परख की कलम से : इजरायल और फिलिस्तीन की जंग पर कई गिद्धों की नज़र है

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इजरायल और फिलिस्तीन की जंग में कई गिद्ध है जो हड्डियों पर नजर गड़ाए बैठे है। फिलिस्तीन को पिटवाने में सबसे बड़ा हाथ इन्ही गिद्धों का है।
तीन देश है जो इस्लामिक जगत को रूल करना चाहते है सऊदी अरब, ईरान और टर्की। गाजा में जो हो रहा है वो इन्ही की देन है। मुसलमानों का सबसे पुराना और सबसे बड़ा दुश्मन गुट है यहूदी जिनके देश इजरायल को वे बार बार टारगेट कर रहे है ताकि इस्लामिक जगत में खुद को साबित कर सके।
ईरान फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास को हथियार बेचता है ताकि इस्लामिक जगत में उसे बड़े स्तर पर देखा जाए। ईरान ही फिलिस्तीनियों को इस्लाम के लिये उकसा रहा है। यदि ईरान को इस्लाम की इतनी परवाह है तो खुद जंग में क्यो नही उतरता?
दूसरी और टर्की है जिसका राष्ट्रपति इस्लामिक जगत का खलीफा बनने का सपना देख रहा है। आज के समय टर्की भी इजरायल को रोक सकता है लेकिन वो सिर्फ यहाँ वहाँ फोन घुमा रहा है खुद कुछ नही कर रहा। क्या अल अक़्सा मस्जिद सिर्फ फिलिस्तीन के मुसलमानों की है, टर्की वालो की नही? लेकिन एरडोगन भी सिर्फ कुछ करने का दिखावा कर रहा है।
भारत के मुसलमान को बड़ी उम्मीद है कि टर्की पाकिस्तान के साथ मिलकर जल्द ही भारत पर कब्जा करेगा और मुसलमान पिछले 75 वर्षों के हिन्दू राज का हिसाब बराबर करेंगे। हालांकि इनसे कुछ उखड़ना नही है, 100 साल पहले प्रथम विश्वयुद्ध में भी इन्होंने सपना देखना था और अमेरिका ने इन सपनो को हवा कर दिया था। उस पर मैं पोस्ट लिख चुका हूं लिंक मेरे टेलीग्राम चैनल पर मिल जाएगी।
सबसे स्मार्ट मूव चला है सऊदी अरब ने जो कि इस समय सारे मुसलमानों का स्वामी है और उन्हें लीड करता है। सऊदी के सम्बंध अमेरिका से लगातार बिगड़ रहे थे, और अमेरिका ईरान से संबंध सुधारने में लगा था। अमेरिका इस समय इजरायल के साथ है।
सऊदी अमेरिका को मक्खन लगा रहा है ताकि अमेरिका ईरान समर्थित फिलिस्तीनियों के विरुद्ध कार्रवाई करके अपने संबंध बिगाड़ ले और सऊदी को फिर से मिडिल ईस्ट में विश्वनीय देश मान ले।
तीनो अपने अपने दाँव खेल रहे है और लाशें गरीब मुसलमानों की बिछ रही है और जब ये तीन इजरायल के विरुद्ध एक्टिंग करेंगे तो ताली भी गरीब मुसलमान ही बजाने वाले है।
सऊदी तथा टर्की हर तरह से सिर्फ व्यापार देखते है उन्हें इस्लाम और मुसलमानों से कोई लेन देन नही है। अल अक़्सा मस्जिद के लिये सिर्फ गरीब मुसलमान सड़क पर है, सऊदी और टर्की में कोई बड़ी हलचल नही है। इस युद्ध का कोई परिणाम नही आने वाला, बस इजरायल फिलिस्तीनियों मार कूट कर चला जायेगा और संभव है कुछ जमीन भी कब्जा ले।
दुख भारत का है जो आज आत्मनिर्भर नही होने की कीमत चुका रहा है, भारत को चाहिए कि वह इजरायल का समर्थन करे और संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से इजरायल को हरी झंडी भी दिखाई है, हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी ताकत है लेकिन कमजोर विदेश नीति और घटिया विपक्ष के कारण हम आज भी पिछड़े दिखाई देते है।
यदि भारत ने इजरायल का साथ दे दिया तो फिर मुसलमान सड़को पर उतरेंगे, मुसलमानों का डर किसी को नही लेकिन उनके साथ जो कांग्रेस आएगी उसका डर अवश्य है। कांग्रेस ने 60 वर्ष राज किया है वो भारत की हर कमजोर कड़ी जानती है और घर के भेद टर्की और चीन के सामने खोलकर हमे जीता हुआ युद्ध हरवा सकती है।
सबसे अच्छा सुझाव होगा कि राष्ट्रपति युद्ध आपातकाल घोषित कर दे तथा कांग्रेस के बड़े लीडर्स को जेल में डालकर किसी कार्रवाई को अंजाम दिया जाए या फिर राजनीतिक हत्याएं भी एक विकल्प हो सकती है। बहरहाल बीजेपी में ये दोनों कदम उठाने की ना तो हिम्मत है ना ही उत्साह।
(परख सक्सेना) 

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