हिन्द, हिन्दू और हिंदी को सम्मानित किया था दिवंगत अनिरुद्ध जगन्नाथ ने

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ नहीं रहे..भारत ने अपने पद्मविभूषण राजनेता हेतु राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है..

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भारत भूमि से दूर एक अनजान देश में भारतीयता को स्थापित करने वाले भारतीय थे अनिरुद्ध जगन्नाथ जिन्होंने मॉरिशस में हिंदी को सम्मान दिलाने का अभूतपूर्व कार्य किया. मूल रूप से भारत के बलिया से मॉरिशस पहुंचे अनिरुद्ध जगन्नाथ ने अपने साथी श्रमिकों सहित मिल कर ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया सदा भारत से दूर एक मिनी भारत के रूप में जगमगाता रहेगा.

अनिरुद्ध का देश हिन्दुस्तानियों के दिल में है

अनिरुद्ध जगन्नाथ का मॉरीशस हमेशा हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों के दिलों में धड़कता है. यह सुन्दर द्वीप देश आज दुनिया भर के लोगों के लिए पर्यटन का एक शांत और सुन्दर लक्ष्य के रूप में प्रसिद्ध है. अच्छा लगता है जब कोई याद दिलाता है मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ के पूर्वज उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के मूल निवासी थे. बलिया जिले स्थित रसड़ा थाना क्षेत्र का अठिलपुरा गांव उत्तरप्रदेश में ही नहीं भारत में भी किसी परिचय का मुहताज नहीं है क्योंकि यह गाँव मॉरीशस के प्रधानमंत्री के पुरखों का निवास स्थान रहा है.

दो सौ साल हो गये हैं लगभग

याद करते हुए इस गाँव के वृद्ध बताते हैं कि बरसों बरस पहले वर्ष 1873 में अंग्रेजों ने अनिरुद्ध जगन्नाथ के पिता विदेशी यादव और चाचा झुलई यादव को गिरमिटिया श्रमिक के रूप में जहाज से गन्ने की खेती के लिए मारीशस भेजा था. जगन्नाथ परिवार आज मॉरीशस का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार है जिसने श्रमिक से लेकर शासक तक की सफल यात्रा की है और भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक अस्तित्व भारत से बाहर भी स्थापित कर दिया है.

प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ की भारत यात्रा

दो वर्ष पूर्व मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ भारत यात्रा पर आये थे. आठ दिवसीय व्यस्त कार्यक्रम के कारण वे अपने पुरखों की भूमि बलिया तो नहीं जा सके किन्तु अपनी प्रिय धर्म नगरी वाराणसी जाना वे नहीं भूले और यहां के मंदिरों में उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना भी की. भारत की अमर-नगरी काशी से न केवल उनका अपितु उनके पिता प्रविंद जगन्नाथ का भी गहरा नाता था. एक समय काशी के मंदिरों में उनके पुरखों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए भगवान् भोलेनाथ से आशीर्वाद माँगा था.

लगभग दो सौ साल पहले हुआ था श्री गणेश

अभिलेखों में दर्ज दस्तावेज बताते हैं कि 1968 में फ़्रांस से स्वतंत्र हुए इस द्वीप देश में भारतीय अध्याय का श्री गणेश 2 नवंबर, 1834 को हुआ था जब भारतीय मजदूरों का पहला जत्था गन्ने की खेती के लिए कलकत्ता से एमवी एटलस जहाज पर सवार होकर मारीशस पहुंचा था. यही वह तिथि है जिसे हर वर्ष अर्थात आज भी दो नवंबर को ‘आप्रवासी दिवस’ के रूप इस ऐतिहासिक आगमन को स्मरण किया जाता है. जिस स्थान पर भारतीयों का यह प्रथम ऐतिहासिक जत्था उतरा था वहां आज भी आप्रवासी घाट की वो सीढ़ियां स्मृति स्थल के तौर पर देखी जा सकती हैं.

