परख की कलम से: Afghanistan पैदा करने वाला है भारत के लिये बड़ा संकट !

भारतवासियों को चाहिए कि वे कुछ वर्ष सरकार को व्यर्थ व्यय के लिये मजबूर न करें.. इस समय देश की सेना को पैसों की बहुत अधिक आवश्यकता है..

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दो देश है जो फिर से पाषाण युग मे पहुँचने वाले है या फिर उनका अस्तित्व सिंधु घाटी की तरह समाप्त होने वाला है – एक है अफगानिस्तान और दूसरा लेबनान
कैसी विचित्र स्थिति होगी, यदि मान लो आप एक ऐसे देश में जन्म लें जहाँ कोई सरकार ही न हो, सेना जनता के साथ मिलकर दंगे कर रही हो और 1 डॉलर आपकी 30000 मुद्राओं के बराबर हो।
यही हाल लेबनॉन का हो गया है। गरीबी चरम पर है सरकार इस्तीफा दे चुकी है और विपक्ष ने भी सरकार बनाने से मना कर दिया है।
यहाँ सेना भी सड़क पर उतरी हुई है, सब भगवान भरोसे है। लेबनॉन को पहले सीरिया ही कंट्रोल करता था मगर अब सीरिया की स्थिति भी खास नही रह गयी है। संभावना ये भी है कि इजरायल लेबनॉन पर कब्जा कर सकता है और यह देश अब बस इतिहास बनकर रह जायेगा।
दूसरी ओर है अफगानिस्तान जहाँ से तालिबान ने टर्की को जेहाद की धमकी दे डाली है। दरसल 85% अफगानिस्तान तालिबान के नियंत्रण में आ गया है, कांधार पर तालिबान का कब्जा हो गया है और वह काबुल से मात्र 20 किलोमीटर दूर बैठा है।
भारत के सामने चुनौती है अपने अधिकारियों और राजदूतों को निकालना। अफगानिस्तान भूमध्य देश है जहाज से आप भाग नही सकते, जमीन का तो सवाल ही नही उठता।
अतः काबुल का एयरपोर्ट ही सबसे महत्वपूर्ण है जिसे फिलहाल अमेरिका की सेना ने घेर रखा है। अमेरिका सितम्बर तक इसे खाली कर देगा तो जिम्मेदारी ब्रिटेन और टर्की पर आ जायेगी क्योकि अमेरिका के बाद इन्ही दो देशों को अफगानिस्तान में अनुभव है।
टर्की ने एयरपोर्ट की सुरक्षा लेने की बात कही तो तालिबान ने एरडोगन को जेहाद की धमकी दे डाली। अंतर्राष्ट्रीय समाचार इन्ही खबरों से भरे पड़े हैं और लगता है भारतीय मीडिया को इससे कोई लेना-देना नही है।
तालिबान ने भारत के इन्वेस्टमेंट को जमकर नुकसान पहुँचाया है जबकि चीन के प्रोजेक्ट को नही। व्यक्तिगत स्तर पर मुझे पूरी उम्मीद है तालिबान को पाकिस्तान भारत के विरुद्ध प्रयोग करेगा। बेहतर होगा भारत कोई एक्शन ले जो कि बहुत रिस्की भी है।
भारत और अमेरिका को अफगान सरकार की रक्षा करनी ही होगी, हम यह नही भूल सकते कि पाक अधिकृत कश्मीर अफगानिस्तान से लगता है। एक तरीका और है कि अफगानिस्तान पर परमाणु बम गिरा दिया जाए मगर इसके लिये अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति का मिलना असंभव है।
भारत को तीन देशों के विरुद्ध तैयार रहना होगा, भारतवासियों को चाहिए कि वे कुछ वर्षों के लिये सरकार को व्यर्थ व्यय के लिये मजबूर न करें। इस समय देश की सेना को पैसों की बहुत अधिक आवश्यकता है।
तालिबान ने आश्वासन दिया था कि वो गजवा ए हिन्द नही करेगा मगर भारत मे घुसपैठ होना तय है। इससे पहले साँप फन उठाये भारत को कुचल देना चाहिए। जिस दिन भारत ने तालिबान के विरुद्ध सेना उतारी उसी दिन आपको भारत मे इस्लामिक हमले होते दिखेंगे।
कांग्रेस समेत सभी मुस्लिम संगठन भारत का नक्शा बिगाड़ने में लग जाएंगे। भारत को चौथे आपातकाल की आवश्यकता दिखाई दे रही है हालांकि इसमे समय लगेगा।

 

परख की कलम से: Afghanistan का साँप काटेगा अपने निर्माता Pakistan को

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