Rs 500 Cr में JPG फोटो खरीदने वाले भारतीय खरीदार का रहस्य क्या है?

क्या कोई JPG फोटो इतनी महंगी भी खरीदी जा सकती है जिसका भुगतान क्रिप्‍टोकरंसी में किया गया हो?..

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ये खबर सिंगापुर से चल कर आई है जिसमें एक भारतीय खरीदार बन गया है दुनिया के लिए रहस्‍य. इस व्यक्ति ने क्रिप्टो करेंसी में पेमेंट करके पांच सौ करोड़ रूपये खर्च किये सिर्फ एक JPG फोटो के लिए. अब इस भारतीय मूल के व्यक्ति को डिजिटल मिस्ट्री बायर कह कर सम्बोधित किया जा रहा है.

खरीदा है आर्टवर्क

इस Digital Artwork Mystery Buyer ने बीपल के JPG आर्टवर्क के लिए खर्च किये हैं 500 करोड़ रुपये ज्सिने दुनिया भर में इनकी अलग पहचान बन गई है. दरअसल ये सज्जन हैं मूल रूप से भारतीय और मूल रूप से रहने वाले हैं तमिलनाडु में. इन तमिल सज्जन का नाम मेटाकोवन है जो आज दुनिया भर में चर्चित हो गए हैं.

हुई थी नीलामी

बीपल की इस जेपीजी तस्‍वीर की हुई थी नीलामी और खुद नीलामी आयोजित करने वालों को आशा नहीं थी कि इतनी बड़ी राशि में इस तस्वीर को खरीदा जाएगा. ये तस्वीर लगभग 5 अरब रुपये में नीलाम हुई है और इतनी ज्‍यादा कीमत पर एक डिजिटल तस्‍वीर के बेचे जाने से दुनियाभर में चर्चा होने लगी है कि आखिर ऐसा क्या है इस तस्वीर में. सिर्फ तस्वीर ही नहीं, करोड़ों की इस डिजिटल कला को खरीदने वाले रहस्‍यमय खरीदार को लेकर भी बहुत बातें हो रही हैं.

माइक विंकलमान ने रची है तस्वीर

ये JPG तस्वीर अमेरिका के डिजिटल कलाकार माइक विंकेलमान के द्वारा बनाई गई है. हाल ही में हुई एक नीलामी में उनकी इस तस्वीर पर लगभग 5 अरब रुपये की बोली लग गई और इतने अधिक मूल्य पर एक डिजिटल तस्‍वीर के खरीदे जाने से तहलका मच गया है. माइक विंकलमान को बीपल कह कर पुकारा जाता है और इन्होंने खुद भी इस कीमत पर अपनी हैरानी जाहिर की है.

मेटकोवन रहते हैं सिंगापुर में

इस तस्वीर के खरीदार मेटाकोवन पहले भारत के तमिलनाडु प्रदेश में रहते हैं किन्तु अब वे सिंगापुर में सेटल हो गए हैं. कमाल की बात तो ये भी है कि मेटाकोवन ने 5 अर्ब की ये भारी भरकम धनराशि रुपयों में या डॉलर्स में नहीं चुकाई है, अपितु क्रिप्‍टोकरंसी में इसका भुगतान किया है.

मेटपारस के फाउंडर हैं मेटाकोवन

तमिल मूल के मेटाकोवन ने मेटापर्स की स्‍थापना की है जो कि नॉन-फंजिबल टोकन (NFT) को इकट्ठा
करने वाला एक फंड है. ये NFT एक तरह का डिजिटल ऐसेट है जो कोरोना महामारी के बाद से काफी प्रचलन में आ गया है. इसमें ध्यान देने वाला तथ्य ये है कि डिजिटल दुनिया में रूचि रखने वाले लोग और इन्वेस्टर इसके माध्यम से इस तरह के उत्पादों और सेवाओं पर पैसे खर्च करते हैं जो सिर्फ ऑनलाइन उपलब्ध होती हैं. इन्हें ‘नॉन-फंजिबल’ आइटम कहा जाता है और आप जिन्हें एक्सचेंज नहीं कर सकते.

कोई घर नहीं कोई कार नहीं

सिंगापुर में रह रहे मेटकोवन के पास अपना कोई घर या कार नहीं है. मेटकोवन स्वयं को एक क्रिप्‍टो निवासी कह कर अपना परिचय देते हैं अब तक तो इनका कोई बैंक अकाउंट भी नहीं था. । अभी उनके पास कोई घर या कार नहीं है. वर्ष 2013 में मेटाकोवन ने क्रिप्‍टोकरंसी की शुरुआत की थी जिस समय य बिटक्‍वॉइन की कीमत 100 डॉलर थी. पेशे से कोड‍िंग करने वाले मेटाकोवन को यह नाम उनकी मां ने दिया था जिसका तमिल में अर्थ होता है – मेटा का राजा.

दुनिया में सम्पत्ति हो सकती है वितरित

मेटाकोवन का मानना है कि दुनिया में सम्पत्ति हो सकती है वितरित और इसका माध्यम NFT अर्थात नॉन-फंजीबल टोकंस बन सकते हैं. भारत छोड़ने के बाद कुछ समय कनाडा और अमेरिका में रहने के बाद मेटाकोवन अब सिंगापुर वापस आ गए हैं, एनएफटी को लेकर उनका कहना है कि यह एक ऐसी तकनीक है जो ऐसे बदलाव लाएगी जैसे तेल के आने पर हुआ था. वे कहते हैं कि जब कोई नई तकनीक आती है तो उससे धन के फिर से वितरित होने की संभावना प्रबल हो जाती है.

क्या है ब्लॉकचेन तकनीक

ब्लॉकचेन तकनीक डिजिटल चीजों को यूनिक आइटम में बदल देती है और तब उनकी बिक्री ऊंचे दामों पर की जाती है. इन संपत्तियों को एनएफटी भी कहा जाता है अर्थात यानी नॉन फंजीबल टोकन. दरअसल बीपल ने जो तस्वीर डिजिटल तरीके से तैयार की है वो एक कोलाज है जिस कोलाज में कुल 5,000 तस्वीरों को शामिल किया गया है. और ये इतना आसान काम नहीं था, इसको तैयार करने में बीपल को पूरे 13 वर्ष लग गए हैं. पूर्छने पर बिपल का कहना था कि एक दिन में सिर्फ एक तस्वीर ही वो तैयार करते थे.

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