Parakh ki kalam se: आ गया है समय, भारत बेहतर करे ब्रिटेन के साथ अपने संबन्ध

चंद्रशेखर आजाद और भगतसिंह के लिये ब्रिटेन कभी क्षमा नही किया जा सकता मगर हमे 1931 के आगे भी बढ़ना होगा। आज ब्रिटेन हमारे लिये और हम ब्रिटेन के लिये एक बहुत आवश्यक मित्र है..

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यही वो क्षण है जिसके कारण भारत और ब्रिटेन के संबंध सुधर सके। श्रीमती गांधी के साथ ये है मार्ग्रेट थैचर, जो ब्रिटिश इतिहास की सबसे सफल प्रधानमंत्री रही।
इनके पिता एक सुपर मार्केट में काम करते थे, इन्होंने पढ़ाई करने के बाद नौकरी की और कंजरवेटिव पार्टी की सदस्य बन गयी। 1959 में मार्ग्रेट को टिकट नही मिला मगर अगले ही चुनाव में ना सिर्फ टिकट मिला बल्कि वे जीतकर संसद भवन पहुँची।
मात्र दो वर्षों के कार्यकाल मे उन्हें केबिनेट में जगह दे दी गयी इससे आप उनकी शक्ति और प्रभाव का अनुमान लगा सकते है। 1969 में श्रीमती इंदिरा गांधी के विरुद्ध बगावत हुई और मार्ग्रेट ने इसे बहुत ध्यान से देखा।
जिस तरह इंदिरा गांधी ने मोरारजी देसाई को साइड में करके कांग्रेस की बागडोर संभाली वह अंदाज मार्ग्रेट को बड़ा पसंद आया और उनके मन मे यह बात घर कर गयी कि इंदिरा गांधी से बड़ा नेता तो संसार मे है ही नही।
1971 में भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ, ब्रिटेन पाकिस्तान के साथ था मगर मार्ग्रेट अपनी ही पार्टी के विरुद्ध थी और पाकिस्तान की पराजय से प्रसन्न थी।
बाद में मार्ग्रेट ने भारत की यात्रा की तथा यह कहा कि मैं इंदिरा गांधी से राजनीति सीखने आयी हु। उनके इस बयान का विरोध हुआ मगर मार्ग्रेट का कोई कुछ नही कर पाया।
1979 में मार्ग्रेट आखिरकार प्रधानमंत्री बन गई, 1982 में उन्होंने अर्जेंटीना के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। दरसल फाकलैंड द्वीप को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना का विवाद चल रहा था, मार्ग्रेट ने रॉयल आर्मी भेजी और अर्जेंटीना को पराजित किया।
इस एक कदम ने उन्हें ब्रिटेन की लोह महिला का दर्जा दे दिया। 1984 में पंजाब विपदा के समय अमेरिका ने शातिर चाल चली और पंजाब का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उछालना चाहा मगर मार्ग्रेट थैचर ने इसका विरोध कर दिया, रोनाल्ड रीगन उनके अच्छे मित्र थे फिर भी उन्होंने भारत के हितों के विरुद्ध कोई निर्णय नही लिया।
1990 में आंतरिक कलह की वजह से उन्हें त्याग पत्र देना पड़ा, वे एक मात्र महिला है जिनकी मूर्ति जीते जी सदन के बाहर बनवाई गई। 2013 में उनकी मृत्यु हुई तो ब्रिटिश महारानी भी श्रद्धांजलि देने पहुँची थी।
मगर ये मार्ग्रेट थैचर की ही नीतियां थी कि भारत और ब्रिटेन के संबंध आज इतने सुधर सके।
चंद्रशेखर आजाद और भगतसिंह के लिये ब्रिटेन कभी क्षमा नही किया जा सकता मगर हमे 1931 के आगे भी बढ़ना होगा। आज ब्रिटेन हमारे लिये और हम ब्रिटेन के लिये एक बहुत आवश्यक मित्र है।
आज मार्ग्रेट थैचर का टॉपिक इसलिए निकाला क्योकि मार्ग्रेट थैचर ने यह नीति बनाई थी कि यदि कोई भी देश अर्जेंटीना को हथियार बेचता है तो ब्रिटेन उसे सजा देगा। पिछले 30 वर्षों से किसी ने उसे हथियार नही बेचे।
अब चूंकि पाकिस्तान के संबंध ब्रिटेन से खराब हो चुके है और ब्रिटेन ने पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने से मना कर दिया है इसलिए पाकिस्तान के मीडिया ने यह अफवाह फैलाई थी कि अर्जेंटीना उनसे कुछ युद्ध विमान खरीदेगा।
बहरहाल अर्जेंटीना की सरकार ने पाकिस्तान को इसके लिये मना करके एक बार फिर गरीब के साथ मजाक कर ही दिया। पाकिस्तान से कोई राष्ट्रीय दुश्मनी नही है मगर कदाचित जिन्ना का उद्देश्य पाकिस्तान को जलील करवाना ही था।

 

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