Nepal: कोर्ट का फैसला गले में अटका – KP Oli को लगा ज़ोर का झटका

नेपाल में सियासी ड्रामा खत्म हुआ, शेर बहादुर देउबा को मिली प्रधानमंत्री की कुर्सी ..कमाल की बात ये है कि वे पांचवी बार प्रधानमंत्री बने हैं..

0
135
“दुख भरे दिन बीते रे भईया,अब सुख आयो रे” .. आखिरकार नेपाल के नये प्रधानमंत्री के रूप में  देश का सर्वोच्च दायित्व अब नेपाल कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शेर बहादुर देउबा संभालने वाले हैं |
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को सोमवार के ये निर्देश दिये | कोर्ट ने फैसला किया कि नेपाली कांग्रेस के प्रमुख देउवा को मंगलवार को ही प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया जाएगा। पांच महीने में दूसरी बार कोर्ट ने प्रतिनिधि सभा-मंडल को बहाल करने की घोषणा कर दी |

आया अदालत का आदेश

प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा ने बताया कि “पीठ जब सांसद संविधान के अनुच्छेद 76(5) के अंतर्गत नये प्रधानमंत्री के निर्वाचन के लिये मतदान में हिस्सा लेते हैं, तब पार्टी व्हिप लागू नहीं होता।”

सुनवाई के बाद लिया निर्णय

संविधान पीठ में उच्चतम न्यायालय के अन्य चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल है | वे हैं दीपक कुमार करकी, मीरा खडका, ईश्वर प्रसाद खातीवाड़ा और डॉ. आनंद मोहन भट्टराई | संविधान पीठ ने इस मामले की सुनवाई पिछले हफ्ते ही पूरी की थी।

स्वागत हुआ निर्णय का

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हर्ष और संतोष जताते हुए नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-यूएमएल के नेता माधव कुमार नेपाल ने कहा कि कोर्ट का फैसला सराहनीय है। उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने सराहनीय काम किया है। इसने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बचाया है। क्योंकि अदालत ने सीधे देउबा को नया प्रधानमंत्री नियुक्त करने को कहा है] ऐसे में हमारे लिए कोई भूमिका नहीं बचती।”

प्रधानमंत्री पद हेतु चुना देउबा को

यूएमएल के 23 सांसदों ने माधव नेपाल की अगुआई में देउबा के पक्ष में प्रधानमंत्री पद के लिये हस्ताक्षर किये थे। माधव नेपाल ने यह भी बताया कि अब से संसद सभी फैसले लिया करेगी। उन्होंने कहा, “संसद बहाल हो गई है। अब हम संसद जाएंगे। अब सभी फैसले संसद द्वारा किए जाएंगे। अदालत के फैसले ने ओली के कृत्यों को लेकर नैतिक सवाल भी खड़े किए हैं।”

राष्ट्रपति ने भंग की संसद

प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व में शीर्ष न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ये फैसला सुना़या | पीठ में शामिल सभी जजों ने कहा कि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के अनुचित अनुग्रह पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने निचले सदन को भंग करने का संविधान विरोधी कृत्य किया था। ज्ञातव्य है कि के पी शर्मा ओली सहित सभी वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता के लिये ये बहुत बड़ा झटका है जो समय से पहले ही चुनावों की तैयारी में लगे थे |

देउबा पांचवी बार बने हैं पीएम

पीठ ने शेर बहादुर देउबा को मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने का आदेश जारी कर दिया | देउबा इससे पहले चार बार प्रधावनंत्री के पद पर रह चुके हैं | पहली बार 1995-1997, दूसरी बार 2001-2002, तीसरी बार 2004-2005 और चौथी बार 2017-2018 तक उनके प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल रहा है |

भारत को भी होगी प्रसन्नता

भारत के लिये भी ये राहत की खबर है क्यूँकि शेरबहादुर देउवा चार बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं और वे भारत के बहुत बड़े समर्थक हैं | दोनों ओर की सरकारों को भी ये आशा है कि जो खटास सम्बंधों में इन कुछ महीनों में आ गई थी वो अब खत्म हो जायेगी | हाल-फिलहाल वे सदन में नेता विपक्ष हैं। कोर्ट ने 18 जुलाई की शाम पांच बजे प्रतिनिधि सभा का नया सत्र बुलाने की भी बात कही है।

