Israel Embassy Blast: मोसाद से भिड़े तो भारी नुकसान में रहेंगे आतंकी

इजराइल एम्बैसी बम धमाके के जिम्मेदार आतंकियों को याद रखना चाहिये कि: मोसाद से भिड़े तो भारी नुकसान में रहेंगे..

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मोसाद नाम है दुनिया में कुख्यात उस ख़ुफ़िया एजेंसी का जिसका वास्ता इज़राइल से है. आज इज़राइल मोसाद के नाम से और मोसाद इज़राइल के नाम से पहचानी जाती है. ऐसे में इज़राइल से टकरा कर मोसाद से दुश्मनी मोल लेना घाटे का सौदा होगा आतंकी शक्तियों के लिए.

प्रतिशोध है पेशा

चाहे वो फोन बम हो, जहर की सुई, सडेन एलेक्ट्रोक्यूशन हो या सडेन डेथ – प्रतिशोध के नए और कामयाब तरीकों का इस्तेमाल करने वाले संगठित समूह का नाम है मोसाद. इसका पेशा है बदला लेना उन सभी से जो उसके देश के दुश्मन हों या उसके देश के लिए खतरा हों. चारों तरफ से दुश्मनो से घिरा इज़राइल इसलिए ही शान से सर उठा कर अस्तित्वमान है क्योंकि उसके पास है मोसाद, दुश्मनों के लिए उसका सबसे घातक हथियार जो बदले के लिए हर हद पार कर जाती है और सात समंदर पार जा कर भी शिकार का काम तमाम करआती है.

मौत का दूसरा नाम मोसाद

इज़राइल की भाषा हिब्रू में मोसाद का चाहे जो अर्थ हो, इस इजरायली एजेंसी के नाम का अर्थ दुश्मन की दुनिया में मौत ही माना जाता है. मोसाद अपने दुश्मनों को सीधे मौत देती है चाहे मौत देने का तरीका कितना ही टेढ़ा क्यों न हो. दुनिया की इस सबसे घातक खुफिया एजेंसी मोसाद अपने इस प्रतिशोध सिद्धांत पर दृढ़ता के लिए जानी जाती है. मिसाल के लिए, आज से अड़तालीस वर्ष पूर्व 1972 में म्यूनिख ओलंपिक के दौरान जब आतंकियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी तो मोसाद ने 20 साल लंबा अपना ऑपरेशन प्रतिशोध चलाया था और हर एक आतंकी को चुन-चुन कर मौत के घाट उतरा था.

मोसाद की निगाहें हैं शुक्रवार के हमले पर

इससे पहले 2012 के हमले की जांच भी मोसाद कर चुका है और अब उसे भारत में दूसरी बार नज़र गड़ानी पड़ी है. शुक्रवार 29 जनवरी को भारत में इज़राइल की एम्बेसी के बाहर एक IED धमाका हुआ और उसकी गूँज अविलम्ब इज़राइल पहुंची. इज़राइल में मोसाद सक्रिय हुई और इस आतंकी हरकत पर उसकी नजर टेढ़ी हो गई हैं. इज़राइली दूतावास में हुए इस धमाके ने दुनिया भर के इजरायलियों को आतंक के खतरे के प्रति एकदा पुनः सचेत कर दिया है. सच तो ये है कि इन्ही खतरों से निपटने के लिए और इजरायली संसाधनों की हिफाज़त हेतु विश्व की सर्वाधिक तेज-तर्रार और घातक खुफिया एजेंसी तैयार की गई है. ऐसे में मोसाद को ज़रा भी कमतर आंकना आतंकियों के लिए भारी भूल साबित हो सकती है.

जांच के अपडेट की है प्रतीक्षा

शुक्रवार धमाके की जांच का काम अभी भारत की एजेंसियों के हाथों में है लेकिन इस जांच के परिणाम की तरफ मोसाद की निगाहें हैं. बताया जाता है कि दुनिया में कहीं भी इजरायली ठिकानों या उसके लोगों पर यदि कभी हमला होता है तो उसकी जांच की समानांतर जिम्मेदारी मोसाद अपने हाथों में ले लेती है. फिलहाल कोई नहीं जानता कि मामले की जांच के लिए मोसाद के एजेंट घटनास्थल पर पहुंचे थे या नहीं, किन्तु ये तय है कि इस जांच पर और उसके अपडेट पर मोसाद की नजर है.

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