Corona Care: शंख बजाइये – कोरोना भगाइये!!

कोरोना को दूर से ही दूर भगाना हो तो ये फॉर्मूला इस्तेमाल किया जा सकता है जो सदियों से हमारी धार्मिक आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न अंग रहा है - शंख बजाइये और कोरोना भगाइये !!

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न हमारे देश में कोई शंख से अपरिचित है न ही शंख-ध्वनि से. हाँ, ये तथ्य अवश्य है कि शंख बजाने के लाभ क्या क्या हैं इससे अधिकतर लोग अपरिचित ही हैं. आज जब एक चीनी वायरस ने देशवासियों के स्वास्थ्य पर ग्रहण लगा दिया है तो इस अवसर पर हमें अपने सनातन धर्म के एक प्रमुख प्रतीक शंख का न केवल प्रयोग करना होगा बल्कि इस घातक वायरस को दूर से ही दूर भगा देने के प्रयोजन से ब्रम्हास्त्र के रूप में इसका उपयोग भी करना होगा. समय आ गया है कि सब जानें कि शंख बजाने से हमारे घर भर के जीवाणु-कीटाणु तो मरते ही हैं, घर का और घर के आसपास का सारा वातावरण भी शुद्ध पवित्र और प्रदूषण-मुक्त हो जाता है.

शंख है गरुड़, यदि कोरोना है सर्प 

कोरोना वायरस का नाशक है शंख. इसके शाब्दिक अर्थ को इसके भावार्थ से समझिये. कोरोना वायरस सर्वाधिक हानि पहुंचाता है मानव फेफड़ों को और वहीं दूसरी तरफ मानव फेफड़ों का रक्षक है शंख. संक्रमण का यमदूत ये चीनी वायरस एक दिन नाक में और दो दिन गले में रहने के बाद यह सीने में उतरता है और दो दिन वहां हानि पहुंचाने के बाद छठवें दिन तीव्र ज्वर (ऊंचा बुखार) पैदा करता है. इसके बाद कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाना असम्भव नहीं तो दुष्कर अवश्य हो जाता है. किन्तु यहां भी शंख आपको इस महारोग से तार सकता है.

संक्रमण से पहले भी लाभ और बाद में भी

सनातन धर्म में धर्म और जीवन अलग-अलग नहीं हैं. हमारी धार्मिक गतिविधियाँ भी हमारे जीवन के सारथी स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं. उदाहरण के लिये, शंख बजाने से हमारे फेफड़े सशक्त होते हैं. शंख बजाते समय हमें शक्ति लगानी पड़ती है और तब ही हम शंख को फूंक पाते हैं जिससे हमारे फेफड़ों को शक्ति मिलती है. दूसरे शब्दों में कहें तो यह फेफड़ों का व्यायाम है जो फेफड़ों को सशक्त करता है. इसको करने से फेफड़ों में शुद्ध आक्सीजन की मात्रा बहुत अधिक मात्रा में प्रवेश करती है और फेफड़ों को अपनी आवश्यकता के अनुसार पूर्ण प्राणवायु अर्थात ऑक्सीजन मिल जाती है. इस तरह के अभ्यास से अर्थात नित्य शंख बजाने से आपको दमा नहीं हो सकता और किसी भी प्रकार की सांस का रोग नहीं होगा. यद्यपि कोरोना वायरस द्वारा फेफड़ों के संक्रमण के उपरान्त रोगी के लिए शंख बजा सकना बहुत दुष्कर होगा. तदापि यदि वह प्रयत्न करके किसी तरह शंख बजा ले तो यह क्रिया उसके फेफड़ों को सशक्त करने में योगदान दे सकती है और धीरे-धीरे यह फेफड़ों को पूर्ण ऊर्जा प्रदान करके उनको पूर्व की भाँति सक्रिय करने में सफल हो सकती है.

फेफड़ों पर होता है वायरस का वार

COVID -19 मूल रूप से SARS-CoV-2 नामक वायरस से जन्म लेने वाला एक रोग है. कोरोना वायरस का घातक आक्रमण मानव फेफड़ों पर होता है जहां पहुंच कर यह प्राणघाती सिद्ध हो सकता है. कोरोना वायरस आपके फेफड़ों में उतर कर उनको जकड़ लेता है और उनमें निमोनिया पैदा कर देता है. आम भाषा में कहें तो यह फेफड़ों को खा जाता है अर्थात निष्क्रिय कर देता है. फेफड़े सांस लेने के काम में आते हैं किन्तु कोरोना वायरस धीरे-धीरे फेफड़े को पूरी तरह संक्रमित कर देता है और फेफड़े अपना काम करना बंद कर देते हैं. ऐसे में रोगी के लिए सांस लेना दुष्कर हो जाता है. तब फेफड़े आक्सीजन के लिए बुरी तरह व्याकुल हो जाते हैं और ऑक्सीजन लेने की क्षमता उनके भीतर शेष नहीं होती. तब लगाना पड़ता है वेन्टीलेटर, और देनी पड़ती है ऑक्सीजन जिसे आप कृत्रिम श्वास भी कह सकते हैं. यह व्यवस्था रोगी को संक्रमण ठीक होने तक प्राणवायु देकर जीवित रखने का महती उत्तरदायित्व निर्वहन करती है.

रोज बजायें शंख -होंगे ये फायदे

 कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी फेफड़ों पर इसका असर लंबे समय तक दिखाई देता है. ऐसे में शंख बजाने से रोगी की दुर्बलता शीघ्र जाती रहेगी. कोरोना ही नहीं, जीवन की और भी कई दिशाओं और दशाओं में शंख बजाने का लाभ है जैसे सुख-समृद्धि के लिये बहुत खास माना जाता है शंख का बजाना. प्रसिद्धि की चाह रखने वालों के लिए भी शंख बजाना लाभदायी होता है. व्यक्तिगत स्तर पर संबंधों में मिठास लाने के लिये भी शंख बजाना लाभकारी होता है. इससे सांस की बीमारियां दूर होती हैं, ब्लड का सर्कुलेशन ठीक रहता है, आपके मसल्स होते हैं टोन्ड साथ में होता है मांसपेशियों का अंदरूनी व्यायाम और सबसे कमाल की बात ये है आपके यूरिनरी ब्लैडर की भी साथ ही साथ हो जाती है एक्सरसाइज. अर्थात आप शंख बजा कर अपनी बहुमूल्य किडनी को भी स्वस्थ रख सकते हैं. इसलिए रोज़ नियम से पूजा अथवा आरती के उपरान्त शंख बजाना न भूलें! रोग भगाये शंख ..इसलिये रोज बजायें शंख !!

 

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Health Advisory / Disclaimer

कोरोना के रोगी डॉक्टर से परामर्श लेकर ही शंख बजायें. आपके फेफड़ों में संक्रमण यदि बहुत बढ़ गया है तो यह अनिवार्य हो जाता है कि आप डॉक्टर का परामर्श ले कर ही अपना उपचार करें क्योंकि ऐसी स्थिति में देशी या पारंपरिक भारतीय उपचार आपके स्वास्थ्य की दशा के अनुकूल नहीं भी हो सकते हैं, अपितु कुछ दशाओं में प्रतिकूल भी सिद्ध हो सकते हैं.

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