China Vs Taiwan: ड्रैगन  का पुराना शिकार ताइवान 

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अपनी कुटिल नीतियों और राजनीतिक चालों  के लिये मशहूर ड्रैगन  अब ताइवान पर अपने कब्ज़ा का दावा कर रहा है.  कम्यूनिस्ट धारा नीति अपना कर चलने वाला चीन सदा से चिंदी चोर रहा है.
दूसरे की वस्तु को अपना कह कर झपट्टा  मारने में वो माहिर है. चीन ने अपने विस्तारवादी नीति का जाल अब ताईवान पर फैला रहा है.
पाकिस्तान  और चीन की शायद इसीलिए  बनती है क्यूँकि  पाकिस्तान भारत की संस्कृति के प्रतीक हिंदू त्योहारों ठीक पहले या ठीक  उसी दिन  अकस्मात आतंकवादी हमला बोल़ता है. सामने वाले  को संभलने का अवसर  भी नही मिलता.  पाकिस्तान ने जिस प्रकार  कश्मीर के हिस्से गिलगित-बल्तिस्तान पर कब्ज़ा  कर रखा है.  यह जम्मू कश्मीर का वही क्षेत्र है जिसे पाकिस्तान अपना पांचवां प्रांत बनाना चाहता है.
भारतीय  मानचित्र  में पश्चिम में पाकिस्तान की तरफ भारत का एक सिरा निकला हुआ है इसे ही गिलगित-बाल्तिस्तान कहा जाता है. ऊपर की ओर गिलगित का इलाका और वहीं से दक्षिण में बल्तिस्तान. तकनीकी तौर पर यह जम्मू कश्मीर का ही हिस्सा है परन्तु 4 नवंबर 1947 से पाकिस्तान के कब्ज़े में है जो अंग्रेज़ अफसरों की गद्दारी से पाकिस्तान में चला गया.
 उसी प्रकार चालाक चीन भी अपनी प्रभुता का विस्तार विश्व में फैलाने के लिये किसी भी देश की संप्रभुता में दखलअंदाज़ी कर रहा है
चीन ने कश्मीर  की गलवान घाटी पर अपना अवैध  अधिकार करना शुरू कर दिया है. यहाँ तक कि गलवान घाटी के मध्य रोड तक बना ली है
वर्तमान में  सबसे करीबी चीनी पोस्ट हवेइटन है जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से 48 किलोमीटर की दूरी पर है. बॉर्डर से यह 8 किलोमीटर की दूर हैजहाँ संगम होता है श्योक और गलवान नदियों का.
यही चाल वह ताइवान(चीन-ताइवान संबंध) के साथ भी चल रहा है. रोड एंड बेल्ट योजना की आड़ में विस्तारवाद करता चीन दुनिया के कई देशों को अपने लालची पंजों में दबोच चुका है.

चीन ने भेजे लड़ाकू विमान

आपको बता दें कि अपनी इसी कूटनीति  के तहत चीन अपने ग़लत इरादों को अंजाम देने के लिये  शनिवार को 39 लड़ाकू विमान Taiwan भेजे. चीन में  शुक्रवार को कम्यूनिस्ट पार्टी द्वाराअपने राज्यकाल की 72वीं वर्षगांठ मनाई गई और इस अवसर पर अपनी शक्ति का ट्रेलर भी दिखा दिया ताइवान को लड़ाकू  विमान भेज कर.

चीन-ताइवान का भौगोलिक इतिहास 

Taiwan की Defense Ministry ने यह दावा किया है कि 39 चीनी लड़ाकू  विमान ताइवान के हवाई रक्षा क्षेत्र में सुबह और रात में देखे गये.  शुक्रवार को भी ड्रैगन ने ऐसे ही 38 लड़ाकू विमान ताइवान रवाना किए थे . थोड़ा पीछे इतिहास  में जाएं तो हम पाएगें कि चीन और ताइवान के भौगोलिक क्षेत्रफल का 75 वर्षों का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है.
Civil War के बाद वर्ष 1949 के विभाजन के उपरांत कम्युनिस्ट समर्थकों ने चीन पर कब्जा किया वहीं नेशनलिस्ट समर्थकों ने ताइवान में सरकार का गठन किया.  तभी से चीन समय समय पर ताइवान के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर कब्ज़ा  करने की कोशिश चलती  रहती है. बीजिंग भी ताइवान पर अपने अधिकार का ढोल बजाता रहा है.

ताइवानी संप्रभुता को खतरा

एक कारण यह भी है कि अपने आतंक से ताइवान को समय-समय  पर धमकाने वाला चीन  ताइवान से अमेरिका की निकटता होने के कारण चिढ़ता है.
समाचार पत्रों के सूत्रों से मिली  जानकारी  के अनुसार चीन ने ताइवान की सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरे की घंटी बजा दी है.  Central News  Agency Of Taiwan के बयान के मुताबिक “शुक्रवार और शनिवार को लगातार 38 और 39 विमान भेजना उकसावे भरी कार्रवाई है.”  ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने  घटना का ब्यौरा देते हुए बताया कि ताइवान के हवाई क्षेत्रों में शनिवार को दिन में 20 विमान और रात को 19 विमानों ने प्रवेश  किया.  इनमें J-17 और SU-30 Fighter Jets के विमानों की पहचान की गई.

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