पूछता है देश : कितने में बिका New York TImes?

देश में सबका है ये सवाल कि कितने में बिका न्यूयॉर्क टाइम्स -किसका "पालतू" बना NYT -और भारत में कौन इसका "पालतू" बनेगा?..

0
139
कितने में बिका न्यूयॉर्क टाइम्स -किसका “पालतू” बना NYT -और भारत में कौन इसका “पालतू” बनेगा?
न्यूयॉर्क टाइम्स ( NYT) ने भारत में जिस तरह के संवाददाता मांगने के लिए विज्ञापन दिया है वो कोई नई बात नहीं है -अमेरिकी मीडिया का ये अख़बार तो पहले से हिन्दू और भारत विरोधी रहा है.
आज NYT के दिल का जहर नरेंद्र मोदी के लिए खुल कर बाहर आ गया जब उसने भारत में संवाददाता बनने के लिए पत्रकार में कुछ विशेष योग्यताएं मांगी हैं.
उसमे कहा गया हैं कि उम्मीदवार भारत सरकार विरोधी हो, नरेंद्र मोदी का विरोधी और अपनी हर स्टोरी में भारत की छवि ख़राब करने की क्षमता रखता हो -और कई तरह की मांग रखी हैं.
अब सवाल उठता है कि NYT चीन के हाथों बिका या जॉर्ज सोरोस के हाथों क्यूंकि ये दोनों नरेंद्र मोदी को सत्ता से उतारने के लिए जोर लगा रहे हैं.
चीन ने तो अमेरिका के जस्टिस विभाग को दस्तावेज दे कर कहा था कि उसके अख़बार चाइना डेली ने अमेरिका की मीडिया को अपने हुकुम बजाने के लिए 19 मिलियन डॉलर दिए –मतलब घूस दी थी.
इसमें $4.6 मिलियन वाशिंगटन पोस्ट को और $6 मिलियन द वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए थे –विज्ञापनों पर अख़बारों को अलग पैसा दिया गया जिसमे अकेले NYT को $50,000, Foreign Policy ($240,000), The Des Moines Register ($34,600) CQ-Roll Call (USD76,000) को दिया गया.
विज्ञापनों से मीडिया किस तरह बिकता है, ये भारत के मीडिया से बेहतर कौन जान सकता है, जिसे केजरीवाल ने खरीद लिया.
चीन ने ये भी बताया कि सभी अमेरिकी अख़बारों में कुल मिला कर $11,002,628 विज्ञापनों पर खर्च हुआ और $265,822 ट्विटर के विज्ञापनों पर जबकि चीन में ट्विटर पर बैन है.
NYT ने जो मांगा है वो घोर अनैतिक (unethical) है और पत्रकारिता के स्तर को रसातल में ले जाने वाला है –ये अख़बार तो अपने पत्रकारों को भी किसी तरह की आज़ादी नहीं देता और इसलिए जून, 2020 में अपने ही संपादक से स्तीफा ले लिया था.
NYT ने ही अप्रैल, 2020 में लिखा था कि नरेंद्र मोदी के रहते प्रेस को आज़ादी नहीं है, RSS भारत का एक राष्ट्रवादी संगठन है जो मोदी के करीब है –
ये तो जाहिर है कि NYT के गले में चीन ने पट्टा डाल कर अपना “पालतू” बना लिया है या हो सकता है ये काम जॉर्ज सोरोस ने किया हो.
अब देखना ये है कि भारत के कौन कौन से पत्रकार NYT का “पालतू” बनने के लिए लाइन लगा कर खड़े होते हैं क्यूंकि भारत में तो मोदी विरोधी, देश विरोधी और देश को बदनाम करने वालों की बहुत बड़ी फ़ौज है.
(सुभाष चन्द्र)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here