Indonesia: पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने सत्तर साल की उम्र में हिन्दू धर्म में वापसी की

इसे कहते हैं बहादुरी की जीती-जागती मिसाल ..और ये मिसाल धर्मप्रेम की भी है..और ये मिसाल ये भी बताती है कि हिन्दू धर्म में है कुछ ऐसा जो लोगों को अपनी भूल सुधारने का अवसर प्रदान करता है..

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ये लेख आधारित है इंडोनेशिया के पूर्व राष्‍ट्रपति सुकर्णो की पुत्री के साहस पर और उनके धर्मप्रेम को लेकर.
इन्डोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो की पुत्री हैं सुकमावती जिनका पूरा नाम दायाह मुतियारा सुकर्णोपुत्री है. तीन वर्ष  पूर्व इन पर इस्लाम को, अपमानित करने के  संदर्भ  में आरोप लग चुके, हैं ये देश की पांचवी राष्‍ट्रपति मेघावती सुकर्णोपुत्री की बहन भी हैं.
इंडोनेशिया  की हिंदुओं की सबसे अधिक जनसंख्या वाली राजधानी बाली में मंगलवार उन्होंने अपना सत्तरवाँ जन्मदिन मनाते हुए हिंदू  धर्म को अपनाया. बता दें कि सुकमावती अक्सर विवादों के घेरे में रही हैं.
उनका कहना है कि उन्होंने अपनी दिवंगत दादी  इदा अयू नयोमान राई श्रीमबेन की इच्छा  की पूर्ति की है हिंदू  धर्म कौ अपनाकर.  हिंदू धर्म के प्रति आस्था और विश्वास उनमें बचपन से ही रहा है और
हिंदू धर्म की  कुशल ज्ञाता होने के साथ-साथ उन्हें हिंदू धर्मशास्त्र  के सिद्धांतों तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का भी भलीभाँति ज्ञान है. ऐसा उनके वकील का दावा भी है.
इतनी सफाई शायद इसलिए भी दी जा रही है क्योंकि इंडोनेशिया एक ऐसा देश है जिसमें मुस्लिम आबादी तुलनात्मक  स्तर पर ज़्यादा है. एशिया के विभिन्न मुल्‍कों में इंडोनेशिया एक मुस्लिम देश के रूप में अपनी पहचान रखता है. इस्‍लाम धर्म के मानने वालों की संख्या  सर्वाधिक है. इस मसले पर इतना हड़कंप  इसलिये भी मच रहा है क्योंकि पूरे विश्व की कुल मुस्लिम आबादी में से 12.7 प्रतिशत भाग इंडोनेशिया  में निवास करती है.
इंडोनेशिया की राजधानी बाली एक आईलैंड है जो अपनी  प्राकृतिक सुंदरता  के लिये जाना जाता है और एक वैश्विक टूरिस्ट प्लेस  है.  बड़ी तादाद में यहाँ भारतीय यात्री और दुनिया के कोने-कोने से लोग भ्रमण करने आते हैं. यहाँ पर हिंदू  नागरिकों की संख्या  अधिक है और यहाँ  बहुत सारे मंदिर  भी हैं जिनमें रामलीला की जाती है जिसमें पात्रों  की भूमिका निभाने वाले वही के स्थानीय इंडोनेशियन निवासी ही होते हैं.
सुकर्णोपुत्री सुकमावती विवाद के घेरे में उलझी हैं.  वर्ष 2018 में उनकी एक कविता  सोशल मीडिया  पर काफी वायरल हुई . कहा जाता  है कि यह रचना उनके इस्‍लाम-विरोध को प्रदर्शित  करती है. उन्होंने एक फैशन शो में इस कविता  का पाठ किया जिसके पश्चात  कई  कट्टर इस्लामिक समूहों  ने इसकी शिकायत पुलिस से की.
सुकमावती  पर शरिया,  हिजाब और मुस्लिम धर्म की आलोचना  करने का आरोप लगाया था. इस वजह से सुकमावती पर  संगीन चार्जेज़ लगाए गए  कि  उन्होंने इस कविता  के ज़रिए र्इस्लाम धर्म को नीचा दिखाने का प्रयास  किया है जिसके लिये  उन्हें  क्षमा  माँगने तक के लिए  भी  बाध्य  किया गया.
सुकमावती पूर्व राष्ट्रपति मेगावती की छोटी बहन होने के साथ-साथ इंडोनेशियाई नेशनल पार्टी की संस्थापक भी रही हैं.  वे इस लिए  भी इस मुद्दे  को लेकर चर्चा  में आ गई क्योंकि इंडोनेशिया का  सबसे बड़ा धर्म  इस्लामी है.

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