ओली को लगी गोली

प्रधानमंत्री केपी ओली को कोर्ट के इस निर्णय से ज़ोरदार झटका लगा है | “क्या से क्या हो गया बेवफा तेरे प्यार में ” | सत्ता के मोह में अंधे होकर अनुचित फैसलों के कारण आज कुर्सी ओली के हाथों से निकल गई है |

नवंबर में होंगे चुनाव

प्रधानमंत्री ओली की संस्तुति पर राृष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने 275 सदस्यीय निचले सदन को 22 मई को पांच महीने में दूसरी बार भंग कर दिया था | साथ-साथ 12 और 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव की घोषणा भी कर दी थी। चुनावों को लेकर अनिश्चितता के कारण पिछले हफ्ते ही निर्वाचन आयोग ने मध्यावधि चुनावों के कार्यक्रम का फरमान जारी किया है |

विश्वास मत हार चुके थे ओली

23 फरवरी को शीर्ष अदालत ने प्रधानमंत्री ओली को भंग की गई प्रतिनिधि सभा को बहाल करने के आदेश जारी किए थे। विश्वास मत हारने के बाद ओली अभी अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिनिधि सभा को भंग करने के जैसे असंवैधानिक कदम पर अपने बचाव में कहा कि उनकी पार्टी के कुछ नेता “समानांतर सरकार” बनाने की ताक में थे।

ओली की पार्टी ने जताया गुस्सा

आपको बता दें कि सत्तारूढ़ी सीपीएन-यूएमएल से जुड़़े युवाओं और छात्रों के अलावा प्रधानमंत्री ओली के समर्थकों ने 69 वर्षीय कम्युनिस्ट नेता के विरूद्ध लिये गये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन मार्च किया। सीपीएन-यूएमएल से जुड़े नेशनल यूथ फोर्स के कार्यकर्ताओं ने उच्च न्यायालय द्वारा लिये गये फैसले के प्रति असंतोष जताते हुए न्यायालय परिसर के पास माईतीघर मंडल पर इकट्ठे होकर नारेबाजी की।

हुई विरोध प्रदर्शन रैली

नारेबाज़ी में सम्मिलित कार्यकर्ताओं ने हाथ में एक बैनर ले रखा था जिस पर लिखा था, “हम उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए सभी आदेशों को स्वीकार करने के लिये बाध्य नहीं हैं, सावधान।” समाचार सूत्रों के अनुसार ओली के विश्वसनी़य पूर्व मंत्री महेश बसनेत भी इस प्रदर्शन रैली में शामिल थे।

दायर की गईं थीं 30 याचिकायें

विपक्षी गठबंधन द्वारा एनसीपी के संरक्षण में याचिका दायर की गई | करीब 30 याचिकाएँ तो राष्ट्रपति विद्यादेवी द्वारा ही सदन को भंग किए जाने के खिलाफ दर्ज़ की गई थीं। एक याचिका विपक्षी गुटों के गठबंधन द्वारा भी दर्ज की गई थी | उस याचिका पर 146 सांसदों के हस्ताक्षर थे | संसद के निचले सदन को फिर से बहाल करने और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त किये जाने की मांग इसमें की गई थी।

आठ माह से चल रही थी गहमागहमी

नेपाल में नेतृत्व का राजनैतिक संकट पिछले वर्ष 20 दिसंबर से ही मंडराने लगा था जब वर्चस्व को लेकर सत्तारूढ़ी पार्टी एनसीपी में असंतोष की भावना फैल गई थी | प्रधानमंत्री ओली की संस्तुति पर राष्ट्रपति भंडारी ने संसद के निचले सदन को एक नही दो बार क्रमश: 20 दिसंबर और 22 मई को भंग कर दिया था | उन्होंने 10 और 12 नवम्बर को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा भी कर दी थी |

जनता हुई प्रसन्न, जागी उम्मीद

अब नेपाल की जनता की उम्मीद जागी है कि देउबा के प्रधानमंत्री के पद पर आरूढ़ होने से नेपाल देश की राजनैतिक,सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ होगी तथा विदेशों से व्यापारिक और व्यवहारिक स्तर पर उचित तालमेल बिठा पाने में नेपाल अधिक सक्षम हो सकेगा |
-अंजू डोकानिया
(काठमांडू ब्यूरो प्रमुख, न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here