हल्के में न लें मधुमेह को : जानलेवा है ये छिपा हुआ दुश्मन

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(photo curtsy : Google)

मधुमेह को प्रचलित अंग्रेजी शब्द डायबिटीज के नाम से अधिक जाना जाता है. डायबिटीज़ एलोपैथिक भाष में डीएम कहलाती है. डीएम का अर्थ है डायबिटीज़ मेलीटस. एक पंक्ति में इस महारोग का परिचय ऐसे दिया जा सकता है मधुमेह या डायबिटीज़ चयापचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा शरीर में विद्यमान रहती है. इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि हमारे रक्त में शर्करा की मात्रा जब सामान्य से अधिक हो जाती है तो उसे डायबिटीज नाम से जाना जाता है.

डायबिटीज वह रोग है जिसे हम महारोग कह सकते हैं क्योंकि यह कई रोगों का जन्मदाता होता है. मधुमेह या उच्च रक्त शर्करा की पहचान कैसे हो, इस प्रश्न का उत्तर ये है कि यदि आपको बार बार लघुशंका के लिए जाना पड़ता है या प्यास की बढ़ोतरी हो गई हो या भूख में वृद्धि दिखाई दे रही हो तो आपको डायबिटीज की जांच करा लेनी चाहिए.

जांच न कराने की लापरवाही का अर्थ है आपने डायबिटीज को बिना उपचार के ही छोड़ दिया है. यह आपने अपने साथ और अपने परिवार के साथ अन्याय किया है क्योंकि यह अपनेआप आने वाला रोग तो है, अपनेआप जानेवाला रोग नहीं है. यह एक महारोग है और जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है.

डायबिटीज को यदि उपचार के बिना छोड़ा गया तो यह कई जटिलताओं याने कॉम्प्लीकेशन्स का कारण बन सकता है. इसकी त्वरित जटिलताओं में मधुमेह केटोएसिडोसिस, नॉनकेटोटिक हाइपरोस्मोलर कोमा, या यहां तक मृत्यु होना भी सम्मिलित हो सकता है. इसी तरह डायबिटीज की लम्बे समय में होने वाली गंभीर जटिलताओं में सम्मिलित हैं – हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रोनिक किडनी की विफलता, पैर अल्सर और आंखों को हानि, इत्यादि.

डायबिटीज का मूल कारण है कि या तो आपका अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर रहा है या शरीर की कोशिकायें इंसुलिन को ठीक से ग्रहण नहीं कर रहीं हैं.

प्रकार की बात करें, तो डायबिटीज प्रधानतः चार प्रकार की होती है :

डायबिटी का प्रथम प्रकार है टाइप 1 डायबिटीज जिसे हम डीएम के नाम से भी जानते हैं. पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने के लिए अग्न्याशय की विफलता से डीएम हो जाता है. पिछले वर्षों तक इसे ले “इंसुलिन-आश्रित मधुमेह मेलाईटस” (आईडीडीएम) या “किशोर मधुमेह” के रूप में भी जाना जाता था. यह क्यों होता है, यह बता पाना अब तक मेडिकल साइंस के लिए भी सम्भव नहीं हो सका है. इसका कारण अज्ञात है.

डायबिटीज़ का द्वितीय प्रकार टाइप 2 डायबिटीज़ कहलाता है. यह मूल रूप से टाइप वन डायबिटीज़ का ही बिगड़ा हुआ रूप है. डीएम इंसुलिन प्रतिरोध से शुरू होता है जिसमें आगे चल कर यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि जिसमें कोशिका इंसुलिन को ठीक से स्वीकार करने से साफ़ इंकार कर देती है. और यह स्थिति बढ़ कर अचूक इंसुलिन की कमी के रूप में विकसित हो सकती है जो कि टाइप टू डायबिटीज़ बन जाती है.

डायबिटीज़ का तृतीय मुख्य रूप गर्भावधि मधुमेह अथवा प्रेग्नेन्सी डायबिटीज़ के नाम से जाना जाता है. यह तब होता है जब मधुमेह के पिछले इतिहास के बिना गर्भवती महिलाओं को उच्च रक्त शर्करा के स्तर का विकास होता है.

डायबिटीज का चतुर्थ रूप सेकेंडरी डायबिटीज के नाम से जाना जाता है. इस प्रकार की डायबिटीज सामान्य उपचार करने मात्र से ही नियंत्रित की जा सकती है जैसे कि कुछ दवाईओं को बंद करने से, पिट्यूटरी ग्लैंड का ट्यूमर का इलाज करने से, आदि.

डाइबिटीज़ का कारण मुख्यरूप से अनुवांशिक रूप से परिवार में विद्यमान रहना है किन्तु असंतुलित जीवन-चर्या तथा शरीर का भार अधिक होना तथा पर्याप्त शारीरिक श्रम या व्यायाम न करना, इत्यादि है.

(अर्चना शैरी)

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