अब मिलेगा पनिशमेन्ट, क्यों जगाया ढाई हजार साल से सो रही Mummy को?

बच्चे जब सिर्फ ढाई घंटे से सो रही मम्मी को जगा देते हैं तो मम्मी ही अक्सर उनको पनिशमेन्ट दे देती है, ऐसे में अगर आप ढाई हज़ार साल से सो रही ममी को जगा देते हैं तो पनिशमेन्ट के लिये रेडी रहना चाहिये..

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मिस्र की है ये खबर जो हमारे पास चल कर आई है. वैसे भी ममियों और पिरामिडों के लिए मिस्र को जाना जाता है. इसी देश में हुई है ये घटना जहां ढाई हज़ार साल से सो रही एक ममी को जगाने की उद्दंडता कर दी गई और उसके बाद अब लग रहा है डर. वजह डर की सही भी है क्योंकि कहा जाता है कि ममी इस गुस्ताखी की सजा जरूर देती है. अब जब सजा मिलनी ही है तो डरने से कोई फायदा नहीं. वैसे डरने से पनिशमेन्ट की तकलीफ तो बढ़ जाती है.

त्रेता युग में जगाया था पहले  

पहले भी ऐसा हो चुका है त्रेता युग में. उस समय कुम्भकर्ण को जगाया गया था जिसके बाद वो भी भयानक क्रोध में आ गया था. यद्यपि बाद में रावण के समझाने-बुझाने से वो शांत हो गया था.  परंतु आज कलियुग है और अभी समझाने-मनाने वाला कोई रावण भी उपलब्ध नहीं है. इस स्थिति में जब आपनी दुनिया के मिस्र देश में ढाई हज़ार साल पुराने ताबूत को आपने खोज लिया था तो उसको किसी अजायबघर में रख देना चाहिये था. अब यदि आपने इस ताबूत को खोल कर ममी को जगा दिया है तो आपका शाप लगने का डर तो लाजमी है न..

ढाई हज़ार साल है ममी की उम्र

जान-बूझ कर की गई है ये भूल मिस्र में. भले ही ये घटना इतिहास में दर्ज होने वाली हो, या चाहे इसका राज़ ही क्यों न दुनिया जानना चाहती हो कि कैसे हज़ारों साल तक एक मृत शरीर सुरक्षित रहता है, फिर भी ये डर भी सच है कि प्राकृतिक निद्रा में सो रहे मृत शरीर को जगाना जिसकी उम्र 2500 साल हो, खतरनाक होता है. ऐसे में जब अब पुरातत्ववेत्ताओं ने इस ममी को ‘नींद’ से जगा ही दिया है तो अब इनको सता भी रहा है शाप लगने का डर. उनको यहाँ के लोगों ने यही कहा है कि गलती कर दी, अब पता नहीं क्या कहर टूटेगा आप पर. पीछे जा कर देखें तो पता चलता है कि कुछ दिनों पहले मिस्र में हज़ारों साल पुराने ताबूत ढूंढे गए थे और इन्हीं ताबूतों में से एक ढाई हजारा वर्ष पुराने ताबूत को खोल कर भी देखा गया है.

कब्रिस्तान है सक्कारा का

मिस्र की राजधानी कायरो में स्थित ये कब्रिस्तान है सक्कारा का. सक्कारा के इस कब्रगाह के भीतर मिट्टी की कब्रें पाई गई हैं. पुरातत्ववेत्ताओं का यह अभियान दो माह पूर्व प्रारंभ हुआ था और उसके बाद खुदाई के दौरान जमीन के भीतर 36 फीट नीचे तेरह ताबूतों की उपस्थिति पाई गई. अधिक गहराई में जाने पर और अधिक ताबूत मिलने लगे तो पुरातत्ववेत्ताओं का उत्साह दुगुना हो गया है. परन्तु इसी बीच जब एक ममी को खोल कर देखा गया तो पुरातत्ववेत्ताओं के खेमें में एक डर का माहौल भी पैदा हो गया है. उनको डर है कि कहीं इसका कोई बुरा परिणाम सामने न आये. वैसे यहाँ रहने वाले लोग कहते हैं कि जो किया वो भुगतना तो पड़ेगा ही..

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