Ottoman Empire फिर आया तो भारत धो देगा उसे

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आज से 100 साल पहले हर मुसलमान एक गलतफहमी का शिकार था वो यह कि ऑटोमन साम्राज्य एक दिन पूरे विश्व को जीतेगा और इस्लाम का परचम लहराएगा।
उस समय के ऑटोमन में टर्की, ग्रीस, सीरिया, इजरायल, सऊदी अरब और मिस्र लीबिया जैसे देश शामिल थे। ये एक कट्टर इस्लामिक साम्राज्य था जिसका विघटन 1882 में शुरू हो गया। 1912 में प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई और ऑटोमन ने जर्मनी का साथ दिया।
एक समय लग रहा था ऑटोमन जीत जाएगा मगर अचानक अमेरिका मित्र देशो की तरफ से आ गया और उसने जर्मनी को धूल चटा दी, ब्रिटेन और फ्रांस ने ऑटोमन को बुरी तरह हराया। भारत के हिन्दू राजाओ खासकर जोधपुर और मैसूर ने भी अपनी सहायता ब्रिटेन को दी थी।
ब्रिटेन और फ्रांस ने ऑटोमन के चिथड़े उड़ा दिये और उसके कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया, इस्लामिक जगत का खलीफा बनने का सपना सपना रह गया। 1923 में आधुनिक टर्की का निर्माण हुआ, कमाल मुस्तफा अतातुर्क ने ऑटोमन साम्राज्य के विरुद्ध बगावत करके उसे नष्ट कर दिया और सुल्तान को टर्की से देश निकाला दे दिया।
यहाँ मुसलमान ऑटोमन के लिये खिलाफत आंदोलन करने लगे जिसे अंग्रेजो ने कुशलता से दबा दिया। वही कमाल पाशा ने टर्की को एक सेक्युलर और आधुनिक देश घोषित किया तथा संधि की कि टर्की अब कभी सीमा विस्तार नही करेगा और ऑटोमन साम्राज्य अब एक समय की बात होकर रह गयी।
1931 में सऊद राजपरिवार ने सऊदी अरब देश बनाया और अमेरिका की सहायता से अब वो इस्लामिक जगत का सिरमोर बन गया। तब से टर्की कोशिश कर रहा है कि किसी तरह वो सऊदी को हटाकर फिर से इस्लामिक जगत का खलीफा बन जाये मगर खलीफा बनना तो दूर अब तो वो सेक्युलर देश है।
अब टर्की के राष्ट्रपति एरडोगन कह रहे है कि 2023 में उस संधि को 100 वर्ष हो जाएंगे और यह समाप्त हो जाएगी हम फिर से ऑटोमन साम्राज्य का निर्माण करेंगे, वैसे तो यह काफी हास्यास्पद है क्योकि 100 वर्ष जैसी कोई चीज उस संधि में थी ही नही।
मगर एक बात साफ है टर्की सऊदी के खिलाफ मोर्चा खोलेगा और यह चर्चा भारत मे होना आवश्यक है। जब टर्की सऊदी के विरुद्ध जेहाद छेड़ेगा तो भारत मे भी इस्लामिक आंदोलन होंगे।
सऊदी को बचाना बहुत आवश्यक है, क्योकि सऊदी आज के समय भारत और पश्चिमी देशों पर बहुत निर्भर है। सऊदी हर जगह वही बोलता है जो हम उसे कहते है, 2014 के बाद सऊदी ने कभी कोई भारत विरोधी बयान नही दिया।
मैं जानता हूं सारे राष्ट्रवादी यही चाहते है कि ये लोग आपस मे लड़कर खत्म हो जाये। भरोसा रखिये सऊदी को तो मुहम्मद बिन सलमान खुद ही खत्म कर देगा, बस एक बार उसे युवराज से महाराज बनने दीजिये। उसका अंत गद्दाफी जैसा और सऊदी का अंत लीबिया जैसा ही होगा, बस भारत को चाहिए कि सऊदी टर्की पर भारी रहे।
2023 के बाद टर्की कोशिश करेगा कि वह क्षेत्र में अस्थिरता लाये, उत्तर दिशा में नाटो देश बैठे है वो गिद्धों को भोज पर आमन्त्रित नही करेगा, दक्षिण में इजरायल बैठा है संभव है वो सीरिया और सऊदी अरब के विरुद्ध ही कुछ कर सकता है और चूंकि टर्की हमारा दुश्मन है उस नाते सऊदी और सीरिया की रक्षा भारत को करनी ही चाहिए।
हमारी सेनाओं ने उस समय भी ऑटोमन को पानी पिलाया था और 2023 में भी हमारी सेना उस अहंकारी एरडोगन का मान मर्दन करने की ताकत रखती है।

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