परख की कलम से: अपनी मौत का सामान तैयार करना इन्सान की समझदारी नहीं है

0
110

जहाँ इस समय हम बैठे है वहाँ 10 करोड़ साल पहले तक डायनासोर विचरण करते थे। कुछ छोटे कुछ बड़े, कुछ शाकाहारी तो कुछ मांसाहारी।
इतनी शक्तिशाली प्रजाति कभी जन्मी ही नही इसने 14 करोड़ वर्षो तक पृथ्वी पर राज किया जबकि मनुष्य को आये कुछ हजार या लाख वर्ष ही हुए है। यह प्रजाति सदा ही यह मानती होगी कि इसका अंत कभी होगा नही पर 10 करोड़ वर्ष पहले खुद विधाता ने इनके अस्तित्व पर प्रश्न लगा दिये।
शुक्र ग्रह के कक्ष से एक तारा टूट गया और तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ने लगा। इसकी गति कुछ 15 हजार किमी प्रति घण्टे की थी। शुक्र से पृथ्वी के बीच तबाही मचाता हुआ यह तारा चंद्रमा के समीप आ गया। 30 सेकंड और लेट हो जाता तो यह चंद्रमा से टकराता और डायनासोर बच जाते।
मगर वह चंद्रमा को बिना छुए सीधे पृथ्वी के वायुमंडल में आ गया। हवा के साथ तीव्र घर्षण से इसका तापमान 70 हजार डिग्री तक पहुँच गया और गति 50 हजार किमी प्रति घण्टे की हो गयी। आर्कटिक महासागर तो इसने मात्र चार मिनट में पार कर लिया और वर्तमान मेक्सिको की खाड़ी से जा टकराया।
अगले 10 वर्ष के लिये पृथ्वी को काले बादलों ने ढक दिया और सूर्य का प्रकाश नही पहुँच सका। भयानक गर्मी में सारे पेड़ पौधे जल गए और डायनासोर की हड्डियां तक पिघल गयी। जब यह तारा पृथ्वी से टकराया तब आग के कई कण हवा में समा गए और गुरुत्वाकर्षण के कारण डायनासोर्स पर आग की बौछारे होने लगी।
सिर्फ वे ही डायनासोर जीवित रह सके जो बहुत छोटे आकार के थे शेष सभी को महादेव के तांडव ने निगल लिया। बहरहाल डायनासोर के अंत ने एक नई प्रजाति के उद्भव का शंख बजा दिया और ये थे स्तननिय जंतु, हालांकि मानव का जन्म कैसे हुआ यह आज भी एक रहस्य है।
जब मनु को सरयू के तट पर ज्ञान प्राप्ति हुई तब मानव सभ्यता अस्तित्व में आयी मगर मनु से पहले मानव कैसे रहते थे इसका ऐतिहासिक रूप से कोई वर्णन नही मिलता।
टर्की के जंगलों में लगी आग का 10 करोड़ वर्ष पुरानी इस घटना से सीधा संबंध है। पहले अमेज़ॉन के जंगल फिर ऑस्ट्रेलिया फिर भारत का उत्तराखंड और अब टर्की।
अचानक से जंगलो में इतनी आग फैलना शुरू कैसे हो गयी, यदि ये किसी मानव ने किया भी है तो ये सब 2016 के बाद ही क्यो बढ़ गया। कही न कही यह प्रकृति का ही कहर है।
प्रकृति आज भी संकेत दे रही है कि मानव उसका उपयोग करे दोहन नही। चीन ने अपने यहाँ एशिया का सबसे बड़ा बांध बनाया है इतना बड़ा की इसने पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवो में अंतर बढ़ा दिया है।
यदि चीन का कल युद्ध होता है तो अमेरिका और भारत को सिर्फ इस बांध को नष्ट करना है चीन के 24 राज्य वैसे ही डूब जाएंगे। कुल मिलाकर मानव विकास की आड़ में खुद ही को खत्म करने का कार्य कर रहा है।
डायनासोर स्वयं अपने अंत के लिये उत्तरदायी नही थे उनका अंत ईश्वर की इच्छा थी फिर भी उनका अंत ऐसा हुआ। मगर हम खुद अपने अंत को विकास और प्रगति का नाम देकर उसकी ओर अग्रसर है।
ध्यान रहे, ब्रह्मा जी वे महान चित्रकार हैं जो इस पृथ्वी जैसी और भी कई खूबसूरत तस्वीरे बना सकते हैं, मगर यदि यह पृथ्वी प्रदूषण की शिकार हुई तो मानव के पास कही जगह नही बचेगी और आने वाली पीढ़ी डायनासोर से बुरा अंत देखेगी।

 

परख की कलम से: ये हो सकता है अगले 150 वर्षों का भविष्य !!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here