China Vs Taiwan: ड्रैगन को ताइवान की चेतावनी

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अपनी संप्रभुता में चीनी हस्तक्षेप को लेकर ताइवान ने दे डाली है चीन को वॉर्निंग. चीन लगभग एक वर्ष से लगातार ताइवान पर अपना दबाव बनाए हुए है. अभी हाल ही में करीब 150 लड़ाकू चीनी विमानों ने ताइवान हवाई क्षेत्र में जबरन प्रवेश किया. इसी प्रकार के प्रयास चीन कई बार पहले भी कर चुका है.
चीन का मानना है कि ताइवान उनके गणराज्य का ही हिस्सा है और एक न एक दिन वे उसे इसमें शामिल कर ही लेगें.

ताइवानी इतिहास है वजह

ताइवान एक छोटा सा द्वीप है. वर्ष 1895 में जापान ने पहला चीन-जापानी युद्ध जीता. युद्ध के बाद ताइवान जापान के नियंत्रण में आ गया था परन्तु द्वितीय विश्व युद्ध में जापान को पराजय का मुँह देखना पड़ा. पाट्सडैम और काहिरा की घोषणाओं के अनुसार ताइवान पर राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी का अधिकार दोबारा से गया. फिर चीन में हुए गृहयुद्ध में माओत्से तुंग के प्रतिनिधित्व में कम्युनिस्टों ने राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी को पराजित किया. हार के पश्चात राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी ने ताइवान में अपनी सरकार बनाई. साल 1951 में सैन फ्रांसिस्को की संधि में जापान ने ताइवान से अपने सभी अधिकारों का अंत कर दिया. साल1952 की चीन-जापान संधि वार्ता के बाद चीन का ताइवान पर कोई नियंत्रण नही रहा.

“एक चीन नीति” है चीनी विस्तारवाद

गाहे-बगाहे चीन का हस्तक्षेप ताइवान पर अलग-अलग शासकों के शासन में चलता रहा परन्तु 1970 वर्ष में डेंग शियाओपिंग ने देश की बाग़डोर संभाली जिसने “एक देश दो प्रणाली” की नीति को घोषित कर चीन और ताइवान के बीच बढ़ते विवाद का अंत करने का प्रयास किया. इस एक चीन नीति का ताइवान ने विरोध किया क्योंकि वह स्वयं को चीन से पृथक एक स्वतंत्र देश मानता है, जो बस औपचारिक रूप से “एक चीन नीति” के कारण ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ कहलाता है. 1949 में जब से टोंकिन की खाड़ी को “इलैवन डैश लाईन” से अलग कर “नाईन डैश लाईन” में विलीन कर दिया गया तब से अब तक लगातार चीन और ताइवान के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है.

ताइवानी सरकार की चेतावनी चीन को

स्थिति अब भी ज्यों की त्यों बनी हुई हैं. चीन की लगातार ताइवान की संप्रभुता पर घुसपैठ की कई बार ताइवान शिकायत कर चुका है परन्तु ड्रैगन के कान पर जूँ तक नही रेंग रही है. शुक्रवार से अब तक के चीन के लड़ाकू विमानों की जबरन घुसपैठ कर ताइवान की क्षेत्रीय शांति को भंग करने के कारण अब ताइवान ने चीन को चेतावनी दे डाली है. ताइवान ने कहा कि अब हमला करने की हिम्मत की तो परिणाम बहुत बुरा होगा.

राष्ट्रपति ने कहा होंगे विनाशकारी परिणाम

ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने चीन की दबाव बनाने वाली नीति और कोशिशों के प्रति आत्मसमर्पण का रवैया शुरू से ही नही रखा है. उन्होंने अपने बयान के माध्यम से चीन को चेतावनी दी है कि – उसे ये याद रखना चाहिए कि चीन अगर ताइवान पर कब्जा करने की सैनिक कोशिश करता है तो स्थानीय शांति और लोकतांत्रिक गठबंधन सिस्टम की दृष्टि से इसका अन्जाम भयंकर होगा और चीन के लिये जो विनाशकारी स्थिति पैदा होगी उसे भी चीन को ध्यान में रखना चाहिये. दूसरी तरफ ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने  बताया कि इस हफ्ते की शुरुआत में  चीन के 56 लड़ाकू विमानों ने ताईवानी हवाई रक्षा क्षेत्र में जबरन घुसपैठ की है.

अमेरिका खड़ा है ताइवान के साथ

ये बताना भी जरूरी है कि ताइवान एक वित्तीय केंद्र भी है और दुनिया के कई देशों के साथ-साथ उसके अमेरिका से भी व्यापारिक संबंध हैं. इसीलिए अमेरिका ने ताइवान के में फेवर ये बयान दिया है कि “बीजिंग से हमारी अपील है कि वह ताइवान पर सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई को रोके.” अमेरिका ने चीन के रवैये को “उकसाने वाली सैन्य- गतिविधि” कहा है.
गत वर्ष से ही बहरूपिया चीन ताइवान पर अपनी गन्दी चालों का जाल बिछाता रहा है परन्तु सहने की भी एक सीमा होती है और अब ताइवान ने भी यह कह दिया है कि अपनी स्वत्वाधिकार के लिए वो हर उचित और संभव प्रयास करेगा. ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने खुले और साफ तौर पर यह कहा है कि “याद रखना चाहिए कि अगर ताइवान पर कब्जा होता है तो स्थानीय शांति और लोकतांत्रिक गठबंधन सिस्टम के लिए इसके परिणाम विनाशकारी साबित होंगे.”

ड्रैगन की सीना ज़ोरी

इसके विपरीत चीन डंके की चोट पर यह कह चुका है कि वह लोकतांत्रिक रूप से ताइवान पर कब्ज़ा कर शासन करेगा. अपनी ताकत का दम-खम दिखाते हुए चीन कह रहा है कि यदि ताइवान ने उसकी “एक चीन नीति” को अस्वीकारा तो वह जबरन ताइवान पर अपना अधिकार जमा लेगा.
चीन ने भारत से भी यह कहा है कि वह उसकी “एक चीन नीति” का समर्थन करे जबकि भारत को भी कश्मीर और अरूणाचल प्रदेश पर भारत की संप्रभुता को मानने की बात कहनी चाहिए.
1979 में ताइवान की संयुक्त राष्ट्र से आधिकारिक मान्यता समाप्त होते ही ताइवान का पतन शुरू हो गया. विश्व के अधिकतर देशों औ संयुक्त राष्ट्र ने भी ताइवान को स्वतंत्र देश की मान्यता नहीं दी. पूरे विश्व में 16 देशों ने ही ताइवान को एक स्वतंत्र देश के रूप में देखने की सहमति दी है.

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