मॉरीशस में भारत के लाल थे अनिरुद्ध

अनिरुद्ध जगन्नाथ को मॉरीशस का ऐतिहासिक राष्ट्रपति या अमर प्रधानमंत्री कहा जाए तो अनुचित न होगा. सोये हुए स्वर्ग मॉरीशस को स्वर्ण बना देने वाले अनिरुद्ध का जन्म 29 मार्च 1930 को मॉरिशस में हुआ था. वे इस देश के ऐसे राजनीतिज्ञ रहे जो देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों पदों पर रहे हैं. मॉरीशस के राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने वर्ष 2003 से 2012 तक देश का अहम दायित्व वहन किया. 2003 के पूर्व भी वे देश के प्रधानमन्त्री भी रहे.

अनिरुद्ध थे जगन्नाथ परिवार के कुलपुरुष

मॉरीशस का जगन्नाथ परिवार अनिरुद्ध जगन्नाथ के बाद से अस्तित्व में आया और अब वह इस राष्ट्र का प्रमुख राजनैतिक परिवार है. सरोजनी बल्लाह से अनिरुद्ध जगन्नाथ का विवाह 18 दिसम्बर 1957 में हुआ और फिर उनकी दो संतानें हुईं: प्रविंद और शालिनी. जातीय तौर पर अनिरुद्ध जगनाथ अहीर यदुवंशी जाति से संबंधित थे किन्तु उनका परिवार आज उस ऊंचाई पर है जहां जातीयता की छोटी सोच नाकाम हो जाती है. अनिरुद्ध के पुत्र प्रविंद मिलिटेंट समाजवादी आंदोलन के नेतृत्वकर्ता हैं जिनका विवाह कबिता रामदानी से हुआ. अनिरुद्ध जगन्नाथ की पुत्री शालिनी का भी विवाह हो चुका है और उनके भरे-पुरे परिवार में उनके पांच नाती-पोते हैं.

अनिरुद्ध की राजनीतिक यात्रा

अनिरुद्ध जगन्नाथ को प्रथम प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किया गया. अनिरुद्ध ने राजनीतिक में पदार्पण करके मूवमेंट सोशलिस्ट मिलिटेंट पार्टी को नतृत्व प्रदान किया और आईएफ़बी के प्रत्याशी के रूप में प्रथम बार 1963 में संसद के लिए चुनाव जीता. इसके पश्चात अनिरुद्ध 1965 में ऑल मॉरिशस हिंदू कांग्रेस के सदस्य बन गए और 1965-66 के दौरान में शिवसागर रामगुलाम की सरकार में उनको देश का विकास राज्यमंत्री बनाया गया. फिर इसके बाद नवम्बर 1966 में वे श्रम मंत्री की भूमिका में आये. चार वर्षों के बाद 1970 में अनिरुद्ध ने मूवमेंट मिलिटेंट मॉरिसिएन में शामिल हो कर उसका नेतृत्व सम्हाल लिया. छह साल बाद 1976 में हुए चुनाव में उनको विजयश्री प्राप्त हुई तथा वे देश के विपक्ष के नेता के रूप में उभर कर सामने आये. फिर छह साल बाद आया वो समय जब वे देश के सर्वोच्च शिखर पर थे अर्थात 1982 में बड़ी विजय के साथ मारीशस के प्रधानमंत्री के रूप में जाने गए.

स्वर्ग से बेहतर है अनिरुद्ध का द्वीप

अनिरुद्ध जगन्नाथ के मारीशस की बाते करें तो इसे इसकी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. प्रसिद्ध लेखक मार्क ट्वेन जो बात मारीशस के लिए कही वह आज दुनिया में मारीशस की पहचान बनी है. अपनी निजी यात्रा वृतांत ‘फॉलॉइंग द एक्वेटर’ में मार्क ट्वेन ने लिखा है कि ” मॉरिशस को देख कर जो पहला ख़याल आता है वो ये है कि पहले मॉरिशस बना होगा उसके बाद स्वर्ग बना होगा.. और स्वर्ग तो शायद मॉरीशस की एक नकल मात्र है!”

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