौर पर राजनयिकों की वीजा अवधि तीन वर्षों की होती है जिसके पूरे होने के बाद उनको जाना ही होता है, या फिर उन्‍हें वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करना होता है.

रूस ने भी लगाया प्रतिबंध

रूस के राजनयिकों को अमेरिका से बाहर जाने का आदेश सामने आने के बाद रूस की व्यवहारिक प्रतिक्रिया संभावित थी और रूस ने अप्रेल में यूएस डिप्‍लोमेटिक मिशन पर रूसी नागरिकों को हायर करने को प्रतिबंध कर दिया था, इतना ही नहीं रूस ने मिशन के प्रशासनिक कार्यों के लिए और तकनीकी सहायता के लिए भी किसी तीसरे देश के नागरिक की नियुक्‍त पर प्रतिबंध लगा दिया था.

हाल में भेंटवार्ता भी हुई

यहां ये बताना भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अमेरिका और रूस के राष्ट्रपतियों के बीच जुलाई में  स्विजरलैंड में वार्ता हुई थी जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ को हटाने की कोशिश करना था. लेकिन जो भी हो, इस भेंटवार्ता में चीन भी इन दोनों देशों के बीच एक अनिवार्य मुद्दा बन कर आया होगा. चीन ही वह निर्णायक देश है जो इन दोनों महाशक्तियों के बीच या तो संतुलन कायम करेगा या फिर बड़ा असंतुलन पैदा करेगा. जो भी हो रूस इतना नासमझ नहीं हो सकता कि अमेरिका को नीचे दिखने के लिए ड्रैगन को मेहमान बना ले. चीनी धोखेबाजी के इतिहास से रूस भी अपरिचित नहीं है.

 

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