Nepal : काठमांडू में मोदी विरोधी षडयन्त्र

0
74
नेपाल और भारत के संबंध सदैव से मैत्रीपूर्ण रहे हैं. दोनों देशों के बीच “रोटी-बेटी” और राम-लक्ष्मण जोड़ी जैसे संबंध रहे हैं. कुछ राजनीतिक अटकलों की वजह से दोनों देशों में जो मौसम बदला, उसका प्रभाव इनके रिश्तों में भी नज़र आया.
ये जानना आपके लिये आवश्यक है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार में भारत-नेपाल देशों के बीच जो कटुता आ गई थी उसकी वजह से नेपाल में भारत विरोधी तत्वों ने मौके का फायदा उठाते हुए भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की इमेज धूमिल करने हेतु प्रदर्शन, नारेबाजी और उनके पुतले जलाकर विरोध प्रकट किया.
नेपाल सरकार ने देश के नागरिकों को अपने पड़ोसी और मित्र देश के सम्मान को हानि पहुंचाने वाले ऐसा कोई भी ‘निंदनीय और अपमानजनक’ कार्य न करने के लिये चेताया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार बयास ग्रामीण नगरपालिका के तैंत्तिस वर्षीय जय सिंह धामी महाकाली नदी अस्थायी रोपवे के ज़रिये पार कर रहे थे परन्तु भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को देख नदी में छलाँग लगा दी.
इस मामले में भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जय सिंह धामी नेपाल के धारचूला से भारत के उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित गास्कू में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश पाने का प्रयास कर रहे थे. इस मामले की जांच-पड़ताल चल रही है जबकि नेपाली जांच समिति की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटित घटना के साक्षी भारतीय सुरक्षाकर्मी भी हैं.
नेपाल सरकार का यह बयान इसी संदर्भ में आया है क्यूँकि विरोधी दलों के विद्यार्थी और युवा संगठनों ने भारत से सटी सीमा पर महाकाली नदी पार करते हुए नेपाली युवक जयसिंह धामी के नदी में डूबने की घटना के विरोध मे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला जलाया. नेपाल सरकार ने कहा कि मित्र देशों के प्रति ऐसा व्यवहार और प्रदर्शन उचित नहीं.
नेपाल सरकार ने भारत से अपने मैत्रेयी संबंध को ध्यान में रखते हुए कहा कि “वह प्रतिबद्ध है कि ऐसी किसी भी गतिविधि को रोका जाए जिससे राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंच सकता है. हम सभी से अनुरोध करते हैं कि वे ऐसा कोई कार्य नहीं करें जिससे मित्र देशों के मान-सम्मान को नुकसान पहुंच सकता है.”
गृह मंत्रालय ने बताया कि नेपाल की प्राचीन काल से यह परंपरा रही है कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ किसी भी पनपे विवाद को कुशल कूटनीतिक व सकारात्मक विचारों के साथ बातचीत से सुलझाने के पक्ष में ही रहता है. यह भी दावा किया कि “भविष्य में भी कूटनीतिक पहल और आपसी बातचीत का इस्तेमाल किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए किया जाएगा.”
सरकार द्वारा यह चेतावनी भी स्पष्ट रूप से दी गई है कि गृह मंत्रालय पड़ोसी देशों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों गृह मंत्रालय द्वारा कड़ी सजा दी जायेगी.

-अंजू डोकानिया (ब्यूरो प्रमुख, न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल, काठमांडू)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here